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Thursday, 14 April 2016

Our development initiatives must be centred around rural development: PM Modi


विशाल संख्‍या में पधारे हुए मेरे प्‍यारे भाइयो और बहनों,

ये मेरा सौभाग्‍य है कि आज डॉ. बाबा साहेब अम्‍बेडकर की 125वीं जन्‍म जयंती निमित्‍त, जिस भूमि पर इस महा पुरूष ने जन्‍म लिया था, जिस धरती पर सबसे पहली बार जिसके चरण-कमल पड़े थे, उस धरती को नमन करने का मुझे अवसर मिला है।

मैं इस स्‍थान पर पहले भी आया हूं। लेकिन उस समय के हाल और आज के हाल में आसमान-जमीन का अंतर है और मैं मध्‍य प्रदेश सरकार को, श्रीमान सुंदरलाल जी पटवा ने इसका आरंभ किया, बाद में श्रीमान शिवराज की सरकार ने इसको आगे बढ़ाया, परिपूर्ण किया। इसके लिए हृदय से बहुत-बहुत बधाई देता हूं उनका अभिनंदन करता हूं।

बाबा साहेब अम्‍बेडकर एक व्‍यक्ति नहीं थे, वे एक संकल्‍प का दूसरा नाम थे। बाबा साहेब अम्‍बेडकर जीवन जीते नहीं थे वो जीवन को संघर्ष में जोड़ देते थे, जोत देते थे। बाबा साहेब अम्‍बेडकर अपने मान-सम्‍मान, मर्यादाओं के लिए नहीं लेकिन समाज की बुराईयों के खिलाफ जंग खेल करके आखिरी झोर पर बैठा हुआ दलित हो, पीढि़त हो, शोषित हो, वंचित हो। उनको बराबरी मिले, उनको सम्‍मान मिले, इसके लिए अपमानित हो करके भी अपने मार्ग से कभी विचलित नहीं हुए। जिस महापुरूष के पास इतनी बड़ी ज्ञान संपदा हो, जिस महापुरूष के युग में विश्‍व की गणमान्‍य यूनिवर्सिटिस की डिग्री हो, वो महापुरूष उस कालखंड में अपने व्‍यक्तिगत जीवन में लेने, पाने, बनने के लिए सारी दुनिया में अवसर उनके लिए खुले पड़े थे। लेकिन इस देश के दलित, पीढि़त, शोषित, वंचितों के लिए उनके दिल में जो आग थी, जो उनके दिल में कुछ कर गुजरने का इरादा था, संकल्‍प था। उन्‍होंने इन सारे अवसरों को छोड़ दिया और वह अवसरों को छोड़ करके, फिर एक बार भारत की मिट्टी से अपना नाता जोड़ करके अपने आप को खपा दिया।

आज 14 अप्रैल बाबा साहेब अम्‍बेडकर की जन्‍म जयंती हो और मुझे हमारे अखिल भारतीय भिक्षुक संघ के संघ नायक डॉ. धम्मवीरयो जी का सम्‍मान करने का अवसर मिला। वो भी इस पवित्र धरती पर अवसर मिला। बहुत कम लोगों को पता होगा कि कैसी बड़ी विभूति आज हमारे बीच में है।
कहते है 100 भाषाओं के वो जानकार है, 100 भाषाएं, Hundred Languages. और बर्मा में जन्‍मे बाबा साहेब अम्‍बेडकर उन्‍हें बर्मा में मिले थे और बाबा साहेब के कहने पर उन्‍होंने भारत को अपनी कर्म भूमि बनाया और उन्‍होंने भारत में बुद्ध सत्‍व से दुनिया को जोड़ने को प्रयास अविरत किया।

मेरा तो व्‍यक्तिगत नाता उनके इतना निकट रहा है, उनके इतने आर्शीवाद मुझे मिलते रहे है। मेरे लिए वो एक प्रेरणा को स्‍थान रहे है। लेकिन आज मुझे खुशी है कि मुझे उनका सम्‍मान करने का सौभाग्‍य मिला। बाबा साहेब अम्‍बेडकर के साथ उनका वो नाता और बाबा साहेब अम्‍बेडकर ने कहा तो पूरा जीवन भारत के लिए खपा दिया। और ज्ञान की उनकी कोई तुलना नहीं कर सकता, इतने विद्यमान है। वे आज हमारे मंच पर आए इस काम की शोभा बढ़ाई इसलिए मैं डॉ. धम्मवीरयो जी का, संघ नायक जी का हृदय से आभार करता हूं। मैं फिर से एक बार प्रणाम करता हूं।

आज 14 अप्रैल से आने वाली 24 अप्रैल तक भारत सरकार के द्वारा सभी राज्‍यों सरकारों के सहयोग के साथ “ग्राम उदय से भारत उदय”, एक व्‍यापक अभियान प्रारंभ हो रहा है और मुझे खुशी है कि बाबा साहेब अम्‍बेडकर ने हमें जो संविधान दिया। महात्‍मा गांधी ने ग्राम स्‍वराज की जो भावना हमें दी, ये सब अभी भी पूरा होना बाकी है। आजादी के इतने सालों के बाद जिस प्रकार से हमारे गांव के जीवन में परिवर्तन आना चाहिए था, जो बदलाव आना चाहिए था। बदले हुए युग के साथ ग्रामीण जीवन को भी आगे ले जाने का आवश्‍यक था। लेकिन ये दुख की बात है अभी भी बहुत कुछ करना बाकि है। भारत का आर्थिक विकास 5-50 बढ़े शहरों से होने वाला नहीं है। भारत का विकास 5-50 बढ़े उद्योगकारों से नहीं होने वाला। भारत का विकास अगर हमें सच्‍चे अर्थ में करना है और लंबे समय तक Sustainable Development करना है तो गांव की नींव को मजबूत करना होगा। तब जा करके उस पर विकास की इमारत हम Permanent बना सकते है।

और इसलिए इस बार आपने बजट में भी देखा होगा कि बजट पूरी तरह गांव को समर्पि‍त है, किसान को समर्पित है। और एक लंबे समय तक देश के ग्रामीण अर्थकारण को नई ऊर्जा मिले, नई गति मिले, नई ताकत मिले उस पर बल दिया गया है। और मैं साफ देख रहा हूं, जो भावना महात्‍मा गांधी की अभिव्‍यक्ति में आती थी, जो अपेक्षा बाबा साहेब अम्‍बेडकर संविधान में प्रकट हुई है, उसको चरितार्थ करने के लिए, टुकड़ो में काम करने से चलने वाला नहीं है। हमें एक जितने भी विकास के स्रोत हैं, सारे विकास के स्रोत को गांव की ओर मोड़ना है।

मैं सरकार में आने के बाद अगल-अलग कामों का Review करता रहता हूं, बहुत बारिकी से पूछता रहता हूं। अभी कुछ महिने पहले मैं भारत में ऊर्जा की स्थिति का Review कर रहा था। मैंने अफसरों को पूछा कि आजादी के अब 70 साल होने वाले है कुछ ही समय के बाद। कितने गांव ऐसे है जहां आजादी के 70 साल होने आए, अभी भी बिजली का खंभा नहीं पहुंचा है, बिजली का तार नहीं पहुंचा है। आज भी वो गांव के लोग 18वीं शताब्‍दी की जिंदगी में जी रहे है, ऐसे कितने गांव है। मैं सोच रहा था 200-500 शायद, दूर-सुदूर कहीं ऐसी जगह पर होंगे जहां संभव नहीं होगा। लेकिन जब मुझे बताया गया कि आजादी के 70 साल होने को आए है लेकिन 18,000 गांव ऐसे जहां बिजली का खंभा भी नहीं पहुंचा है। अभी तक उन 18,000 हजार गांव के लोगों ने उजियारा देखा नहीं है।

20वीं सदी चली गई, 19वीं शताब्‍दी चली गई, 21वीं शताब्‍दी के 15-16 साल बीत गए, लेकिन उनके नसीब में एक लट्टू भी नहीं था। मेरा बैचेन होना स्‍वाभाविक था। जिस बाबा साहेब अम्‍बेडकर ने वंचितों के लिए जिंदगी गुजारने का संदेश दिया हो, उस शासन में 18,000 गांव अंधेरे में गुजारा करते हों, ये कैसे मंजूर हो सकता है।
मैंने अफसरों को कहा कितने दिन में पूरा करोंगे, उन्‍होंने न जवाब मुझे दिन में दिया, न जवाब महिनों में दिया, उन्‍होंने जवाब मुझे सालों में दिया। बोले साहब सात साल तो कम से कम लग जाएंगे। मैंने सुन लिया मैंने कहा भई देखिए सात साल तक तो देश इंतजार नहीं कर सकता, वक्‍त बदल चुका है। हमने हमारी गति तेज करनी होगी। खैर उनकी कठिनाईयां थी वो उलझन में थे कि प्रधानमंत्री कह रहे है कि सात साल तो बहुत हो गया कम करो। तो बराबर मार-पीट करके वो कहने लगे साहब बहुत जोर लगाये तो 6 साल में हो सकता है।

खैर मैंने सारी जानकारियां ली अभ्‍यास करना शुरू किया और लाल किले पर से 15 अगस्‍त को जब भाषण करना था, बिना पूछे मैंने बोल दिया कि हम 1000 दिन में 18,000 गांव में बिजली पहुंचा देंगे। मैंने देश के सामने तिरंगे झंडे की साक्षी में लाल किले पर से देश को वादा कर दिया। अब सरकार दोड़ने लगी और आज मुझे खुशी के साथ कहना है कि शायद ये सपना मैं 1000 दिन से भी कम समय में पूरा कर दूंगा। जिस काम के लिए 70 साल लगे, 7 साल और इंतजार मुझे मंजूर नहीं है। मैंने हजार दिन में काम पूरा करने का बेड़ा उठाया पूरी सरकार को लगाया है। राज्‍य सरकारों को साथ देने के लिए आग्रह किया है और तेज गति से काम चल रहा है।

और व्‍यवस्‍था भी इतनी Transparent है। कि आपने अपने मोबाइल पर ‘गर्व’ - ‘GARV’ ये अगर App लांच करेंगे तो आपको Daily किस गांव में खंभा पहुंचा, किस गांव में तार पहुंचा, कहां बिजली पहुंची, इसका Report आपकी हथेली में मोबाइल फोन पर यहां पर कोई भी देख सकता है। ये देश की जनता को हिसाब देने वाली सरकार है, पल-पल का हिसाब देने वाली सरकार है, पाई-पाई का हिसाब देने वाली सरकार है और हिन्‍दुस्‍तान के सामान्‍य मानवी के सपनों को पूरा करने के लिए तेज गति से कदम आगे बढ़ाने वाली सरकार है। और उसी का परिणाम है कि आज जिस गांव में इतने सालों के बाद बिजली पहुंची है उन गांवों में ऊर्जा उत्‍सव मनाए जा रहे है, हफ्ते भर नाच-गान चल रहे है। लोग खुशियां मना रहे है कि चलो गांव में बिजली आई, अब घर में भी आ जाएंगी ये mood बना है।
हमारी दुनिया बिजली की बात तो दुनिया के लिए 18वीं, 19वीं शताब्‍दी की बात है। आज विश्‍व को optical fiber चाहिए, आज विश्‍व को digital network से जुड़ना है। जो दुनिया में है वो सारा उसकी हथेली पर होना चाहिए। ये आज सामान्‍य-सामान्‍य नागरिक भी चाहता है। अगर दुनिया के हर नागरिक के हाथ में उसके मोबाइल फोन में पूरा विश्‍व उपलब्‍ध है तो मेरे हिन्‍दुस्‍तान के गांव के लोगों के हाथ में क्‍यों नहीं होना चाहिए। ढाई लाख गांव जिसको digital connectivity देनी है, optical fiber network लगाना है। कई वर्षों से सपने देखें गए, काम सोचा गया लेकिन कहीं कोई काम नजर नहीं आया। मैं जानता हूं ढाई लाख गांवों में optical fiber network करना कितना कठिन है, लेकिन कठिन है तो हाथ पर हाथ रख करके बैठे थोड़े रहना चाहिए। कहीं से तो शुरू करना चाहिए और एक बार शुरू करेंगे तो गति भी आएंगी और सपने पूरे भी होंगे। आखिरकर बाबा साहेब अम्‍बेडकर जैसे संकल्‍प के लिए जीने वाले महापुरूष हमारी प्ररेणा हो तो गांव का भला क्‍यों नहीं हो सकता है।

हमारा देश का किसान, किसान कुछ नहीं मांग रहा है। किसान को अगर पानी मिल जाए तो मिट्टी में से सोना पैदा कर सकता है। बाकि सब चीजें वो कर सकता है। उसके पास वो हुनर है, उसके पास वो सामर्थ्‍य है, वो मेहनतकश है वो कभी पीछे मुड़ करके देखता नहीं है। और किसान, किसान अपनी जेब भरे तब संतुष्‍ट होता है वो स्‍वभाव का नहीं है, सामने वाले का पेट भर जाए तो किसान संतुष्‍ट हो जाता है ये उसका चरित्र होता है। और जिसे दूसरे का पेट भरने से संतोष मिलता है वो परिश्रम में कभी कमी नहीं करता है, कभी कटौती नहीं करता है।
और इसलिए हमने देश के किसानों के सामने एक संकल्‍प रखा है। गांव के अर्थ कारण को बदलना है। 2022 में किसान की income double करना बड़े-बड़े बुद्धिमान लोगों, बड़े-बड़े अनुभवी लोगों ने, बड़े-बड़े अर्थशस्त्रियों ने कहा है कि मोदी जी ये बहुत मुश्किल काम है। मुश्किल है तो मैं भी जानता हूं। अगर सरल होता तो ये देश की जनता मुझे काम न देती, देश की जनता ने काम मुझे इसलिए दिया है कि कठिन का ही तो मेरे नसीब में आए। काम कठिन होगा लेकिन इरादा उतना ही संकल्‍पबद्ध हो तो फिर रास्‍ते भी निकलते है और रास्‍ते मिल रहे है।

मैं शिवराज जी को बधाई देता हूं उन्‍होंने पूरी डिजाइन बनाई है, मध्‍य प्रदेश में 2022 तक किसानों की आया double करने का रास्‍ता क्‍या-क्‍या हो सकता है, initiative क्‍या हो सकते है, तरीके क्‍या हो सकते है, पूरा detail में उन्‍होंने बनाया। मैंने सभी राज्‍य सरकारों से आग्रह किया कि आप भी अपने तरीके से सोचिए। आपके पार जो उपलब्‍ध resource है, उसके आधार पर देखिए।
लेकिन ग्रामीण अर्थकारण भारत की अर्थनीति को ताकत देने वाला है। जब तक गांव के व्‍यक्ति का Purchasing Power बढ़ेगा नहीं और हम सोचें कि नगर के अंदर कोई माल खरीदने आएंगा और नगर की economy चलेंगी, तो चलने वाली नहीं है। इंदौर का बाजार भी तेज तब होगा, जब मऊ के गांव में लोगों की खरीद शक्ति बढ़ी होगी, तब जा करके इंदौर जा करके खरीदी करेगा और इसलिए ग्रामीण अर्थकारण की मजबूती ये भारत में आर्थिक चक्र को तेज गति देने का सबसे बड़ा Powerful engine है। और हमारी सारी विकास की जो दिशा है वो दिशा यही है।
बाबा साहेब अम्‍बेडकर जैसे एक प्रकार कहते थे कि शिक्षित बनो, संगठित बनो, संघर्ष करो। साथ-साथ उनका सपना ये भी था कि भारत आर्थिक रूप से समृद्ध हो, सामाजिक रूप से empowered हो और Technologically के लिए upgraded हो। वे सामाजिक समता, सामाजिक न्‍याय के पक्षकार थे, वे आर्थिक समृद्धि के पक्षकार थे और वे आधुनिक विज्ञान के पक्षकार थे आधुनिक Technology के पक्षकार थे। और इसलिए सरकार ने भी ये 14 अप्रैल से 24 अप्रैल, 14 अप्रैल बाबा अम्‍बेडकर साहेब की 125वीं जन्‍म जन्‍म जयंती और 24 अप्रैल पंचायती राज दिवस इन दोनों का मेल करके बाबा साहेब अम्‍बेडकर से सामाजिक-आर्थिक कल्‍याण का संदेश लेता हुए गांव-गांव जा करके गांव के एक ताकत का निर्णय लिया है।

आज सरकारी खजाने से, भारत सरकार के खजाने से एक गांव को करीब-करीब 75 लाख रुपए से ज्‍यादा रकम उसके गांव में हाथ में आती है। अगर योजनाबद्ध दीर्घ दृष्टि के साथ हमारा गांव का व्‍यक्ति करें काम, तो कितना बड़ा परिणाम ला सकता है ये हम जानते है।

हमारी ग्राम पंचायत की संस्‍था है। देश संविधान की मर्यादाओं से चलता है, कानून व्‍यवस्‍था, नियमों से चलता है। ग्राम पंचायत के अंदर उस भावना को प्रज्‍जवलित रखना आवश्‍यक है, वो निरंतर चेतना जगाए रखना आवश्‍यक है और इसलिए गांव के अंदर पंचायत व्‍यवस्‍था अधिक सक्रिय कैसे हो, अधिक मजबूत कैसे हो, दीर्घ दृष्‍टि वाली कैसे बने, उस दिशा में प्रयत्‍न करने की आवश्‍यकता, गांव-गांव में एक चेतना जगाकर के हो सकती है। बाबा साहेब अम्‍बेडकर का व्‍यक्‍तित्‍व ऐसा है कि गांव के अंदर वो चेतना जगा सकता है। गांव को संविधान की मर्यादा में आगे ले जाने के रास्‍ते उपलब्‍ध है। उसका पूरा इस्‍तेमाल करने का रास्‍ता उसको दिखा सकता है। अगर एक बार हम निर्णय करें।

मैं आज इंदौर जिले को भी हृदय से बधाई देना चाहता हूं और मैं मानता हूं कि इंदौर जिले ने जो काम किया है। पूरे जिले को खुले में शौच जाने से मुक्‍त करा दिया। यह बहुत उत्‍तम काम.. अगर 21वीं सदीं में भी मेरी मॉं-बहनों को खुले में शौच के लिए जाना पड़े, तो इससे बड़ी हम लोगों के लिए शर्मिन्‍दगी नहीं हो सकती। लेकिन इंदौर जिले ने, यहां की सरकार की टीम ने, यहां के राजनीतिक नेताओं ने, यहां के सामाजिक आगेवानों ने, यहां के नागरिकों ने, यह जो एक सपना पूरा किया, मैं समझता हूं बाबा साहेब अम्‍बेडकर को एक उत्‍तम श्रद्धांजलि इंदौर जिले ने दी है। मैं इंदौर जिले को बधाई देता हूं। और पूरे देश में एक माहौल बना है। हर जिले को लग रहा है Open defecation-free होने के लिए हर जिले में यह स्‍पर्धा शुरू हुई है। भारत को स्‍वच्‍छ बनाना है तो हमें सबसे पहले हमारी मॉं-बहनों को शौचालय के लिए खुले में जाना न पड़ रहा है, इससे मुक्‍ति दिलानी होगी। उसके लिए बहुत बड़ी मात्रा में हर किसी को मिलकर के काम करना पड़ेगा। ये करे, वो न करे; ये credit ले, वो न ले; इसके लिए काम नहीं है, यह तो एक सेवा भाव से करने वाला काम है, जिम्‍मेवारी से करने वाला काम है। इस “ग्रामोदय से भारत उदय” का जो पूरा मंत्र है, उसमें इस बात पर भी बल दिया गया है।

मेरे प्‍यारे भाइयो-बहनों, हमारे देश में हम कभी-कभी सुनते तो बहुत है। कई लोग छह-छह दशक से अपने आप को गरीबों के मसीहा के रूप में प्रस्‍तुत करते रहे हैं। जिनकी जुबां पर दिन-रात गरीब-गरीब-गरीब हुआ करता है। वे गरीबों के लिए क्‍या कर पाए, इसका हिसाब-किताब चौंकाने वाला है। मैं अपना समय बर्बाद नहीं करता। लेकिन क्‍या कर रहा हूं जो गरीबों की जिन्‍दगी में बदलाव ला सकता है। अभी आपने देखा मध्‍य प्रदेश के गरीबों के लिए, दलितों के लिए, पिछड़ों के लिए जो योजनाएं थी, उसके लोकार्पण का कार्यक्रम हुआ। कई लाभार्थियों को उनकी चीजें दी गई। इन सब में उस बात का संदेश है कि Empowerment of People. उनको आगे बढ़ने का सामर्थ्‍य दिया जा रहा है। जो मेरे दिव्‍यांग भाई-बहन है, किसी न किसी कारण शरीर का एक अंग उनको साथ नहीं दे रहा है। उनको आज Jaipur Foot का फायदा मिला और यह आंदोलन चलता रहने वाला है। यहां तो एक टोकन कार्यक्रम हुआ है और बाबा साहेब अम्‍बेडकर की जन्‍मभूमि पर यह कार्यक्रम अपने आप को एक समाधान देता है।

भाइयो-बहनों, आपको जानकर के हैरानी होगी। आज भी हमारे करोड़ों-करोड़ों गरीब भाई-बहन, जो झुग्‍गी-झोपड़ी में, छोटे घर में, कच्‍चे घर में गुजारा करते हैं, वे लकड़ी का चूल्‍हा जलाकर के खाना पकाते हैं। विज्ञान कहता है कि जब मॉ लकड़ी का चूल्‍हा जलाकर खाना पकाती है। एक दिन में 400 सिगरेट जितना धुँआ उस मॉं के शरीर में जाता है। आप कल्‍पना कर सकते हो, जिस मॉं के शरीर में 400 सिगरेट जितना धुँआ जाएगा, वो मॉं बीमार होगी कि नहीं होगी? उसके बच्‍चे बीमार होंगे कि नहीं होंगे और समाज के ऐसे कोटि-कोटि परिवार बीमारी से ग्रस्‍त हो जाए, तो भारत स्‍वस्‍थ बनाने क सपने कैसे पूरे होंगे?

पिछले एक वर्ष में, हमने trial basis पर काम चालू किया। मैंने समाज को कहा कि भाई, आप अपने गैस सिलेंडर की सब्‍सिडी छोड़ दीजिए और मुझे आज संतोष के साथ कहना है कि मैंने तो ऐसे ही चलते-चलते कह दिया था, लेकिन करीब-करीब 90 लाख परिवार और जो ज्‍यादातर मध्‍यम वर्गीय है, कोई स्‍कूल में टीचर है, कोई टीचर रिटायर्ड हुई मॉं है, पेंशन पर गुजारा करती है लेकिन मोदी जी ने कहा तो छोड़ दो। करीब 90 लाख लोगों ने अपने गैस सिलेंडर की सब्‍सिडी छोड़ दी और पिछले एक वर्ष में आजादी के बाद, एक वर्ष में इतने गैस सिलेंडर का कनेक्‍शन कभी नहीं दिया गया। पिछले वर्ष एक करोड़ गरीब परिवारों को गैस सिलेंडर का कनेक्‍शन दे दिया गया और उनको चूल्‍हे के धुँअे से मुक्‍ति दिलाने का काम हो गया। जब ये मेरा ‘पायलट प्रोजेक्ट’ सफलतापूर्वक हुआ और मैंने कोई घोषणा नहीं की थी, कर रहा था, चुपचाप उसको कर रहा था। जब सफलता मिली तो इस बजट में हमने घोषित किया है कि आने वाले तीन वर्ष में हम भारत के पॉंच करोड़ परिवार, आज देश में कुल परिवार है 25 करोड़ और थोड़े ज्‍यादा; कुल परिवार है 25 करोड़। संख्‍या है सवा सौ करोड़, परिवार है 25 करोड़ से ज्‍यादा। पॉंच करोड़ परिवार, जिनको गैस सिलेंडर का कनेक्‍शन देना है, गैस सिलेंडर देना है और उन पॉंच करोड़ परिवार में लकड़ी के चूल्‍हे से, धुँए में गुजारा कर रही मेरी गरीब माताओं-बहनों को मुक्‍ति दिलाने का अभियान चलाया है।
गरीब का भला कैसे होता है? प्रधानमंत्री जन-धन योजना! हम जानते है, अखबारों में पढ़ते हैं। कभी कोई शारदा चिट फंड की बात आती है, कभी और चिट फंड की बात आती है। लोगों की आंख में धूल झोंककर के बड़ी-बड़ी कंपनियॉं बनाकर के, लोगों से पैसा लेने वाले लोग बाद में छूमंतर हो जाते हैं। गरीब ने बेचारे ने बेटी की शादी के लिए पैसे रखे हैं, ज्‍यादा ब्‍याज मिलने वाला है इस सपने से; लेकिन बेटी कुंवारी रह जाती है क्‍योंकि पैसे जहां रखे, वो भाग जाता है। ये क्‍यों हुआ? गरीब को ये चिट फंड वालों के पास क्‍यों जाना पड़ा? क्‍योंकि बैंक के दरवाजे गरीबों के लिए खुलते नहीं थे। हमने प्रधानमंत्री जन-धन योजना के द्वारा हिन्‍दुस्‍तान के हर गरीब के लिए बैंक में खाते खोल दिए और आज गरीब आदमी को साहूकारों के पास जाकर के ब्‍याज के चक्‍कर में पड़ना नहीं पड़ रहा है। गरीब को अपने पैसे रखने के लिए किसी चिट फंड के पास जाना नहीं पड़ रहा है और गरीब को एक आर्थिक सुरक्षा देने का काम हुआ और उसके साथ उसको रूपे कार्ड दिया गया। उसके परिवार में कोई आपत्‍ति आ जाए तो दो लाख रुपए का बीमा दे दिया और मेरे पास जानकारी है, कई परिवार मुझे मिले कि अभी तो जन-धन एकाउंट खोला था और 15 दिन के भीतर-भीतर उनके घर में कोई नुकसान हो गया तो उनके पास दो लाख रुपए आ गए। परिवार ने कभी सोचा भी नहीं था कि दो लाख रुपए सीधे-सीधे उनके घर में पहुंच जाएंगे।

गरीब के लिए काम कैसे होता है? प्रधानमंत्री जन-धन योजना के द्वारा सिर्फ बैंक में खाता खुला, ऐसा नहीं है। वो भारत की आर्थिक व्‍यवस्‍था की मुख्‍यधारा में हिन्‍दुस्‍तान के गरीब को जगह मिली है, जो पिछले 70 साल में हम नहीं कर पाए थे। उसको पूरा करने से भारत की आर्थिक ताकत को बढ़ावा मिलेगा। आज दुनिया के अंदर हिन्‍दुस्‍तान के आर्थिक विकास का जय-जयकार हो रहा है। विश्‍व की सभी संस्‍थाएं कह रही हैं कि भारत बहुत तेज गति से आगे बढ़ रहा है। उसका मूल कारण देश के गरीब से गरीब व्‍यक्‍ति को साथ लेकर के चलने का हमने एक संकल्‍प किया, योजना बनाई और चल रहे हैं। जिसका परिणाम है कि आज आर्थिक संकटों के बावजूद भी भारत आर्थिक ऊंचाइयों पर जा रहा है। दुनिया आर्थिक संकटों को झेल रही है, हम नए-नए अवसर खोज रहे हैं।
अभी मैं मुम्‍बई से आ रहा था। आज मुम्‍बई में एक बड़ा महत्‍वपूर्ण कार्यक्रम था। बहुत कम लोगों को अम्‍बेडकर साहेब को पूरी तरह समझने का अवसर मिला है। ज्‍यादातर लोगों को तो यही लगता है कि बाबा साहेब अम्‍बेडकर यानी दलितों के देवता। लेकिन बहुत कम लोगों को मालूम है कि बाबा साहेब अम्‍बेडकर दीर्घदृष्‍टा थे। उनके पास भारत कैसा बने, उसका vision था। आज मैंने मुम्‍बई में एक maritime को लेकर के, सामुद्रिक शक्‍ति को लेकर के एक अंतर्राष्‍ट्रीय बड़े कार्यक्रम का उद्घाटन किया। वो 14 अप्रैल को इसलिए रखा था कि भारत में बाबा साहेब अम्‍बेडकर पहले व्‍यक्‍ति थे जिन्‍होंने maritime, navigation, use of water पर दीर्घदृष्‍टि से उन्होंने vision रखा था। उन्‍होंने ऐसी संस्‍थाओं का निर्माण किया था उस समय, जब वे सरकार में थे, जिसके आधार पर आज भी हिन्‍दुस्‍तान में पानी वाली, maritime वाली, navigation वाली संस्‍थाएं काम कर रही हैं। लेकिन बाबा साहेब अम्‍बेडकर को भुला दिया। हमने आज जानबूझ करके 14 अप्रैल को बाबा साहेब अम्‍बेडकर ने जो vision दिया था, उनके जन्‍मदिन 14 अप्रैल को, उसको साकार करने की दिशा में आज मुम्‍बई में एक समारोह करके मैं आ रहा हूं, आज उसका मैंने प्रारम्‍भ किया। लाखों-करोड़ों समुद्री तट पर रहने वाले लोग, हमारे मछुआरे भाई, हमारे नौजवान, उनको रोजगार के अवसर उपलब्‍ध होने वाले हैं, जो बाबा साहेब अम्‍बेडकर का vision था। इतने सालों तक उसको आंखों से ओझल कर दिया गया था। उसको आज चरितार्थ करने की दिशा में, एक तेज गति से आगे बढ़ने का प्रयास अभी-अभी मुम्‍बई जाकर के मैं करके आया हूं।
अभी हमारे दोनों पूर्व वक्‍ताओं ने पंचतीर्थ की बात कही है। कुछ लोग इसलिए परेशान है कि मोदी ये सब क्‍यों कर रहे हैं? ये हमारे श्रद्धा का विषय है, ये हमारे conviction का विषय है। हम श्रद्धा और conviction से मानते हैं कि बाबा साहेब अम्‍बेडकर ने सामाजिक एकता के लिए बहुत उच्‍च मूल्‍यों का प्रस्‍थापन किया है। सामाजिक एकता, सामाजिक न्‍याय, सामाजिक समरसता, बाबा साहेब अम्‍बेडकर ने जो रास्‍ता दिखाया है उसी से प्राप्‍त हो सकती है इसलिए हम बाबा साहेब अम्‍बेडकर के चरणों में बैठकर के काम करने में गर्व अनुभव करते हैं।

सरकारें बहुत आईं.. ये 26-अलीपुर, बाबा साहेब अम्‍बेडकर की मृत्‍यु के 60 साल के बाद उसका स्‍मारक बनाने का सौभाग्‍य हमें मिला। क्‍या 60 साल तक हमने रोका था किसी को क्‍या? और आज हम कर रहे हैं तो आपको परेशानी हो रही है। पश्‍चाताप होना चाहिए कि आपने किया क्‍यों नहीं? परेशान होने की जरूरत नहीं है, आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देने के लिए यही तो सामाजिक आंदोलन काम आने वाला है। और इसलिए मेरे भाइयो-बहनों एक श्रद्धा के साथ.. और मैं बड़े गर्व के साथ कहता हूं कि ऐसा व्‍यक्‍ति जिसकी मॉं बचपन में अड़ोस-पड़ोस के घरों में बर्तन साफ करती हो, पानी भरती हो, उसका बेटा आज प्रधानमंत्री बन पाया, उसका credit अगर किसी को जाता है तो बाबा साहेब अम्‍बेडकर को जाता है, इस संविधान को जाता है। और इसलिए श्रद्धा के साथ, एक अपार, अटूट श्रद्धा के साथ इस काम को हम करने लगे हैं। और आज से कर रहे हैं, ऐसा नहीं। हमने तो जीवन इन चीजों के लिए खपाया हुआ है। लेकिन वोट बैंक की राजनीति करने वालों ने समाज को टुकड़ों में बांटने के सिवाए कुछ सोचा नहीं है।

बाबा साहेब आम्‍बेडर, उन पर जो बीतती थी, शिक्षा में उनके साथ अपमान, जीवन के हर कदम पर अपमान, कितना जहर पीया होगा इस महापुरुष ने, कितना जहर पीया होगा जीवन भर और जब संविधान लिखने की नौबत आई, अगर वो सामान्‍य मानव होते, हम जैसे सामान्‍य मानव होते तो उनकी कलम से संविधान के अंदर कहीं तो कहीं उस जहर की एक-आध बिन्‍दु तो निकल पाती। लेकिन ऐसे महापुरुष थे जिसने जहर पचा दिया। अपमानों को झेलने के बाद भी जब संविधान बनाया तो किसी के प्रति कटुता का नामो-निशान नहीं था, बदले का भाव नहीं था। वैर भाव नहीं था, इससे बड़ी महानता क्‍या हो सकती है? लेकिन दुर्भाग्‍य से देश के सामने इस महापुरुष की महानताओं को ओझल कर दिया गया है। तब ऐसे महापुरुष के चरणों में बैठकर के कुछ अच्‍छा करने का इरादा जो रखते हैं, उनके लिए यही रास्‍ता है। उस रास्‍ते पर जाने के लिए हम आए हैं। मुझे गर्व है कि आज 14 अप्रैल को पूरे देश में “ग्राम उदय से भारत उदय” के आंदोलन का प्रारंभ इस धरती से हो रहा है। सामाजिक न्‍याय के लिए हो रहा है, सामाजिक समरसता के लिए हो रहा है।

मैं हर गांव से कहूंगा कि आप भी इस पवित्रता के साथ अपने गांव का भविष्‍य बदलने का संकल्‍प कीजिए। बाबा साहेब की 125वीं जयंती की अच्‍छी श्रद्धांजलि वही होगी कि हम हमारे गांव में कोई बदलाव लाए। वहां के जीवन में बदलाव लाए। सरकारी योजनाओं का व्‍यय न करते हुए, पाई-पाई का सदुपयोग करते हुए चीजों को करने लगे तो अपने आप बदलाव आना शुरू हो जाएगा।

मैं फिर एक बार मध्‍यप्रदेश सरकार का, इतनी विशाल संख्‍या में आकर के आपने हमें आशीर्वाद दिया। इसलिए जनता-जनार्दन का हृदय से बहुत-बहुत अभिनंदन करता हूं।

जय भीम, जय भीम। दोनों मुट्ठी पूरी ऊपर करके बोलिए जय भीम, जय भीम, जय भीम, जय भीम।

Ref:  http://www.narendramodi.in/category/speeches

Tuesday, 5 April 2016

'Stand up India scheme' aims to empower every Indian & enable them to stand on their own feet: PM Modi

वि‍शाल संख्‍या में पधारे हुए मेरे प्‍यारे भाइयो और बहनों!

आज बाबू जगजीवन राम जी की जन्‍मजयंती है। अनेक वर्षों तक राष्‍ट्र की सेवा में उन्‍होंने अपना पूरा जीवन खपा दि‍या। उनके जन्‍म दि‍वस को समता दि‍वस के रूप में भी याद कि‍या जाता है। दलि‍त परि‍वार में पैदा होकर के राष्‍ट्र के गौरव को बढ़ाने में उन्‍होंने जो अथार्त पुरुषार्थ कि‍या, परि‍श्रम कि‍या। उन्‍होंने सामाजि‍क स्‍थि‍ति‍यों को कभी अपने आड़े नहीं आने दि‍या। ऐसे बाबू जगजीवन राम जी की जन्‍मजयंती पर आज भारत सरकार ‘Stand Up India’ कार्यक्रम को launch कर रही है।

बाबू जगजीवन राम जी की एक वि‍शेषता रही कि‍ वे हमेशा merit के आग्रही रहे। scholarship भी वो merit पर लेने के आग्रही रहते थे। Merit पर जो न मि‍ले, उसको लेने से इंकार करते थे और बहुत कम लोगों को याद होगा कि‍ भारत ने जो प्रथम कृषि‍ क्रान्‍ति‍ की, agriculture revolution कि‍या, तब हमारे देश के कृषि‍ मंत्री बाबू जगजीवन राम थे। बहुत कम लोगों को मालूम होगा कि‍ 1971 की लड़ाई में भारत ने जो वि‍जय प्राप्‍त की, उस समय भारत के रक्षा मंत्री बाबू जगजीवन राम थे। लेकि‍न ऐसे कारण रहे देश में कि‍ इस प्रकार की सेवाओं को, ऐसे महापुरुषों के योगदान को करीब-करीब इति‍हास में भुला दि‍या गया है। हम इस मत के है कि‍ राजनीति‍क वि‍चारधाराएं कुछ भी हो, दल कोई भी हो, लेकि‍न देश के लि‍ए जीने-मरने वाले हम सबके लि‍ए आदरणीय होते हैं, हम सबके लि‍ए प्रेरक होते हैं।

शायद बाबू जगजीवन राम जी की जन्‍मजयंती पर पहले कभी भारत सरकार ने कोई कार्यक्रम launch कि‍या हो, कम से कम मेरी स्‍मृति‍ में नहीं है लेकि‍न मुझे आज गौरव हो रहा है और इसका बहुत बड़ा ताल्‍लुक भी है, क्‍योंकि‍ हमने एक योजना बनाई। योजना यह बनाई कि‍ हमारे जो आदि‍वासी भाई-बहन है, हमारे जो दलि‍त भाई-बहन है, वे कब तक नौकरी का इंतजार करते रहेंगे और सरकार भी कि‍तनों को नौकरी दे पाएगी और अगर यही स्‍थि‍ति‍ रही तो समाज के दलि‍त, पीड़ि‍त, शोषि‍त, वंचि‍त, इन मेरे भाइयों का क्‍या होगा, उन नौजवानों का क्‍या होगा? मेरा यह वि‍श्‍वास है कि‍ परमात्‍मा ने जो शक्‍ति‍ और सामर्थ्‍य, जो समझ और हुनर ईश्‍वर ने हमें दि‍या है, वैसा ही मेरे इन दलि‍त परि‍वारों को भी दि‍या है और मेरे आदि‍वासी परि‍वारों को भी दि‍या है। लेकि‍न हम लोग वो है जि‍न्‍हें अवसर मि‍ला, वो लोग हैं जि‍न्‍हें अवसर नहीं मि‍ला। अगर अवसर मि‍लने पर हम कुछ कर सकते हैं, तो अवसर मि‍लने पर मेरे दलि‍त और आदि‍वासी भाई-बहन भी उतना ही उत्‍तम काम कर सकते हैं और देश को बहुत योगदान दे सकते हैं।

और इसलिए, जीवन के हर क्षेत्र में समाज के आखि‍री छोर पर बैठा हुआ जो व्‍यक्‍ति‍ है, उसको आगे आने का अवसर मि‍लना चाहि‍ए। उसको कि‍सी की कृपा पर जीने के लि‍ए मजबूर नहीं होना चाहि‍ए। अगर वो अपने पुरुषार्थ से, अपने परि‍श्रम से, साहस करने को तैयार है, बुद्धि‍ है, क्षमता है। अगर थोड़ी-सी भी सुवि‍धा हो जाए तो वो एक नई, भव्‍य, स्‍वप्‍नों को साकार करने वाली अपनी जि‍न्‍दगी को आगे बढ़ा सकता है और उसी एक वि‍चार में से ये ‘Stand Up India’ की कल्‍पना आई।

15 अगस्‍त को लालकि‍ले पर से मैंने घोषणा की थी – ‘Start Up India, Stand Up India’. ‘Stand Up India’ योजना के तहत 15 अगस्‍त को लालकि‍ले से घोषणा की थी कि‍ भारत के हर बैंक की ब्रांच अपने क्षेत्र में एक दलि‍त को और अगर वहां दलि‍त बस्‍ती नहीं है तो आदि‍वासी को और एक महि‍ला को बैंक की तरफ से लोन देंगे। आज देश में सवा लाख बैंक हैं। एक लाख से ज्‍यादा स्‍थानों पर फैले हुए हैं। आम तौर पर कोई उद्योग या व्‍यापार शुरू होता है, तो जो established शहर होते हैं वहीं पर बढ़ोतरी होती है। हमारी इस योजना के तहत सवा लाख बैंक जब पैसे देंगे तो सवा लाख स्‍थानों पर कोई न कोई उपक्रम शुरू होगा और ढाई लाख लोगों के द्वारा ढाई लाख उपक्रम शुरू होंगे। एक जि‍ले में, एक जगह पर, एक जहां प्रगति‍ हो रही है वहीं नहीं, एक फैला हुआ काम और इसलि‍ए हर ब्रांच को कहा है कि‍ आपकी जि‍म्‍मेवारी होगी कि‍ आपकी ब्रांच जि‍स इलाके में है, उस इलाके के कि‍सी नौजवान, जो कि‍ दलि‍त हो, या आदि‍वासी हो और एक महि‍ला, दो लोगों को आपको लोन देना होगा और उनको नया उद्योग, नया व्‍यवसाय करने के लि‍ए मदद करनी होगी।

आप कल्‍पना कर सकते हैं कि‍ आज जो Job seeker है, वो Job creator बन जाएगा। जो आज नौकरी तलाशता है, वो नौकरी देने वाला बन जाएगा। अगर ऐसे ढाई लाख यूनि‍ट शुरू होते हैं, कोई एक को रोजगार दे, कोई दो को दे, कोई पाँच को दे, हमारे देश के नौजवानों के लि‍ए एक रोजगार का नया अवसर प्राप्‍त होगा।

यह जो ‘Stand Up’ योजना है। मुद्रा योजना और ‘Stand Up’ योजना में एक बहुत बड़ा फर्क है। मुद्रा योजना में भी गारंटी के बि‍ना उद्योगकार बैंक से, कुछ आगे बढ़ना है, तो पैसे ले सकता है। अख़बार बेचने वाला, कमाना है तो ले सकता है पैसे। चाय बेचने वाला हो, चना बेचने वाला हुआ, धोबी हो, नाई हो, छोटे-छोटे लोग जि‍नको बेचारे को पैसे बड़ी ब्‍याज से लेने पड़ते हैं। साहूकार लोग उनको लूट लेते हैं। वो एक बार पैसे लेता है तो ब्‍याज देने के चक्‍कर से बाहर ही नहीं आता है। जीवनभर वो कर्जदार रहता है और देश में 6 करोड़ से ज्‍यादा लोग ऐसे कुछ न कुछ काम करते हैं जो देश की आर्थि‍क गति‍वि‍धि‍ को चलाते हैं। छोटे-छोटे लोग हैं, छोटे दुकानदार हैं। कि‍सी को पाँच हजार चाहि‍ए, कि‍सी को दस हजार चाहि‍ए, कि‍सी को पचास हजार चाहि‍ए। बैंक के दरवाजे उनके लि‍ए बंद थे और ये इतने गरीब थे कि‍ कोई उनके लि‍ए गारंटी नहीं देता था। हमने मुद्रा योजना के तहत बि‍ना कोई गारंटी ऐसे लोगों को लोन मुहैया कराया। अभी अरुण जी बता रहे थे कि‍ हमारा लक्ष्‍य तो सवा लाख करोड़ से भी कम था, लेकि‍न हम उससे भी आगे नि‍कल गए और करीब-करीब सवा तीन करोड़ से ज्‍यादा लोगों को ये पैसे दि‍ए। आज वो अपना कारोबार चला रहे हैं। अपने व्‍यवसाय का वि‍कास कर रहे हैं और ब्‍याज के चंगुल से बच गए हैं लेकि‍न मुद्रा में 10 लाख रुपए तक की रकम मि‍लती है।

यह जो दलि‍त परि‍वारों के लि‍ए योजना बनाई है, आदि‍वासी परि‍वारों के लि‍ए योजना बनाई है, महि‍लाओं को उद्यमी बनाने के लि‍ए जो योजना बनाई है, उसके तहत 10 लाख से लेकर के एक करोड़ रुपए तक की राशि‍ बैंक उनको देगी और उस ब्रांच के इलाके में होगा ताकि‍ हि‍न्‍दुस्‍तान में एक लाख रुपए से अधि‍क जगह पर कोई न कोई नया काम शुरू होगा। अकेला उत्‍तर प्रदेश में हो, अकेला दि‍ल्‍ली में हो, अकेला जयपुर, मुम्‍बई, अहमदाबाद में हो, नहीं। छोटे-छोटे स्‍थान पर काम शुरू होना चाहि‍ए। इस देश को आगे बढ़ाना है और इसलि‍ए बैंक की ब्रांच को . . कोई एक बैंक, उसकी सौ ब्रांच है और बैंक दो सौ लोगों को एक जगह पर दे दे, वो हमें मंजूर नहीं है। अगर सौ ब्रांच है तो जहां ब्रांच होगी, वहीं पर उनको देना होगा, ताकि‍ उस पि‍छड़े इलाके का भी वि‍कास हो। इस योजना के तहत यह कि‍या गया है।

आज आपने देखा होगा। सामान्‍य परि‍वार के लोग, उनको एक योजना के तहत सहभागी बनाया है और मैं भाई मि‍लि‍न्‍द को अभि‍नन्‍दन देता हूं कि‍ उन्‍होंने दलि‍त युवकों में एक नई चेतना जगायी है। स्‍वयं तो उद्योगकार है, लेकि‍न उन्‍होंने तय कि‍या कि‍ वे दलि‍त युवकों को आत्‍मसम्‍मान के साथ जीने वाले, अपने पैरों पर खड़े रहकर काम करने वाले और देश के विकास में योगदान देने वाले बनाना चाहते हैं। मैं तो हैरान था, दलि‍त महि‍लाओं का भी उन्‍होंने एक संगठन खड़ा कि‍या। मैं उस दि‍न जब गया था, 300 महि‍ला उद्यमी दलि‍त, वो सैंकड़ों-करोड़ों का कारोबार कर रही है, अगर यह ताकत है तो उस ताकत को ध्‍यान में लेकर के योजना बनाई जाए तो देश को वि‍कास की ऊंचाइयों पर कैसे ले जा सकते हैं, इसका हम उत्‍तम उदाहरण दे सकते हैं। मेरे लि‍ए व्‍यक्‍ति‍गत रूप से आज का कार्यक्रम मैं उत्‍तम से उत्‍तम कार्यक्रम मानता हूं क्‍योंकि‍ मैं देख रहा हूं कि‍ मेरे दलि‍त भाइयों के, मेरे आदि‍वासी भाइयों के जीवन में वो बदलाव आने वाला है और समाज में वो सम्‍मान के साथ जीएंगे और नई पीढ़ी को रोजगार देने की उनमें ताकत आएगी। इस प्रकार की रचना होना, यह अपने आप में समाज में एक बहुत बड़ा बदलाव लाने का कारण बन रहा है।

आज एक और कार्यक्रम भी इसके साथ जोड़ दि‍या। प्रमुख कार्यक्रम तो मेरा ‘Stand Up India’ का था लेकि‍न हमारे महेश शर्मा जी, अपने इस क्षेत्र में ई-रि‍क्‍शा के लि‍ए कि‍तने दि‍नों से काम पर लगे हुए थे। तो उनका आग्रह था कि‍ इस कार्यक्रम को भी इसके साथ जोड़ दि‍या जाए। मैंने कहा, जरूर जोड़ देंगे और मुझे अभी रि‍क्‍शा वाले परि‍वारों के साथ चाय पर चर्चा करने का मौका मि‍ला। मैं उनकी बातें सुन रहा था। वे वो लोग थे जो पहले कि‍राये की रि‍क्‍शा लेकर के, दि‍नभर मेहनत करके, अपने परि‍वार का गुजारा चलाते थे लेकि‍न ज्‍यादातर पैसे कि‍राये पर, जि‍ससे कि‍राये पर लि‍या है रि‍क्‍शा, उसी पर चला जाता था। अपनी जेब में बहुत कम आता था और मेहनत भी इतनी करनी पड़ती कि‍ एक उम्र से ज्‍यादा काम नहीं कर सकता था। मेहनत भी इतनी पड़ती थी कि‍ ग्राहक खड़ा हो तो भी थक जाते थे, खींचने की ताकत नहीं रहती थी। यह जो अवस्‍था उन्‍होंने अपनी जि‍न्‍दगी में जी. .

भारत सरकार ने एक योजना बनाई। इस योजना के तहत, मेरे मि‍त्र भाई ब्रिजेश इस काम को बखूबी नि‍भाते रहते है और पाँच हजार से ज्‍यादा, 5100 ई-रिक्‍शा आज देने का कार्यक्रम हो रहा है। अब ये अपनी ई-रि‍क्‍शा के मालि‍क बन जाएंगे, जो कल तक कि‍राये की रि‍क्‍शा पर गुजारा करते थे। योजना ऐसी बनी है कि‍ दि‍न भर की कमाई में से, थोड़े पैसे डालकर के वो उसके मालि‍क बन जाएंगे। दूसरा, ई-रि‍क्‍शा होने के कारण शरीर को जो मजदूरी करनी पड़ती थी वो कम हो जाएगी। दि‍न में ज्‍यादा सफर कर पाएंगे, ज्‍यादा काम कर पाएंगे।

आज एक Mobile application को भी launch कि‍या है, Ola. मोबाइल फोन पर जो Ola के application को download करेगा, वो उस पर एक क्‍लि‍क करेगा सि‍र्फ तो नज़दीक में ये जो ई-रि‍क्‍शा वाला खड़ा होगा, उसके मोबाइल फोन पर सूचना जाएगी कि‍ फलानी जगह पर कोई रि‍क्‍शा के लि‍ए खड़ा है। दो-तीन-चार मि‍नट में रि‍क्‍शा आकर के खड़ा हो जाएगा। अभी मैं रि‍क्‍शा में बैठकर के आया। उसी technology से रि‍क्‍शा को बुलाया और उसी रि‍क्‍शा में बैठकर के आया। जेब में पैसों की भी जरूरत नहीं, अगर आपका जन-धन account है, रुपे कार्ड है तो आप मोबाइल फोन से ही अपना पाँच रुपया - सात रुपया - दस रुपया, जो भी कि‍राया होगा, वो आप मोबाइल से उसको दे सकते हैं, आराम से। पहले तो चार लोग हाथ ऊपर करे, कोई ऑटो रि‍क्‍शा वाले देखे न दि‍खे, आज आप मोबाइल फोन से ऑटो रि‍क्‍शा, ई-रि‍क्‍शा को बुला सकते हैं और ई-रि‍क्‍शा में बैठकर के आप आगे जा सकते हैं। इस व्‍यवस्‍था के कारण उनको ग्राहक ढूंढने के लि‍ए घूमना नहीं पड़ेगा, वरना वो तो इधर-उधर देखते रहते हैं कि‍ कोई मि‍ल जाता है - कोई मि‍ल जाता है, अब जरूरत नहीं है। वो एक जगह पर खड़े है, जैसा ही अपने मोबाइल फोन पर सूचना आई, वो दौड़ेगा और लेकर आगे जाएगा।

उसके कारण जो fuel का खर्चा होता है, वो भी नहीं होता और इसमें fuel battery है। इसकी भी व्‍यवस्‍था है कि‍ जि‍स प्रकार से ये पाँच हजार ई-रि‍क्‍शाएं मि‍ली हैं उसी प्रकार से इन रि‍क्‍शाओं को charging करने के लि‍ए Energy Bank भी बनाए गए हैं। जहां पर solar energy से battery charge होगी। आपकी ई-रि‍क्‍शा की battery down हो गई है, आप वहां जाएंगे, अपनी battery वहां छोड़ दीजि‍ए, दूसरी battery ले लीजि‍ए, charging का पैसा दे दीजि‍ए, आप गाड़ी दि‍न भर चलाते रहि‍ए। इसके कारण सैंकड़ों लोगों को ये solar energy से battery charging की दुकानें भी चलाने का मौका मिलेगा और आग्रह यह रखा है कि‍ ये ई-रि‍क्‍शा उनको मि‍लेगी जो रिक्‍शा के मालि‍क नहीं है। जो सि‍र्फ ड्राइवर है और कि‍राये की रि‍क्‍शा चलाते थे, यानी कि‍ गरीब को मि‍लेगा और गरीब, पीडि़त, शोषित, इनको अपने पैरों पर खड़े रखने की ताकत कैसे मिले उस दिशा में हमारी सारी योजनाएं आज काम कर रही हैं। और उसका नतीजा है कि आज यहां 5100 ई-रिक्‍शाएं गरीब परिवार के हाथ में जा रही हैं और मैं उनके चेहरे को देख रहा था और उनको सब मालूम था बोले हमारी ट्रेनिंग हो गई है। कुछ काम रिपेयर करना हो तो रिपे‍यरिंग करना हमको सिखा दिया गया है, हमको ई-रिक्‍शा कैसे चलानी उसका ड्राइविंग सिखा दिया गया है, बैंक के साथ कैसे कारोबार करना, वो सिखा दिया गया है। हमें app के द्वारा कोई सूचना आए तो कैसे जाना वो सिखा दिया गया है, यानी एक प्रकार से skill development का पूरा काम इन परिवारों का हो चुका है। आज ये दोनों चीजें ई-रिक्‍शा के द्वारा environment को भी फायदा है। आज पूरी दुनिया global warming से परेशान है। हम लोगों को विदेशों से तेल लाना पड़ता है, अरबों-खरबों रुपया जाता है। अब वो तेल में भी बचत होगी, क्‍योंकि सूरज से, सूरज की गर्मी से तैयार होने वाली बैटरी से ये ई-रिक्‍शाएं चलने वाली हैं। धुआं भी नहीं होने वाला है, environment का problem नहीं होने वाला है, और इसके कारण सामान्‍य मानवी के आरोग्‍य को भी इसके कारण फायदा तो होगा ही होगा, लेकिन दुनिया में भी जो global warming की चिंता है, उसका उपाय भी इसी से प्रस्‍तुत होगा और ये काम भी आज आपकी इस नगरी में प्रारंभ हो रहा है।

मैं वित्‍त मंत्री श्रीमान अरुण जेटली जी का अभिनंदन करना चाहता हूं, उन्‍होंने Banking Sector को, आपने देखा होगा, हमारे देश में वित्‍त मंत्रालय यानी office, file, बिल पास करना, न करना, उसके आगे देश को वित्‍त मंत्रालय क्‍या होता है ये कभी पता ही नहीं था। ज्‍यादा से ज्‍यादा वित्‍त मंत्रालय से कौन जुड़ते थे तो शेयर मार्केट वाले आएंगे, बड़े उद्योगकार आएंगे। पहली बार आप देखते होंगे कि वित्‍त मंत्रालय द्वारा जनता के बीच जा करके कभी जन-धन योजना, कभी जीवन बीमा योजना, कभी जीवन ज्‍योति योजना, कभी मुद्रा योजना, कभी Stand Up योजना, कभी RuPay Card की योजना, गरीब व्‍यक्ति के साथ देश का वित्‍त मंत्रालय जुड़ा हुआ हो, वो 21वीं सदी की पहली घटना है भाइयो-बहनों। एक-एक department को गरीबों के काम के लिए कैसे लाया जा सकता है, गरीबों की भलाई के लिए कैसे लाया जा सकता है, इसका एक जीता-जागता उदाहरण है।

हमारे देश में बैंकों का राष्‍ट्रीयकरण हुआ था, गरीबों के नाम पर। लेकिन मुझे दुख के साथ कहना पड़ता है कि आजादी के 70 साल होंगे, इस देश के 40 प्रतिशत लोग ऐसे थे कि जिनको कभी बैंक का दरवाजा देखने को सौभाग्‍य नहीं मिला आज तक। हमने बीड़ा उठाया। पिछली बार मैंने 15 अगस्‍त को कहा था और कुछ ही दिनों के भीतर-भीतर सभी बैंक के कर्मचारी, मैं सार्वजनिक रूप से बैंक के सभी कर्मचारियों का, सर्वजनिक रूप से फिर से अभिनंदन करना चाहता हूं, उनका धन्‍यवाद करना चाहता हूं कि वो घर-घर गए, banking hours के बाद भी काम किया, Saturday, Sunday को काम किया, और देश के गरीब लोगों को Bank के खाते से जोड़ दिया। और हमने तो कहा था कि zero balance से बैंक का खाता खुलेगा। आपको एक रुपया नहीं होगा, अरे वो फोन का stationary का जो खर्चा होता है, आठ आना, रुपया, वो भी नहीं होगा। बस आप खाता खुलवा दीजिए। अपना Bank account खुलवा दीजिए। हमने गरीबों से कहा था आपके पैसों की जरूरत नहीं है, बस आप जुड़ जाइए। लेकिन मेरे देश के गरीबों की अमीरी देखिए, मेरे देख के गरीबों की अमीरी देखिए, देश ने अमीरों की गरीबी देख ली है, बैंको से रुपये ले करके भागना कैसा, इसको रास्‍ते लोग खोज रहे हैं। लेकिन एक गरीब देखिए, जिसको तो हमने कहा था कि zero balance से तुम account खुलाओ लेकिन उसकी ईमानदारी देखिए, उसकी अमीरी देखिए, उसने कहा नहीं-नहीं मोदीजी हम ऐसे तो नहीं करेंगे, हम कुछ देना चाहेंगे। और आज मैं गर्व के साथ कहता हूं कि प्रधानमंत्री जन-धन योजना के अंतर्गत गरीबों ने जो बैंक एकाउंट खुलवाए, उसमें किसी ने पचास रुपये, किसी ने सौ रुपये, किसी ने दो सौ रुपये डाला। वो रकम 35 हजार करोड़ रुपये से भी ज्‍यादा हुई, 35 हजार करोड़। ये है मेरे देश के गरीबों की अमीरी। और जिस देश के गरीबों की अमीरी देखतें हैं, तो सरकार का भी मन करता है कि उन गरीबों के लिए खप जाना चाहिए। पूरी सरकार गरीबों के लिए स्‍व-स्‍वाहा कर देनी पड़े तो कर देनी चाहिए, इस मिजाज से मैं काम कर रहा हूं। और मैं मानता हूं देश आगे तब बढ़ेगा जब देश के गरीब के द्वारा देश की विकास यात्रा में भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।

हमारी सारी योजनाएं देश के गरीबों को देश की विकास यात्रा में भागीदार बनाने की एक सुनिश्चित रणनी‍ति के तहत चल रही है। एक के बाद दूसरी योजना, पहली योजना से दूसरी जुड़ी हुई होती है। और इन सारी योजनाओं के तहत एक ऐसा आर्थिक क्षेत्र जो अनछुआ था, किसी ने कभी सोचा तक नहीं था, ऐसे क्षेत्र में प्रवेश करने की दिशा में हम प्रयास कर रहे हैं।

मैं फिर एक बार वित्‍त मंत्रालय को हृदय से बहुत-बहुत अभिनंदन करता हूं। वित्‍त मंत्रालय के सभी अधिकारियों की टीम को अभिनंदन करता हूं कि देश को उन्‍होंने उत्‍तम बजट तो दिया लेकिन देश के गरीबों के लिए एक के बाद एक योजनाएं दे करके देश के गरीबों को ताकत देने का काम किया है इसलिए वे भी बहुत-बहुत बधाई के पात्र हैं।

आज जिन परिवारों को ई-रिक्‍शा मिली है, उनको मैं जब बैठा था, मैंने कहा था लेकिन बाकी लोग वहां नहीं थे, उनसे मैं कहना चाहता हूं। और ये ई-रिक्‍शा वाले मेरा एक काम करेंगे? करेंगे? पक्‍का करेंगे? आप मुझे वादा कीजिए आप अपने बच्‍चों को पढ़ाएंगे। और राजनेताओं आपसे वोट मांगने आते होंगे, मैं आपसे आपके बच्‍चों की शिक्षा की भीख मांगने आया हूं। और उसमें भी आप अपनी बेटियों को तो अवश्‍य पढ़ाएंगे। आप देखिए कुछ ही सालों में आपको ई-रिक्‍शा भी नहीं चलाने पड़ेगी, आपके बच्‍चे, आपके परिवार को नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे। और इसलिए इस सरकार की योजनाओं का लाभ आपके बच्‍चों को सबसे पहले मिलना चाहिए और वो शिक्षा के रूप में मिलना चाहिए। आप देखिए आपकी तो जिंदगी बदल जाएगी, भारत का भविष्‍य बदल जाएगा और इसलिए मैं आज इन ई-रिक्‍शा वालों को भी शुभकामनाएं देता हूं। मेरे दलित परिवारों को आज से जो ‘Stand-up India’ से Loan मिलना शुरू हो रहा है, सवा लाख branches, आगे आएं वहां के नौजवान, इस opportunity का फायदा उठाएं और वे भी समाज में एक अग्रिम कक्षा के उद्योगकार, व्‍यापारी, साहसिक बन करके आएं और देश को नए सिरे से आपको मदद करें इसी एक अपेक्षा के साथ आप सबको बहुत-बहुत धन्‍यवाद।

Ref:: http://www.narendramodi.in/category/speeches

Monday, 28 March 2016

India is one of the brightest spots in world economy : PM Modi at Bloomberg Economic Summit

Mr. Micklethwait,
Distinguished guests,
Ladies and gentlemen.

I am pleased to be here today to mark twenty years of Bloomberg’s presence in India. During that period, Bloomberg has provided intelligent commentary and incisive analysis of India’s economy. It has become an essential part of the finance landscape.

Apart from that, I am grateful for the valuable advice that we have received from Mr. Michael Bloomberg in the design of our Smart Cities programme. As Mayor of one of the world’s great cities, Mr. Bloomberg has personal insight into what makes a city tick. His ideas have enriched the design of our Smart Cities programme. Under this programme, we hope to create one hundred cities which will become role models for urban development throughout the country.
 
Among firms with low levels of leverage, the situation is even better. Upgrades exceed downgrades by a huge margin. The number of upgrades is 6.8 times the number of downgrades for large firms with low leverage; for medium-sized firms the ratio is 3.9; and for small firms it is 6.3. These are exceptionally robust numbers.

The only segment showing an increase in downgrades is highly leveraged large firms. The Government and Reserve Bank have taken tough action to recover dues from large corporate defaulters. Perhaps the noise from this segment has influenced media perceptions.

Moving from credit to investment, net foreign direct investment in the third quarter of the current financial year was an all-time record. But to me, more interesting is the dramatic increase in certain important sectors. In the period from October 2014 to September 2015, FDI in fertilizer was 224 million dollars compared to just one million in the period October 2013 to September 2014; in sugar, it was 125 million dollars compared to just four million dollars; in agricultural machinery, it doubled to 57 million dollars from 28 million dollars. These are sectors that are closely connected with the rural economy. I am thrilled to see that foreign investment is flowing into them.

In the year to September 2015, FDI in construction activities showed 316 per cent growth. Computer software and hardware had 285 per cent growth. FDI in the automobile industry grew 71 per cent. This is concrete evidence that the Make in India policy is having effect in employment intensive sectors.

In a difficult global environment for exports, manufacturing output has fluctuated. However, several key sub-sectors of manufacturing are growing rapidly. Motor vehicle production, which is a strong indicator of consumer purchasing power and economic activity, has grown at 7.6 per cent. The employment-intensive wearing apparel sector has grown at 8.7 per cent. Manufacturing of furniture has grown by 57 per cent, suggesting a pick-up in sales of flats and houses.

Looking towards the future, let me turn to agriculture. In the past, the emphasis has been on agricultural output, rather than on farmers’ incomes. I have set the objective of doubling farmers’ income by 2022. I have laid this out as a challenge, but it is not merely a challenge. With a good strategy, well-designed programmes, adequate resources and good governance in implementation, this target is achievable. And, as a large share of our population depends on agriculture, a doubling of farmers’ incomes will have strong benefits for other sectors of the economy.

Let me outline our strategy.

• First, we have introduced a big focus on irrigation with a large increase in budgets. We are taking a holistic approach which combines irrigation with water conservation. The aim is ‘per drop, more crop’.

• Second, we are focusing on provision of quality seeds and on efficiency of nutrient use. The provision of soil health cards enables accurate selection of inputs according to the requirements of each field. These will lower costs of production and increase net income.

• Third, a large portion of the harvest is lost before it reaches the consumer. In perishables the loss occurs in transit. In non-perishables, it happens during storage. We are reducing post-harvest losses through big investments in warehousing infrastructure and cold chain. We have greatly increased the outlay for agricultural infrastructure.

• Fourth, we are promoting value addition through food processing. As an example, in response to a call from me, Coca Cola has recently started adding fruit juice to some of its aerated drinks.

• Fifth, we are creating a national agricultural market and removing distortions. A common electronic market platform is being introduced across 585 regulated wholesale markets. We want to ensure that a higher share of the final price goes to the farmer, with less going to middlemen. The introduction of FDI in marketing of domestic food products in this budget is with the same objective.

• Sixth, we have introduced the Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana. It is a comprehensive nationwide crop insurance programme which offers farmers protection from risks beyond their control, at an affordable cost. This scheme will ensure that their incomes are protected in times of adverse weather.

• Seventh, we will increase income from ancillary activities. Partly this will be through poultry, honey bees, farm ponds and fisheries. We are also encouraging farmers to use uncultivated portions of their land, especially boundaries between fields, for growing timber and placing solar cells.

Through a combination of

• growth in production,
• more efficient input use,
• reduction in post-harvest losses,
• higher value addition,
• reduced marketing margins,
• risk mitigation
• and ancillary activities,

I am confident we will achieve the targeted doubling of farmers’ income. I am happy to note that Dr. M.S. Swaminathan, the doyen of Indian agriculture, seems to agree. He wrote to me after the budget expressing gratitude for the farmer-centric budget. He welcomed the income orientation given to farming. He went on to say, and I quote,

“On the whole, the budget has tried to be as pro-farmer as possible subject to the limitation of resources. Seeds have been sown for agricultural transformation and for attracting and retaining youth in farming. The dawn of a new era in farming is in sight.”

Let me now turn to some of the programmes and policies that underpin our growth. As I have said before, my goal is ‘Reform to Transform’: the aim of reform is to transform the lives of ordinary people. Let me start with administrative reforms and our focus on execution.

In a country like India, resources are scarce, while problems are abundant. An intelligent strategy is to optimize use of resources through efficiency in implementation. Mere announcement of policies, or so-called policies, achieves little. Even more than reformed policies, we need transformed execution. Let me illustrate. The National Food Security Act was passed in 2013 but remained without implementation in most states. In the Mahatma Gandhi National Rural Employment Guarantee Scheme, much of the expenditure was leaking out to touts, middlemen and the non-poor, though expenditure was recorded in the books.

We are now implementing the Food Security Act nationwide. We have drastically reduced leakages in the Employment Guarantee scheme and ensured that money reaches those for whom it is intended. We have focused on creating durable assets that benefit the population, rather than the touts. And instead of talking about the virtues of financial inclusion, we have actually completed the task and brought over 200 million people into the banking system.

Our record on implementation in general, and reduction in corruption in particular, is now well understood. So I will be brief. Coal, minerals and spectrum have been auctioned transparently raising large amounts. Managerial improvements have resulted in elimination of the power shortage, a record high in highway construction per day and record port through-put. We have launched a number of new programmes across various sectors. Many legacy issues have been solved. The number of stalled projects has declined. The long-closed Dabhol power plant is operational again thanks to our coordinated efforts, and is generating power, saving jobs and avoiding bad debts for the banks. Let me now turn to policy reforms. I have referred to the durable reduction in inflation since this Government took office. This is partly attributable to bold measures taken to strengthen monetary policy. Last year, we entered into a Monetary Framework Agreement with the Reserve Bank of India.

This year we have introduced in the Finance Bill, amendments to the Reserve Bank of India Act. Under these amendments, the RBI will have an inflation target and will set monetary policy through a Monetary Policy Committee. The committee will have no members from the Government. Through this reform, monetary policy will acquire an inflation focus and a level of institutional autonomy unprecedented in major emerging markets, and greater than several developed countries. Together with our adherence to the path of fiscal consolidation, this is a testimony to our strong commitment to macro-economic prudence and stability.

Another major policy reform is in the petroleum sector. Under the new Hydrocarbon Exploration Licensing Policy, there will be pricing and marketing freedom and a transparent revenue-sharing methodology. This will eliminate many layers of bureaucratic controls. For on-going projects which have not been developed, we have also given marketing and pricing freedom, subject to a transparent ceiling based on published import parity prices. For renewal of existing Production Sharing Contracts, we have introduced a transparent method involving a flat percentage increase in Government profit share. This removes discretion and uncertainty.

Parliament has passed the Real Estate Regulation Act which will go a long way in transforming the real estate market, protecting buyers and promoting honest and healthy practices. Along with the passing of this long pending bill, we have introduced tax incentives for developers and buyers of housing for the neo-middle class and the poor.

The UDAY scheme in the power sector has permanently changed the incentive structure for State Governments. Ambitious operational targets are backed by credible incentives to perform.

Under this scheme, in a phased manner, State Governments will have to take over losses of distribution companies and count them against their fiscal deficit targets. This imposes a hard budget constraint on the states. It creates a powerful incentive for states to manage the electricity sector efficiently. Already nine states accounting for over forty per cent of the total debt of distribution companies, have entered into Memoranda of Understanding with the Central Government. Another nine have agreed to do so.

You are probably aware of this government’s sweeping policy reforms in renewable energy. From an average of less than 1500 Megawatts of solar capacity addition per annum, we are moving up to 10,000 Megawatts per annum. When I announced a target of 175 Gigawatts of renewables, as a pillar of our climate change strategy, many were surprised and some were skeptical. Yet, this month the International Energy Agency has reported that a surge in renewables has already halted global growth in energy-related carbon emissions.

Parliament has recently passed a new law on inland waterways which will enable the rapid development of this efficient mode of transport. This will increase the number of navigable waterways from 5 to 106.

Foreign Direct Investment policy has been transformed by allowing investment in hitherto closed sectors like Railways and Defence, and enhancing investment limits in insurance and many other sectors. These reforms are already bearing fruit. Two new locomotive factories involving an investment of over 500 billion dollars are being built in Bihar, by GE and Alstom. In insurance, 9600 crore rupees, approximately 150 million dollars of FDI, in 12 companies, from leading global insurers has already been approved.

We have enhanced the limits for foreign investment in stock exchanges and allowed them to be listed. I am sure, you are aware, of the reforms we have undertaken to promote private equity venture capital, and an eco-system for start-ups. I note that this ‘new economy’ is the focus of your panel discussions.

Finally, let me turn to the major steps we have taken in the area of generating employment. This is one of my highest priorities. India is a capital scarce, labour abundant country. Yet, the corporate tax structure has favoured capital intensive production. Tax benefits like accelerated depreciation, and investment allowance have created an artificial bias against labour. Labour regulations have also tended to promote informal employment without social protection, rather than formal employment. We have taken two important steps to change this.

Firstly, if any firm subject to tax audit increases its work force, it will get a 30 per cent weighted tax deduction on the extra wage cost for three years. Earlier, such a benefit was available only to very few industrial employers and had so many restrictions that it was practically ineffective. It will now cover all sectors including services, for employees with a salary up to 25,000 rupees per month.

Secondly, the Government has taken the responsibility for paying pension contributions for three years for all new persons enrolling in the Employee Provident Fund. This will apply to those with wages up to 15,000 rupees per month. We expect lakhs of the unemployed, and the informally employed, to benefit from these steps.

In a reform to eliminate corruption in government recruitments, we have abolished interviews for lower and middle level positions. They will now be filled on the basis of transparent examination results.

You are aware that results of Government entrance examinations for engineering and medical colleges are being used by private colleges also. I am happy to announce one more measure to improve the labour market and benefit the unemployed. The Government and Public Sector Undertakings conduct a number of recruitment examinations. So far, the scores in these examinations have been retained by the Government. Hereafter, we will make available the results and the candidate information openly to all employers, wherever consent is given by the candidate. This will create a positive externality. It will provide a rich data base which can be used by private sector employers as a ready-made and objective sourcing and screening mechanism. It will reduce search costs in the labour market for both employers and employees. It will enable better matching of candidates from labour surplus areas with jobs in other regions.

You may be aware of the spectacular progress of the Pradhan Mantri Mudra Yojana. Over 31 million loans have been sanctioned to entrepreneurs for a total value of nearly 19 billion dollars this year. You will be pleased to know that 77 per cent of these entrepreneurs are women and 22 per cent of them are from the Scheduled Castes and Scheduled Tribes. Even if we assume conservatively that on average, each enterprise creates just one sustainable job, this initiative itself amounts to 31 million in new employment. The Stand-Up India scheme will also provide 250,000 entrepreneurship loans to women and Scheduled Castes and Scheduled Tribes.

My government’s measures on skill development are well known. In the Budget, we also announced two path-breaking reforms in the education sector, which I want to elaborate upon. Our aim is to empower higher educational institutions to help them attain the highest standards. To start with, we will provide an enabling regulatory architecture to ten public and ten private institutions, so that they emerge as world-class teaching and research institutions. Their regulatory framework will be separate from existing structures like the University Grants Commission and All India Council for Technical Education. They will have complete autonomy on academic, administrative and financial matters. We will provide additional resources for the next five years for the ten public universities. This will eventually allow ordinary Indians affordable access to world-class degree courses. This initiative is the beginning of a journey to restore the original mandate of higher education regulators.

They should be facilitators and guides, driven by norms of self-disclosure and transparency, instead of top-down command and control. Eventually, through regulatory reform, we aspire to world-class standards in all colleges and universities.

Another initiative is in school education. We have achieved much quantitative progress in access and pupil-teacher ratios. The foundation of today’s knowledge economy is the quality of its school leavers. We have now decided that the quality of learning outcomes will be the Government’s primary objective. Accordingly, we will allocate an increasing share of resources under the Sarva Shiksha Abhiyaan to quality. These funds will be used to promote local initiatives and innovations to improve learning outcomes. I am sure, all of you who are parents and all of you who are employers, will welcome these steps in higher and school education respectively.

In conclusion, Ladies and Gentlemen, we have initiated many steps. Many more lie ahead. Some have begun bearing fruit. What we have achieved so far, gives me the confidence that, with the support of the people, we can transform India.

I know it will be difficult.
But I am sure it is do-able.
And I am confident, it will be done.

Thank you.

Ref:http://www.narendramodi.in/category/speeches

Wednesday, 9 March 2016

PM Modi's reply on the Motion of Thanks on the President's Address in the Rajya Sabha

आदरणीय सभापति जी , आदरणीय सभी सांसद महोदय,

अभिभाषण पर विस्‍तार से चर्चा हुई। करीब 30 माननीय सदस्‍यों ने इस चर्चा में हिस्‍सा लेकर करके अपने अनुभव का अपने ज्ञान का, देश को लाभ पहुंचाया। श्री जगत प्रकाश नड्डा जी, श्री अरूण जेटली जी, श्री गुलाम नबी आजाद जी, डॉ. विजयलक्ष्‍मी जी, प्रमोद तिवारी जी, श्रीमती रजनी जी, श्रीमान देसाई, श्री शरद यादव जी, श्री गोपाल पटेल, सीताराम जी, डी राजा जी, के केशोराम जी, कई सारे नाम हैं, सभी महानुभावों ने सदन को, और देश को लाभान्वित किया है।

राष्‍ट्रपति जी के अभिभाषण में एक बात जो कही गई थी जिसका इतना सकारात्‍मक प्रभाव इतना तुरंत होगा ये बात हम सबको प्रसन्‍न करती है। राष्‍ट्रपति जी ने कहा था सदन चलना चाहिए, सदन में संवाद होना चाहिए और हम सभी सदस्‍यों ने राष्‍ट्रपति जी की बात को शिरोधार्य माना और सदन को सभी ने बहुत ही सुचारू रूप से सबने मिला करके चलाया और इसके लिए मैं विशेष रूप से विपक्ष के सभी बंधुओं का मैं आभार व्‍यक्‍त करना चाहूंगा कि उन्‍होंने इस काम को आगे बढ़ाया और राष्‍ट्रपति जी के अभिभाषण का ये जो असर है कि मैं समझता हूं कि अपने आप में गौरव देने वाला है। मैं राष्‍ट्रपति जी के अभिभाषण पर धन्‍यवाद करने के लिए खड़ा हुआ हूं, लेकिन सदन के साथ-साथ सदन के माननीय सदस्‍यों से भी इस बात से आग्रह करना चाहूंगा। एक तो खुशी की बात है कि सदन में सभी सदस्‍य सक्रिय हैं। अपने-अपने विचारों के लिए आग्रही हैं, करीब 300 के करीब Amendments आए हैं और हर Amendments का अपना महत्‍व भी है। लेकिन मैं सबसे आग्रह करूंगा कि हम राष्‍ट्रपति जी के wisdom पर भरोसा करते हुए समय की सीमा में जितने विषय आ सकें आ सके, इसका मतलब यह नहीं कि वो महत्‍व के नहीं हैं और इसलिए राष्‍ट्रपति पद की गरिमा और उनके wisdom पर भरोसा करते हुए मैं सभी आदरणीय सदस्‍यों से प्रार्थना करूंगा कि वे अपने संशोधन को वापस करके राष्‍ट्रपति जी के अभिभाषण को सर्वसम्‍मति से धन्‍यवाद प्रस्‍ताव हम पारित करें जो कि अच्‍छी परंपरा जारी रहे। हम सबने देखा होगा कि कल रात के बारह बजे तक लोकसभा का सत्र चला।

दो दिन पूर्व यह सदन भी देर शाम तक बैठा था। आम तौर पर इतने घंटे काम करने के बाद थकान महसूस होती है, लेकिन मैं उल्‍टा अनुभव कर रहा था, जिन –जिन सदस्‍यों से मेरा मिलना हुआ बात करने का मौका मिला देर रात बैठने के बाद भी वे अत्‍यन्‍त प्रसन्‍न थे, अत्‍यंत संतुष्‍ट थे, अत्‍युन्‍त आनंदित थे क्‍योंकि एक लंबे अर्से के बाद अपने पास जो कुछ कहने की बातें थी, अपने क्षेत्र की बातें थी, समस्‍याएं थी उसको इस पवित्र Forum में वो जी भर के कह पाए।

ये अवसर उनको मिला है उनके चेहरे की जो प्रसन्‍नता है, ये सदन चलने के कारण संभव हुआ है| वरना पिछली बार सदन में जैसे Question hour मैं मानता हूं कि Question hour अपने आप में एक सदस्‍यों का अपनी संपत्ति है और राष्‍ट्र के महत्‍वपूर्ण Issues पर सरकार को कठघरे में खड़ा रखना, executives को अकाउंटेबल बनाना, उनके लिए सवालिया निशान खडा़ करना।

मंत्रियों को भी हर प्रकार से सजग रखने के लिए भी सबसे बड़ी ताकतवर जगह है तो वो Question hour है। लेकिन हमने देखा कि पिछली बार सदन न चलने के कारण स्‍टार Question 269 थे, लेकिन सात को अवसर मिला और करीब 42 घंटे हमारा इस हल्‍ला बोल के अन्‍दर आहुत हो गया। उसके पूर्व के सत्र में करीब 270 इन्‍हीं सदस्‍यों के द्वारा पूछे गये स्‍टार Question थे, सिर्फ छह चर्चा में आए। करीब-करीब हमारे 72 घंटे इस माहौल के अन्‍दर आहुत हो गये।

इस बार हमारे wisdom में हमारे अनुभव ने, हमारी जिम्‍मवारियों ने, हमें बचा लिया और मान्‍य सदस्‍यों के सवालों के जवाब देने के लिए मंत्रियों को देर रात तक तैयारियां करनी पड़ रही हैं। executives को हिसाब देने के लिए सजग रहना पड़ा रहा है और यही लोकतंत्र की ताकत है और इस ताकत को मैं समझता हूं कि हम जितना तवज्‍जो दें उतना कम है। एक बात जरूर है मृत्‍यु को एक वरदान है और मृत्‍यु को ऐसा वरदान है मृत्‍यु कभी बदनाम नहीं होता। कभी मृत्‍यु पर आरोप नहीं लगते। कोई मरे तो ये कैंसर से मरा है, आरोप कैंसर पर जाता है। कोई मरे तो ये अकस्‍मात मरा है तो अकस्‍मात पर आरोप जाता है मृत्‍यु पर नहीं जाता है। बड़ी आयु में मरे तो वे उम्र के कारण मरे हैं, मृत्‍यु को कभी दोष नहीं आता। मृत्‍यु कभी बदनाम नहीं होती।

कभी-कभी ऐसा लगता है कि कांग्रेस को ऐसा वरदान है... वरदान इस अर्थ में है कि अगर हम कांग्रेस की आलोचना करें तो आपने मीडिया में देखा होगा कि विपक्ष पर हमला, विपक्ष पर आरोप, कभी ये नहीं आता है कि कांग्रेस पर हमला, कांग्रेस पर आरोप| हम अगर शरद जी के खिलाफ कुछ कहें, मायावती जी के खिलाफ कुछ कहें तो अखबार में आएगा, टीवी में आएगा कि बीएसपी पर हमला, जेडीयू पर हमला, शरद जी पर हमला, मायावती जी पर हमला लेकिन कांग्रेस एक ऐसी है जब भी हमला हो तो विपक्ष पर हमला। कभी कांग्रेस को बदनामी नहीं मिलती और ये अपने आप में बड़ा गजब का विज्ञान है। अब वो तो यही है हमारे सारे साथी सोचेंगे कि ऐसा कैसे हो सकता है।

यहां पर हमारे विपक्ष नेता ने चर्चा प्रारंभ की थी तब मैं यहां पर उपस्थित था। हमारे नड्डा जी ने Sea change कहा, तो हमारे गुलाम नबी जी ने थोड़ा माहौल हल्‍का करने का इरादा होगा उनका तो इरादा गलत नहीं होता। लेकिन चेन्‍नई का उदाहरण दे दिया। वो एक संकट था। मानवीय दृष्टि से वो दर्दनाक घटना थी उसको इस Sea change से जोड़ करके मजाक करने से उनकी पीड़ा में हम थोड़ा मैं समझता हूं कि अच्‍छा नहीं किया।

यहां एक विषय ये भी आया कि राजस्‍थान और हरियाणा में, जो उन्‍होंने चुनाव में कुछ नियम बनाएं हैं जिसको सुप्रीम कोर्ट ने मान्‍यता दी। लेकिन हमारी democracy में qualitative चेंज लाने का जो प्रयास है उसको कुछ राजनीतिक रंग लाने का प्रयास चल रहा है। मतभेद हो सकता है, लेकिन मैं चाहूंगा कि जो लोग इतने बड़ी प्रखरता के साथ कहते हैं जो अशिक्षित रहे उनका क्‍या।

मैं खास करके गुलाम नबी साहब से और उनके साथियों में आग्रह करूंगा कि जो पांच राज्‍यों में चुनाव होने वाले हैं कम से कम 30 % लोगों को अनपढ़ लेागों को टिकट दें, बिलकुल अनपढ़ तो वो जो कह रहे हैं तो उसमें उनका क्‍या commitment है पता तो चलेगा। अनपढ़ की इतनी चिंता है होनी भी चाहिए। लेकिन मैं एक अनुभव शेयर करता हूं। मैं गुजरात में जब था तो हर वर्ष, हर वर्ष जून महीने में 13, 14, 15 जून कन्‍या शिक्षा को ले करके बेटियों को पढ़ाने के लिए ग्रुजरात में एक कैम्‍पेन चलाता था, campaign चलाता था और गुजरात में मई जून में 40-45 तापमान रहता है। पूरी सरकार गांव जाती थी मैं खुद जाता था। तीन-तीन दिन में गांव में रहता था और बेटियों को पढ़ाओ इसके लिए campaign चलाता था। स्‍कूल 15 जून से शुरू होते थे तो उसके पहले एडमिशन्स के लिए लगते थे। वहां मैं मातृ सम्‍मेलन भी करता था। एक गांव में मैं गया । मैंने ऐसे ही पूछा कि आप बता ही दें कि आप में से अनपढ़ कितने हैं। तो कोई 40 साल 45 साल और 50 साल की महिलाओं ने हाथ ऊपर किया कि हम पढ़े लिखे नहीं हैं। लेकिन पांच छह महिलाएं ऐसी थी जिनकी उम्र 80-85 थी। मैंने पूछा आप पढ़े लिखे हैं, तो बोले ये हमारी बहु अनपढ़ है हम पढ़े लिखे हैं। कैसे तो बोले हम जो हैं गायकवाड स्‍टेट के नागरिक हैं, आजादी के पहले की बात है और गायकवाड स्‍टेट में ये नियम था कि अगर बेटी को नहीं पढ़ाते हैं तो एक रूपये दंड होता था और बोले इसके कारण हम पढ़े लिखे हैं। लेकिन बाद में स्‍वतंत्रता आई सरकारें बदल गईं तो बहू हमारी अनपढ़ है। तो ये जो अनपढ़ का कारण है वो आजादी के बाद जो हमारी कमियां रहीं है उससे और इसलिए हमने चिंता शिक्षा की करने की जरूरत है ताकि ये जो कठिनाई है उस कठिनाइयों से हम बाहर आ सकते हैं।

राष्‍ट्रपति जी ने कहा है कि पहले आकाशवाणी में आकाशवाणी रेडियो पर एक कार्यक्रम चलता था और गुजराती में जो शब्‍द था मुझे मालूम नहीं है कि हिन्‍दी में वो ही शब्‍द है क्‍या। बिसराते सुर यानी जो भूले बिरसे गीत हैं उनका कार्यक्रम आखिरी आखिरी तो अब कुछ लोगों का ये tenure पूरा हो रहा है तो स्‍वाभाविक है कि आखिर आखिर में कुछ कहें। तो ये भूले बिसरे सुर आखिर में सुनाई तो देने चाहिए।

सभापति जी, एक प्रकार से upper house है हमारे यहां कहा जाता है - महाजन ये न जतापन था। जहां महापुरूष चलते हैं लोग उसके पीछे चलते हैं। इस सदन में महाजन बैठे हैं। इस सदन से जो होगा जिस प्रकार से होगा उसका असर लोकसभा में होगा। उसका असर assembly होगा। कहीं कहीं कॉरपोरेशन सिटी में भी हो रहा है और इसलिए हम ऐसा कैसा करें ताकि नीचे तक वो माहौल बने जो लोकतंत्र को पुष्‍ट करे।

देश हमारे कई बिल पारित हो, इसका इंतजार कर रहा है। जीएसटी की चर्चा हो रही है बाकी बिल की चर्चा मैं नहीं कर रहा हूं। बहुत बड़ी मात्रा में अब जो जनप्रतिनिधि चुन करके आए हैं उन्‍होंने तो इसको स्‍वीकार कर लिया है। लेकिन राज्‍यों के जो प्रतिनिधि हैं वहां। अब ये जगह ऐसी है जो अपर हाऊस हमारा, एक chamber of ideas है। यहां देश को मार्गदर्शन मिलेगा, दिशा मिलेगी और इसलिए दोनों सदनों के बीच तालमेल होना बहुत जरूरी है। दोनों सदन वस्‍तुत: उसी structure के भाग हैं और सहयोग एंव सामंजस्‍य की भावना की किसी भी कमी से कठिनाइयां बढ़ेगी और हमारे संविधान के उचित रूप से कार्य करने में बाधा खड़ी होगी। ये चिंता पं0 जवाहर लाल नेहरू जी ने जताई थी। मैं आशा करता हूं कि हम पंडित जी की इस चिंता को महत्‍व दें और हम कोशिश करें कि हमारे यहां यह जो सारे पेंडिंग बिल हैं, इस बार सदन चल रहा है। एक अच्‍छे माहौल में चल रहा है। तो हम चीजों को अगर पारित करें तो देश को गति देने में, ये महाजनों का ग्रो है, वरिष्‍ठ का गृह है। वो बहुत बढ़ा role play कर सकता है। इसलिए मैं आग्रहपूर्वक प्रार्थना करता हूं, सभी मान्‍य सदस्‍यों से जो लोकसभा में जो बिल पारित हुए हैं। उनको हो सके उतना जल्‍दी पारित करके हम देश को गति देने में भूमिका अदा करें।
इस सरकार में राष्‍ट्रपति के अभिभाषण में कुछ बातें आई हैं। ये तो सही है कि देश आजाद हुआ है, सरकारें बनी हैं। लंबे अरसे तक सत्‍ता भोगने का अवसर मिला है, सत्‍ता में रहने का अवसर मिला है। कुछ काम करने का अवसर मिला है और कुछ समय पहले से थोड़ा-थोड़ा बदलाव भी शुरू हुआ है, धीरे-धीरे। इस समय हम लोगों को मौका मिला है और ऐसा तो नहीं है कि कोई काम करना नहीं चाहता, हर कोई करना चाहता है। लेकिन कभी-कभार सवाल यह होता है कि हम इतना बड़ा देश है, इसकी आवश्‍यकताओं की पूर्ति हो, होती है, चलती है, इस प्रकार से करेंगे, तो हम बहुत पीछे चले जाएंगे। हमें incremental improvement से हटकर के एक quantum jump की ओर जाना बहुत जरूरी है और इसलिए शक्‍ति भी जरा ज्‍यादा लगानी पड़ती है और शक्‍ति जोड़नी भी पड़ती है। तो उसकी दिशा में हम प्रयास कर रहे हैं।

हमने एक बल दिया है good governance पर, और जब मैं good governance की बात करता हूं, सुशासन की बात करता हूं तो उसकी पहली शर्त होती है transparency. हम यह भली-भांति जानते हैं कि इसके पूर्व, हमारे आने से पहले देश और दुनिया में, सही और गलत, इसका अपवाद हो सकता है। लेकिन यह माहौल बना हुआ था, विश्‍वास टूट चुका था। आशंका के दायरे में हम दबे हुए थे और सब ओर भ्रष्‍टाचार, भाई-भतीजावाद, इन चीजों ने हिन्‍दुस्‍तान के मन को झटक दिया था। दुनिया में भी इसके कारण भारत की छवि को गहरा नुकसान हुआ था। देश में विश्वास पैदा करने के लिए आवश्‍यक है और लोगों की जिम्‍मेवारी भी है कि transparency, policy driven government , individual के beam पर सरकारें नहीं चल सकती। सरकार नीतियों के आधार पर चलनी चाहिए, इस पर हमारा बल रहा है।

पिछले दिनों चाहे कोयले की चर्चा हो, स्‍पेक्‍ट्रम की चर्चा हो, न-जाने क्‍या-क्‍या बातें उठी, अब तो मामले सारे कोर्ट में भी पड़े हुए हैं। लेकिन हमने transparency पर बल दिया है। उसका परिणाम यह है – कोयला auction में हम गए 3.33 लाख करोड़, स्‍पेक्‍ट्रम में गए 1 लाख करोड़, हम एफएम रेडियो में गए। अभी-अभी चल रहा है। शायद आप लोगों को ज्ञान होगा 6 अन्‍य minerals का और अभी-अभी auction में जो 18 हजार करोड़ रुपया cross कर गया। ये एक कोशिश हमारी कि transparency और मैंने उसके लिए उदाहरण नहीं लिए।
अभी-अभी Forbes magazine, उसने एक बात कही है। हमने जो auction की परंपरा शुरू की है, उसके विषय में Forbes magazine कहता है – “India has just conducted its first auction of a Gold mine. This is exactly the right way to allocate the exploration and exploitation rise of such a natural resources. This is another one of those steps along the road to India coming the much wealthier country it should be”.
अब वो जो Gold mine कहते हैं, उनकी पश्‍चिम की दुनिया में इनके लिए, कोयला वगैरह सबको वो Gold mine के रूप में माना जाता है। उस अर्थ में वो Gold mine लिखा है। हमारे यहां कोई सोना की खदान ही नहीं दी गई है। Forbes magazine ने आगे एक जगह पर अच्‍छी बात कही है, हमने जो प्रयास किया है उस पर उन्‍होंने कहा है। एक ही वाक्‍य मैं अलग से पढ़ना चाहूंगा, This is the way this matter should be handled . मैं समझता हूं इसमें काफी कुछ आ जाता है।

दूसरा पहलू है good governance का accountability. हमें यह मानकर चले कि कुल मिलाकर के जो deterioration आया है उसमें हम खबरों की speed से चलते चले जा रहे हैं, पीछे की चीजें छूटती चली जा रही हैं। खबरें आती हैं जाती हैं, घटनाएं आती हैं जाती हैं, accountability का विषय छूट जाता है। हमने कोशिश की है कि accountability पर बल दिया जाए। मैं लगातार इन दिनों Infrastructure के review कर रहा हूं। इस सदन के सभी माननीय सदस्‍यों को आश्‍चर्य होगा 10-10, 20-20 साल से हमारे बड़े-बड़े प्रोजेक्‍ट लटके पड़े हुए हैं। या तो environment वालों ने रोक दिया होगा, कोर्ट-कचहरी ने रोक दिया होगा, या स्‍थानीय कोई body होगी छोटी, नगरपालिका वो रोककर के बैठ गई होगी। रुका हुआ है, क्‍यों रुका हुआ है, कोई देखता नहीं, पूछता नहीं, इसी कारण, कभी financial कारण भी रहे होंगे लेकिन 10-10, 20-20 साल से रुके हुए प्रोजेक्‍ट। मैंने पिछले दिनों करीब 300 प्रोजेक्‍ट का खुद review किया और उसकी worth है करीब 15 लाख करोड़ रुपया। मैं इस सदन को नम्रतापूर्वक कहता हूं कि वो सारे छोटे-छोटे संकटों में फंसे हुए, ये 15-15, 20 साल पुराने stalled projects आज चालू हो गए है, गति बढ़ रही है।

Good governance का तीसरा पहलू होता है – decentralization. इतना बड़ा देश हम centralized mechanism से नहीं चला सकते। जितनी बड़ी मात्रा में decentralize करेंगे और इसलिए सरकार ने नीतिगत रूप से decentralize करने की दिशा में नीतिगत कदम उठाए हैं जैसे environment. हम environment की हर permission को दिल्‍ली ले आए। एक दफ्तर में ले गए, एक व्‍यक्‍ति के पास ले गए और क्‍या परिणाम आया हम जानते हैं, क्‍या-क्‍या बातें सुनी गई, क्‍या-क्‍या बातें कही गई, किस पर क्‍या-क्‍या लगा सब मालूम हैं। हमने 10 regional offices को strengthen किया ताकि उनको वहां की समस्‍या की समझ है, वो जानते हैं इस चीजों को, उसको हमने किया। कुछ चीजें सरकार की, मैं तो हैरान हूं, एक गांव के बीच में से रेल जा रही है। इधर से पानी उस तरफ ले जाना है तो पाइपलाइन डालने में, पचासों permissions में वो अटकें पड़े हुए थे और बिना पानी को एक इलाका तरसता था। bridge बन गया है, दोनों तरफ road बनाना है, अटका पड़ा है। कभी दोनों तरफ road बन गए है, रेल वाले ऊपर bridge डालने के लिए permission नहीं दे रहे हैं, ऐसी छोटी-छोटी चीजें। हमने रेल, road, पाइपलाइन, बिजली transmission, इसके लिए केन्‍द्र के पास आना ही जरूरी नहीं है, सरकार ने व्‍यवस्‍था कर दी, वहीं पर हो जाएगा। इतना ही नहीं, हमने राज्‍यों के environment clearance के rights बढ़ा दिए, राज्‍यों को अधिकार ज्‍यादा दे दिए ताकि वो भी, हम जितने जिम्‍मेवार है, उतने भी राज्‍य के लोग जिम्‍मेवार है और वो कोई देश को बर्बाद करना नहीं चाहते।

अब जैसे sand. आज हमारे यहां नदी में बालू, housing constructions में से कितनी। हर नदी दिल्‍ली तक इंतजार करती है कि permission मिले। हमने इसको राज्‍य नहीं district level पर दे दिया, district authority उस पर निर्णय करेगा और वो तय करेगी। Online प्रक्रियाओं को लोग देख सकते हैं। पहले रेलवे के टेंडर की सारी प्रक्रिया यहां होती थी। आज हमने उसको zonal general manager के under में डाल दिया, टेंडर प्रक्रिया वही से चल रही है, गति से चल रही है। पहले एक 300 करोड़-500 करोड़ के प्रोजेक्‍ट भी cabinet approval के लिए आते थे, इंतजार करना पड़ता था। हमने तय कर दिया कि वो ministry करेगी। एक हजार करोड़ से ऊपर होगा तभी cabinet में लाना है। decentralization के द्वारा इसको आगे बढ़ाने का प्रयास किया।

Good governance की एक महत्‍वपूर्ण बात होती है effective delivery. अब जन-धन account की यहां चर्चा हो रही है। हमारे माननीय विपक्ष नेता जी ने भोपाल के अच्‍छे उदाहरण दिए। बहुत आभारी हूं मैं कि एक जो विपक्ष ने करना चाहिए वैसा सटीक काम उन्‍होंने किया है। भोपाल जिले में किस गांव में कौन ‘जन-धन’ account से रह गया है और उसका recording तक करके ले आए। होना यही चाहिए तभी executive accountable बनेगी और ये सदन के सदस्‍यों का यही काम होता है। यह मुद्दा मेरी सरकार, तेरी सरकार नहीं होता है और मैं मानता हूं कि एक सही दिशा का यह प्रयास है। उसमें तथ्‍य क्‍या है, वो तो कल अरुण जी ने कह दिया। मैं तथ्‍य पर चर्चा नहीं करूंगा, मैं इस प्रयास को अच्‍छा मानता हूं। क्‍योंकि कभी-कभार नीचे से, व्‍यवस्‍था से खबर आएगी और मान लेते हैं, लेकिन विपक्ष सजग रहा, देखा और कितनी मेहनत की है। सत्‍ता में इतनी मेहनत की होती तो ‘जन-धन’ account का काम मुझे करना ही नहीं पड़ता। बाल की खाल उधेड़ी। लेकिन फिर भी अच्‍छा किया। साहब आपने microscope लेकर के देखा। मोदी कह रहा है जन-धन होगा, देखो यार कहीं तो होगा कोई कोने में। बहुत microscope लेकर के निकले लेकिन साहब आप इतने साल microscope लेकर के नहीं, अगर binocular से भी देखकर के काम किया होता तो आज यह मेहनत करने का मेरे जिम्‍मे नहीं आता। आज microscope लेकर के घूम रहे हो, अच्‍छा होता जब सत्‍ता में थे binocular से भी देखकर के काम को निपटाने का प्रयास किया होता। मेरे कहने का तात्‍पर्य यही है कि हम effective delivery पर बल दें वरना कभी जो last mile delivery, हमारे यहां जो लोग सरकार में रहे उनको मालूम है। हमें उसमें जितना ही हम पुरुषार्थ करे, हमें करना चाहिए।

हमारे सीताराम जी ने एक विषय छोड़ा था। उन्‍होंने कहा था कि ये targeted subsidy के नाम पर आप subsidy कम कर रहे हैं। वैसे वो उनके nature का विषय नहीं है लेकिन क्‍यों बोल दिए मुझे समझ में नहीं आता है। लेकिन हो सकता है politics में कुछ चीजें करनी भी पड़ती हैं। मैं एक उदाहरण देना चाहता हूं चंडीगढ़ शहर का। चंडीगढ़ शहर में ज्‍यादातर घरों में बिजली है, ज्‍यादातर घरों में गैस कनेक्‍शन है। उसके बावजूद भी चंडीगढ़ में 30 लाख लीटर केरोसिन जाता था। जबकि उनका कोई उपयोग उनको नहीं था। कुछ परिवार थे जिनके पास गैस नहीं था, शायद उनको उपयोग होगा। 30 लाख लीटर केरोसिन। हमने सोचा कि भई जरा हम JAM योजना को लागू करे। सर्वे किया, आधार का उपयोग किया, गैस कनेक्‍शन का डाटा इकट्ठा किया। कुछ परिवार रह गए हैं जिनके पास गैस कनेक्‍शन नहीं है। हमने एक अभियान चलाया है। आने वाले कुछ दिनों में शायद पूरा हो जाएगा। लेकिन इसका परिणाम यह हुआ कि 30 लाख लीटर केरोसिन जो कि जाता था और धन्‍ना सेठों के द्वारा बाजार में चला जाता था, पूंजीपतियों के पास चला जाता था। ये पूंजीपति लोग उसका black marketing करते थे, डीजल में mix करते थे, environment को बर्बाद करते थे, ये targeted subsidy का परिणाम यह है कि यह जो धन्‍ना सेठ या पूंजीपति लोगों के हाथ में 30 लाख लीटर केरोसिन जाता था बहुत तो बंद हो गया, बाकी भी अब बंद हो जाएगा और इसके कारण देश की करोड़ों रुपयों की subsidy बचेगी।

तीसरा, देश को import करने में भी राहत मिल जाएगी। कहने का हमारा तात्‍पर्य यह है कि हम जब technology के माध्‍यम से इस काम को जो हम कर रहे हैं, इस काम के संबंध में subsidy सही व्‍यक्‍ति को मिले, नियम में जितनी मिलनी चाहिए उतनी मिले, समय पर मिले, उस दिशा में हमारा एक प्रयास है। यह रुपए बचाने का खेल नहीं है। एक व्‍यवस्‍था में transparency लाना नहीं, leakages बंद करने की, दलालों को निकालने का एक उत्‍तम प्रकार का प्रयास है। उसमें भी कुछ कमियां है तो ठीक करनी है और आप लोगों का उसमें सहयोग मिलेगा, कहीं से कोई जानकार मिलेगी तो ठीक करने में सुविधा बढ़ेगी। तो मैं आश्वस्त कर देता हूं सबको कि ऐसी कोई बात ध्‍यान में आए तो जरूर सरकार के ध्‍यान में लाइए ताकि हम इसको कर पाए।

एक विषय है, माननीय हमारे गुलाब नबी साहब ने विषय निकाला – skill development का। आपने कहा कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जी ने इसको शुरू किया था, वगैरह-वगैरह। वैसे हमारे देश में skill परंपरागत है लेकिन हर सरकार ने किसी न किसी रूप में प्रयास किया है। अब बात कहा जाकर के अटकती है। अब जैसे मान लीजिए आज हम गंगा सफाई करते हैं तो स्‍वाभाविक से आपसे आवाज उठेगी, ये तो हमने शुरू किया था। सही बात है। श्रीमान राजीव गांधी जी ने उस पर बल दिया, शुरू किया।

अब सवाल यह उठता है कि शुरू किया, उसका credit लेने के उत्‍साह में यह भी तो जवाब देना पड़ेगा कि 30 साल के बाद भी गंदी क्‍यों हैं, अगर शुरू किया था तो 30 साल के बाद गंगा गंदी क्‍यों हैं, क्‍या कमी रह गई? और इसलिए हर बार, ये तो हमारे समय हुआ था, ये उत्‍साह का अपना एक महत्‍व है। श्रेय लेने का प्रयास करने में कुछ बुरा है, ऐसा नहीं है, ये तो आपको मन करेगा। देखिए दुनिया में दो तरह के व्‍यक्‍ति होते हैं - एक वो जो कार्य करते है और दूसरे वे जो उसका श्रेय लेते है। आप इनमें से पहली तरह का व्‍यक्‍ति बनने का प्रयास करें क्‍योंकि इसमें competition बहुत कम है। यह बात श्रीमती इंदिरा जी ने कही थी। अब skill development. देखिए साहब 2008 में, मैं मानता हूं skill development पिछली सरकार में जो चला। उसमें एक skill की mastery आ गई और mastery थी कमेटियां बनाने और कमेटियां बिखरने की। उसमें mastery आ गई, skill development वो हुआ।

2008 में PM’s national council, National skill Development Coordination Board, National Skill Development Corporation फिर 2009 में National Policy on Skill Development, कमेटियां पर कमेटियां, कमेटियां पर कमेटियां और मीटिंगे नहीं होती थी। एक कमेटी की तो मीटिंग शायद ढाई-तीन साल के बाद अचानक एक कर ली गई थी लेकिन वो भी इसलिए कर ली गई थी कि अगली मीटिंग कब करेंगे। आखिरकार, इतनी सारी कमेटियों के बाद 2013 में यह तय कर दिया कि National Skill Development Agency बनाई जाए और बाकी सब दुकानें बंद कर दी जाए। साहब ये skill development का हाल था। Skill Development के विषय में आप अज्ञान नहीं थे, आपको ज्ञान था कि एक जरूरी है, देश में इतनी बड़ी संख्‍या में नौजवान है करना चाहिए। लेकिन कभी-कभार तो महाभारत याद आता है ज्ञानम न धर्मम नचे बिन प्रभुति। ज्ञान तो बहुत था लेकिन करना प्रवृत्‍ति नहीं थी। अब कौन-क्‍या ये मैं ज्‍यादा चर्चा नहीं करता।

वर्तमान सरकार के कार्यकाल में 2014 में हमने skill development एक अलग ministry बनाई। skill development scheme के लिए common norms तय किए। skill initiatives, consistent quality हासिल करने पर बल दिया गया। NSDC के तहत हमने डेढ़ साल में ढाई गुना उसमें बढ़ोतरी की। Industrial training institutions (ITI) हमने डेढ़ साल के भीतर-भीतर 20% उसमें इजाफा किया। पिछले दो वर्ष में क्षमता 15 लाख 23 हजार सीटों से बढ़कर के 18 lakh 65 thousand कर दी गई, 20% हमने बढ़ोतरी की। 1 लाख 70 हजार प्रतिवर्ष जो तय होते थे उसमें हमने 53 thousand और जोड़ दिए। 10th और 12th उसमें vocational education करीब बारह सौ तेरह सौ स्‍कूल में चलता था। आज हमने उसको एकदम से quantum jump लगाकर के तीन हजार पहुंचा दिया। डेढ़ लाख अतिरिक्‍त छात्रों का लाभ उसके लिए हुआ। International mobility , एक बात मानकर के चलें कि 2030 वो समय आएगा, जब दुनिया की नज़र हिन्‍दुस्‍तान के workforce पर रहने वाली है।
हमने अभी से global standard का workforce तैयार करने की दिशा में हमें काम करना चाहिए। International mobility पर हमें बल देना चाहिए और उसके लिए ऑस्‍ट्रेलिया और UK के जो standards है उसको match होते हुए, कामों को हमने शुरू किया है और भी requirements के अनुसार उस standard को लेने की दिशा में हम काम करना चाहते हैं।

Apprenticeship, किसी न किसी कारण से हमने apprenticeship को एक ऐसी अवस्‍था बना दी कि सब उद्योगकार, व्‍यापारी दरवाजे बंद करके बैठ गए, किसी को घुसने ही नहीं देते और किसी को भी नौकरी चाहिए तो लोग पूछते है experience है क्‍या? Experience लेने जाता है तो दरवाजा बंद है। जब तक हम apprenticeship को बल नहीं देते, हमारे नौजवानों को experience नहीं मिलेगा। experience नहीं मिलेगा तो उनके लिए job opportunity नहीं होगी और उसको ध्‍यान में रखते हुए हमने apprenticeship के trainee जो पहले 3 लाख 12 हजार थे। सवा साल के भीतर-भीतर 2 लाख 70 हजार और उसमें जोड़ दिए, हमने वो व्‍यवस्‍था की है।

पहले हमारे यहां target होता था - कितने बच्‍चों को तैयार किया। उसी को पूरा करने की दिशा में प्रयास था। हमने market में requirement क्‍या है, किस प्रकार के syllabus की जरूरत है, किस प्रकार की training की जरूरत है, उसका सर्वे किया और according to that हमने skill develop किया ताकि job के साथ उसको connect किया जाए और उसको उसका काम मिल जाए और उस दिशा में हमने प्रयास किया है। अब मैं देख रहा हूं कि पिछले दिनों हमारे देश में manufacturing को बल तो देना ही होगा। हम सब जानते हैं कि कोई भी सरकार हो, भाषण के लिए हम कुछ भी कहे लेकिन देना पड़ेगा। इसके कारण हमने FDI पर बल दिया, FDI में बढ़ोतरी हुई, 48% करीब। हमने 2015 में electronic manufacturing में छह गुना बढ़ोतरी हुई है। 2015 में software export सबसे ज्‍यादा हुआ है। हमारे major Ports 2015 में सबसे ज्‍यादा handling हुआ है। 2015 में सबसे ज्‍यादा कार उत्‍पादन हुआ है। 50 नई मोबाइल कंपनियां manufacturing के लिए आई है। यह सारी बातें skill और रोजगार के साथ जुड़ने वाली है और skill और रोजगार की दिशा में ये काम करने वाले हमारे प्रयास है और उसका परिणाम यह होगा कि हमारे देश में रोजगार की संभावनाएं बढेंगी।

Ease of doing business में 12 rank हम quantum jump लगाया है। हम ऊपर गए है। World Economic Forum में Global competitive index में हम 16 स्‍थान ऊपर गए है। Moodys ने जो up gradation दिया हमारे लिए, positive दिया है, जो global environment में भारत की साख को बढ़ाता है, भारत की ताकत की पहचान कराता है। Employment की चर्चा skill development में हो, manufacturing sector में बढ़ावा हो, एक रोजगार के लिए मानदंड के रूप में एक institute को हमने मान्‍यता मिली हुई। Monster Employment Index, ये online recruitment के आधार पर analysis करता है। January 2016 में index 229 था। यह index 2014 में सिर्फ 150 था और आज आप देख सकते हैं 150 से बढ़कर के 229 index को हम प्राप्‍त कर गए है। हमने रोजगारी को बढ़ावा देने के लिए जो micro and small industry है उसको हमने Tax के अंदर सुविधाएं दी हैं। Start Up को बल दिया है। तीन साल के लिए टैक्‍स में हमने रियायत दी है ताकि नौजवानों को Start Up के लिए मौका मिले। मुद्रा बैंक के द्वारा करोड़ों-करोड़ों लोगों को हमने धन दिया है, जो पुराने थे उन्होंने expansion किया है। expansion के कारण उसको एक-दो लोगों को और रोजगार देने का उसको अवसर मिला है और इसमें भी ज्‍यादा SC, ST और women हैं | मुद्रा के लाभार्थी सबसे ज्‍यादा SC, ST, OBC and women है। नए उद्योग जो लगेंगे ही, उसके लिए हमने टैक्‍स को 25% पर रख दिया है और कोई benefit अगर लेना चाहता नहीं है तो ये benefit मिलेगा।

एक महत्‍वपूर्ण निर्णय इस बजट में आपने सुना होगा। हम जो पूंजीपतियों की चर्चा करते हैं। जो लोग first UPA में सरकार का समर्थन करते थे और वो जो पूंजीपतियों का विरोध कर करके गाड़ी चलाते रहते हैं। आप देखिए हमारे देश में बड़े-बड़े मॉल हो, वो तो सात दिन चल सकते हैं, लेकिन गांव के अंदर एक छोटा दुकानदार हो, वो सात दिन खुली नहीं रख सकता है। हमने बजट में इस बार घोषित किया है कि छोटे दुकानदार भी सात दिन चला सते हैं, देर रात चला सकते हैं। इसका परिणाम यह आने वाला है कि हर छोटा दुकानदार भी एक न एक काम करने वाले को रखेगा, एक-एक दुकान पर एक नए व्‍यक्‍ति के रोजगार की संभावना होने वाली है। उस दिशा में महत्‍वपूर्ण काम मैं समझता हूं आने वाले दिनों में रोजगार की दिशा में होने वाला है।
चेयरमैन श्री, मैं अब थोड़ी किसानों के संबंध में बात करना चाहता हूं। जब हमने कहा कि क्‍यों न देश जिसमें किसान हो, progressive किसान हो, राज्‍य सरकारें हो, केन्‍द्र सरकारें हो, हम सब मिलकर के, हमने बहुत जिम्‍मेदारी के साथ इन शब्‍दों का प्रयोग किया हुआ है। सब मिलकर के ये लक्ष्‍य क्‍यों तय करे कि 2022 में किसान की income double हो और मैं हमारे मनमोहन सिंह जैसा तो अर्थशास्‍त्री नहीं हूं लेकिन जिस अवस्‍था में से पला-बढ़ा हूं तो गरीब किसानों को नजदीक से देखा है और इसलिए मुझे वो बढ़ा ज्ञान तो नहीं है लेकिन छोटी-सी चीजों का पता है। अगर हम सही दिशा में प्रयास करे तो परिणाम आएगा। मैं एक हमारे देश में इस विषय के जानकार है, श्रीमान एम. एस. स्वामीनाथन, उनका एक latest article का quote मैं कहना चाहता हूं “seeds have been sown for agricultural transformation and for attracting and retaining youth in farming. The dawn of a new era in farming is in sight.”

अब किसान की आय दोगुना हो सकती है कि नहीं हो सकती है। किसान मतलब, अगर जो हम soil health card के काम को लेकर के चले है, उसको हम सफलता से लागू करे और किसान soil health card के advices के अुनसार अपनी जमीन का उपयोग करना शुरू करे। productivity बढ़ सकती है, input cost कम हो सकती है। आज किसान की मुसीबत यह है कि पड़ोसी ने अगर लाल डिब्‍बे वाली दवाई डाल दी तो उसको भी लगता है कि मैं लाल डिब्‍बे वाली दवाई डाल दूं । पड़ोसी ने अगर पीले डिब्‍बे वाली डाल दवाई दी तो वो भी पीले डब्‍बे वाली दवाई डाल देता है। पड़ोसी ने इतने kg यूरिया डाल दिया तो वो भी। उसकी जमीन उसके लिए योग्‍य है कि नहीं है।

अगर हम कोशिश करें। हमारी agriculture universities, agriculture graduates ये सारे लोग इसमें लगे और soil testing का जो काम चला है, उसको अगर खेती के साथ सीधा-सीधा जोड़कर के हम आगे बढ़े परिणाम ला सकते हैं। दूसरी बात, हमारे यहां हम timber import करते हैं। अगर हम हमारे किसानों को जहां उसकी जमीन की सीमा समाप्‍त होती है वहां वो एक-दो मीटर जमीन बर्बाद करता है। बाड़ लगा देता है, एक मीटर इधर वाले की जाती है, एक मीटर उधर वाले की जाती है। अगर वो दोनों मिलकर के timber की खेती करें । पेड लगा दे तो 15-20 साल में permanent income का source बन सकता है और जमीन को कोई नुकसान नहीं होने वाला है। जमीन को अतिरिक्‍त फायदा होने वाला है। उस दिशा में काम कर रहे हैं। हम कृषि के साथ fisheries, poultry , animal husbandry, milk production, दूसरा value addition. Income बढ़ाने के लिए जरूरी नहीं है कि agro product ही बने. Value addition से, अभी हमने एक निर्णय कोका कोला कंपनी पर हमने दबाव डाला, उनसे बातचीत की, laboratory में testing करवाया। हमने आग्रह किया कि आप कोका कोला के अंदर 5% natural orange juice mix करिये और मुझे खुशी है कि अभी महाराष्‍ट्र government के साथ उनका agreement हुआ और विदर्भ के अंदर जो संतरा पैदा होता है वो संतरा अब कोका कोला के अंदर 5% मिक्स होगा तो वि‍दर्भ के कि‍सान का संतरा बि‍कने में कोई दि‍क्‍कत नहीं आएगी।

हमें value addition की दि‍शा में प्रयास करना होगा और इसलि‍ए अगर आलू कि‍सान बेचता है तो कम कमाई होती है लेकि‍न wafer बनाकर के बेचता है तो ज्‍यादा कमाई होती है। हरी मि‍र्च बेचता है तो कम कमाई होती है लेकि‍न लाल मि‍र्च का पाउडर बनाकर के बेचता है तो ज्‍यादा कीमत मि‍लती है। हम लोगों ने value addition पर बल देना शुरू कि‍या है जि‍सके कारण हमारे कि‍सान की income में बढ़ोतरी होना पूरी तरह लाजि‍मी है। उसी प्रकार से blue economy, हमारे जो सागर, जो हमारे fisheries में हमारे fisherman लगे हैं। हमारे समुद्री तट पर seaweed की खेती, पूरी संभावना है आज दुनि‍या में pharmaceuticals के manufacturing में base material के लि‍ए seaweed बहुत बड़ी ताकत बनकर उभरा है। हमारे fisherman के परि‍वार समुद्री तट पर आराम से seaweed की खेती कर सकते है और वो seaweed की marketing और हमारे pharmaceuticals से हम tie up करे, हमारे fisherman की income भी हम बढ़ा सकते हैं। कहने का तात्‍पर्य यह है कि‍हम जो सोचते हैं कि‍agriculture sector में हम कि‍सानों की आय बढ़ा नहीं सकते, ये नि‍राशा का कोई कारण नहीं है। अगर हम वैज्ञानि‍क तरीके से, उसी प्रकार से National Agriculture Market, आज National Agriculture Market के द्वारा, e-platform के द्वारा, कि‍सान अपने गांव में बैठकर के यह तय कर सकता है कि‍अगर महाराष्‍ट्र के अंदर उसकी पैदावार की कीमत ज्‍यादा है, वहां बेच सकता है। 14 अप्रैल बाबा साहेब आम्‍बेडकर की जन्‍मजयंती पर यह सरकार इसको launch करने जा रही है। कि‍सान अपनी जहां ज्‍यादा कीमत मि‍लेगी, वहां market में जाने के लि‍ए उसको सुवि‍धा मि‍लने वाली है।

दुनि‍या में honey का बहुत बड़ा market है। लेकि‍न भारत में हमारे कृषि‍क्षेत्र में honey bee का वैज्ञानि‍क तरीके से कोई प्रयास नहीं हुआ, registration तक available नहीं है। हमने इस पर बल दि‍या है।
अगर उस पर हमारा किसान काम करता है और हनी बी को बिगड़ने का सवाल ही नहीं होता है लंबे समय अर्से तक रहता है। हमारे किसान की इनकम में अतिरिक्‍त बढ़ोतरी कर सकता है। हमने किसान की income बढ़ाने के लिए और पहलुओं पर बल देने की दिशा में प्रयास कर रहे हैं।

चैयरमैन श्री, यहां पर स्‍वच्‍छता की चर्चा हुई और ये कहा गया कि ये काम तो हमारे समय में भी चलता था। हमने किसी भी बात नहीं कही है। ये सब आप ही की देन है। हम कभी claim नहीं करते ये आप ही की देन है कि आज हमको दिन रात मेहनत करके स्‍कूलों में चार लाख टॉयलेट बनाने पड़े। आपने अगर बना करके दिया होता तो काम हमारा कम हो जाता और इसिलए कोई ये नहीं कहता कहने का तात्‍पर्य समस्‍याएं पुरानी हैं, समस्‍याएं नई नहीं हैं। समस्‍याओं के समाधान करने के प्रयास अभिरथ चले हैं। हर किसी ने अपने-अपने समय कुछ न कुछ जोड़ने का प्रयास किया है। उस समय की स्‍थिति के अनुसार available resources के अनुसार हमने भी एक प्रयास किया है और यह खुशी की बात है। देखिए 1986 में central rural sanitation programme आया था, तब से लेकर के। रिकॉर्ड पर यह चीजें available है। उसके बावजूद भी हम अभी तक परिणाम प्राप्‍त नहीं कर सके। परिणाम प्राप्‍त करना है तो जन आंदोलन खड़ा करना पड़ेगा ।

और मैं आज इस बात को संतोष के साथ कह सकता हूं कि‍ आज स्‍वच्‍छता, ये जन आंदोलन बनने की दि‍शा में जा रहा है। हमारी संसद ने देश आजाद होने के बाद कभी भी स्‍वच्‍छता पर debate नहीं की थी। पहली बार इस देश में पार्लि‍यामेंट ने दो-दो, तीन-तीन घंटे तक स्‍वच्‍छता पर चर्चा की। हो सकता है सरकार की आलोचना हुई होगी लेकि‍न कम से कम इस सदन के लोग, उस सदन के लोग इस बात पर sensitize हुए है कि‍अब इसको ऐसे नहीं रहने देना चाहि‍ए, बदलना चाहि‍ए। एक अच्‍छा माहौल बन रहा है। हम सब उसको बल कैसे दे, उस दि‍शा में सोचना है। कोई दावा नहीं करता है कि‍हम ही लाए।

हमारे बाद कोई आएंगे तो वो उसको improve करेंगे। उनके बाद कोई आएगा और improve करेंगे और हो सकता है स्‍थि‍ति‍ऐसी आए करना न पड़े और वो जन सामान्‍य का वि‍षय बन जाए। लेकि‍न हमें करना होगा और जब तक हम इसको नहीं करेंगे। हमने अभी शहरों की एक challenging mode में competition शुरू की है। उसका परि‍णाम यह आया है Urban Development Ministry कर रही है। आज शहरों में उस शहर की elected body पर दबाव पड़ रहा है कि‍भई उन तीन में तुम्‍हारा नाम क्‍यों नहीं है हमारे शहर का नाम क्‍यों नहीं है? मैं बनारस का MP हूं, बनारस के नागरि‍क municipality पर दबाव डाल रहे हैं कि‍क्‍या बात है यह स्‍वच्‍छता के अंदर बनारस नज़र क्‍यों नहीं आ रहा? जनता का pressure बढ़ रहा है। ये बढ़ना चाहि‍ए और मैं तो चाहता हूं आप भी जहां-जहां हो ये pressure बढ़ाइए। सरकार को मजबूर कीजि‍ए। सभी elected bodies को मजबूर कीजि‍ए। हम स्‍वच्‍छता को हमारे देश हि‍त का एक महत्‍वपूर्ण कार्यक्रम माने। महात्‍मा गांधी का जो सपना था, 2019 में पूरा करना, हम सबका दायि‍त्‍व क्‍यों नहीं हो सकता।

इस सरकार उस सरकार का नहीं हो सकता है मेरे माननीय सभी सदस्‍यगण ये हम सबका होना है। मैं देख रहा हूं मीडिया हाऊस दुनियाभर के विषय में दुनियाभर के विषय में हमारी आलोचना करते हैं। सरकारों की आलोचना करते हैं। ये एक विषय ऐसा है कि देश का मीडिया पार्टनर बना है। कहीं न कहीं मीडिया के लोग इस काम को कर रहे हैं खुद कार्यक्रम कर रहे हैं। खुद उसको promote कर रहे हैं। इसको एक हम सबका कार्यक्रम बनाएंगे तो देश के और देश के Tourism बढ़ाने के लिए काम आएगा और स्‍वच्‍छता जो पूंजीपतियों का विरोध करते हैं, उनके लिए तो सबसे पहले करने जैसा काम है, क्‍योंकि WHO का रिपोर्ट कहता है, इंटर नेशनल एजेंसी का रिपोर्ट कहता है कि गंदगी के कारण गरीबी में जीने वाले परिवारों को सालाना average सात हजार रूपया दवाई में खर्च होता है। अगर ये उसकी बीमारी चली जाए इसके कारण कितनी बड़ी सेवा होगी।

मैं मानता हूं, ये काम ऐसा है जिन्‍होंने किया है उसे हम आगे बढ़ाए। जितना किया है उसको और अधिक करें। अभी मैं छत्‍तीसगढ़ गया था। मैंने एक मां के पैर छुए, आदिवासी मां, पढ़ी-लिखी नहीं 90 प्‍लस उम्र है। उस मां ने अपनी तीन बकरियां बेच करके टॉयलेट बनाया। उस गांव में वो पहली महिला थी जिसे टॉयलेट बनाया। हम लोगों के लिए इससे बडा़ inspiration क्‍या हो सकता है और इसलिए और इसलिए मैं चाहूंगा कि इसको सरकार कार्यक्रम, पक्ष का कार्यक्रम, ये सरकार वो सरकार की सीमाओं में न बांधें। उसको देशहित के लिए सोचें और उसको हम बनाएंगे तो मैं समझता हूं कि बहुत अच्‍छा होगा।

कल हमारे सीताराम जी, जो उनका बेसिक फिलॉस्‍पी है उसको कल प्रकट कर रहे थे कि इतने exemption हैं, इतना फलां, आंकड़ा कहां से लाए। वो तो भगवान जाने। हां, वो आंकड़ा ढूंढा मुझे मिला नहीं। मुझे बाद में दिखा देना जी, लेकिन मैं बताना चाहता हूं कि मैं वो आंकड़े की बताना चाहता हूं। टेक्‍स exemption है। जरा हम देखें 10 हजार 350 करोड़ रूपये exemption उसमें दाल और सब्‍जी में, क्‍या हम उसका विरोध करेंगे। 5800 करोड़ रूपये exemption किसके लिए चीनी के लिए।

शरद जी जो आपके बगल में बैठे है बाद में समझा देंगे आपको। 19 हजार 120 करो़ड़ रूपये exemption किसके लिए। जम्‍मू कश्‍मीर, हिमाचल, उत्‍तराखंड उनके उद्योगों के लिए। नार्थ ईस्‍ट के लिए, हम उसका भी विरोध करेंगे क्या ।
 
मैं समझता हूं कि कभी-कभार बारीकियों में जाएंगे तो हमें पता चलेगा कि हमारे जो इन बातों को ले करके आपको चिंता हो रही है। यही सरकार है, कल अरूण जी ने आपको विस्‍तार से बताया है finance की चर्चा होगी तो बताएंगे कि हमने टैक्‍स किस पर लगा रहे हैं और टैक्‍स से मु‍क्ति किसको दे रहे हैं। दूध का दूध पानी का पानी हो जाएगा और इसके लिए। और जो चीजें हमें विरासत में दी हैं कभी आपने बाहर से समर्थन करके सरकारें चलाई उसने जो हमें विरासत में दी हैं। आज उसी को सफाई करने में हमारा दम उखड़ रहा है और इसलिए समाप्‍त करने से पहले एक मशहूर शायर निदा फाजली की जो आवाज है। अभी अभी उनका स्‍वर्गवास हुआ। उनकी बात कह करके मेरी बात मैं समाप्‍त करूंगा।

सफर में धूप तो होगी, जो चल सको तो चलो
सभी हैं भीड़ में, तुम भी निकल सको तो चलो।
सफर में धूप तो होगी, जो चल सको तो चलो
सभी हैं भीड़ में, तुम भी निकल सको तो चलो।
किसी के वास्‍ते, राहें कहां बदलती हैं,
किसी के वास्‍ते, राहें कहां बदलती हैं
तुम अपने आप को खुद ही बदल सको तो चलो, चलो
यहां किसी को कोई रास्‍ता नहीं देता
यहां किसी को कोई रास्‍ता नहीं देता
मुझे गिरा के मुझे गिरा के अगर तुम संभल सको तो चलो
यही है जिन्दगी , कुछ ख्वाब चंद उम्मीदें
इन्हीं खिलोने से जो तुम भी बहल सको तो चलो |
सफर में धूप तो होगी, जो चल सको तो चलो
सभी हैं भीड़ में, तुम भी निकल सको तो चलो।
बहुत बहुत धन्यवाद