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Tuesday, 19 April 2016

We all have to work together for development of India that must be fast-paced & all inclusive: PM Modi

मंच पर विराजमान सभी महानुभाव और विशाल संख्या में पधारे मेरे भाईयों और बहनों,

मौसम बहुत अच्‍छा है। मैं जब महबूबा जी को सुन रहा था, उन्‍होंने जिस उमंग और उत्‍साह के साथ जम्‍मू कश्‍मीर के भविष्‍य को बनाने के लिए सपने देखें हैं संकल्‍प किया है। ऊर्जावान नेतृत्‍व दिया है और उनकी नई सरकार बनने के बाद मुझे आज पहली बार यहां आने का मौका मिला है। मैं उन्‍हें और पूरे जम्‍मू-कश्‍मीर को हृदय से बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं। वैसे आज का यह अवसर जम्‍मू-कश्‍मीर के जीवन में एक नया उमंग भरने वाला अवसर है, लेकिन ऐसे उमंग भरे  अवसर पर मुफ़्ती साहब की गैरहाजिरी हम महसूस करते हैं। बहुत लम्‍बा उनका कार्यकाल रहा सार्वजनिक जीवन में और जब भी मेरा उनसे मिलने हुआ एक बात उनके दिमाग में रहती थी देश को आगे बढ़ाने के लिए जम्‍मू-कश्‍मीर  को आगे  बढ़ाना। एक बात उनके दिल में रहा करती थी जम्‍मू और श्रीनगर के बीच में भी कभी कभी जो दूरी महसूस होती है, उस दूरी को भी मिटा देना और हिंदुस्‍तान में हर हिंदुस्‍तानी भारत में इस मुकुटमणि के लिए गर्व करता बने, ऐसी सरकार चलाना ऐसे विकास के काम करना यह सपने मुफ्ती साहब देखा करते थे।
इन दिनों जब भी मेरा महबूबा जी से मिलना हुआ है। मैं देख रहा हूं कि जिस मनोयोग के साथ लगन के साथ वो जम्‍मू-कश्‍मीर के विकास की चर्चा करती रहतीं थी। यहां भी बैठी मौसम की बात नहीं कर रही हैं – tourism का क्‍या होगा, वो road का क्‍या होगा, वहां bridge बनाना है उसका क्‍या होगा। जब यह भाव बनता है, विकास के प्रति जब यह समर्पण का भाव बन जाता है, तो विकास होना सुनिश्चित हो जाता है और इसलिए मैं महबूबा जी को बहुत बधाई देता हूं।

आज मुझे, मां वैष्‍णो देवी के चरणों में आ करके, तीन अवसर प्राप्‍त हुए तीन कार्यक्रम करने का मौका मिला। आज प्रात: सुबह university में convocation के लिए मुझे नौजवानों के साथ मिलने का अवसर मिला। हिंदुस्‍तान में बहुत कम लोगों को पता होगा कि जम्‍मू-कश्‍मीर करीब-करीब देश के सभी राज्‍यों के विद्यार्थियों को यहां अपने साथ  रख करके उनकी शिक्षा-दिक्षा का काम कर रहा है। यह अपने आप में जम्‍मू कश्‍मीर की एक वो पहचान है, जो देश को ताकत देती है देश का गौरव बढ़ाती है।
आज मुझे एक sports comlex का भी उद्घाटन करने को मिला। अगर खेल नहीं है, तो जीवन में खिलना भी बड़ा असंभव हो जाता है। जो खेलता है, वही खिलता है। कभी कभी हम जीवन में एक शब्‍द बड़े गर्व के साथ सुनते हैं और वो सिर्फ खेल के मैदान में नहीं सुनते जीवन के हर दौर पर हम सुनते हैं। कोई भी व्‍यक्ति कुछ अच्‍छा करें कुछ अलग तरीके से करे तो हम तुरंत कहते हैं नहीं-नहीं भाई  उसमें तो बड़ा sportsman spirit है। दो भाई  के बीच में भी कोई बात हो जाए और एक भाई कोई उदारता से व्‍यवहार करे तो नहीं-नहीं वो छोटा भाई है न वो तो बड़ा  sportsman spirit है। यह sportsman spirit शब्‍द खेल के मैदान में खिलाडि़यों ने जो साधना की है उसका परिणाम है कि ताकतवर बनना। अगर sport है तो sportsman spirit है और अगर sportsman spirit होता है तो अपने पन का भाव  किसी के लिए कुछ छोड़ने का इरादा किसी को साथ ले करके चलने का इरादा, कंधे से कंधा मिलाकर विजय प्राप्‍त करने का हौसला, कदम से कदम मिला करके चलने के इरादे यह sportsman spirit के साथ अपने आप उजागर होते हैं।

मां वैष्‍णो देवी के श्राइन बोर्ड के द्वारा यह जो sport complex बना है वो सिर्फ sport को ही बढ़ावा देगा ऐसा नहीं, वो sportsman spirit को बढावा देगा जो जीवन के अंदर एक lubrication का काम करता है। जीवन को एक ताकत देने का काम करता है।

जब कश्‍मीर का नौजवान हिंदुस्‍तान के क्रिकेट के अंदर चमकता है, तो सीना गर्व से फूल जाता है। 2017 में FIFA Under-17 World Cup फुटबाल का भारत में होने जा रहा है। ये FIFA Under-17 World Cup, भारत के नौजवानों में आने वाले दिनों में एक नया ताकत भरने वाला, नया हौंसला बुलंद करने वाला अवसर बनना चाहिए। दुनिया भर के लोग, खिलाड़ी आएंगे हमारे यहां, फुटबॉल में हम कोई अच्छी स्थिति में नहीं है, हम बहुत पीछे हैं। लेकिन फिर भी हम एक ऐसा माहौल बनाएं कि हम खेल को जिस प्रकार से गले लगाएं। दुनिया अनुभव करें, हिंदुस्तान की विविधता का, हिंदुस्तान की युवा शक्ति का, हिंदुस्तान के समार्थ्य का ऐसा माहौल बनाने में Sports Complex भी कोई न कोई भूमिका अदा करेगा, ऐसी मैं आशा करता हूं।

आज मुझे एक sports comlex का भी उद्घाटन करने को मिला। अगर खेल नहीं है, तो जीवन में खिलना भी बड़ा असंभव हो जाता है। जो खेलता है, वही खिलता है। कभी कभी हम जीवन में एक शब्‍द बड़े गर्व के साथ सुनते हैं और वो सिर्फ खेल के मैदान में नहीं सुनते जीवन के हर दौर पर हम सुनते हैं। कोई भी व्‍यक्ति कुछ अच्‍छा करें कुछ अलग तरीके से करे तो हम तुरंत कहते हैं नहीं-नहीं भाई  उसमें तो बड़ा sportsman spirit है। दो भाई  के बीच में भी कोई बात हो जाए और एक भाई कोई उदारता से व्‍यवहार करे तो नहीं-नहीं वो छोटा भाई है न वो तो बड़ा  sportsman spirit है। यह sportsman spirit शब्‍द खेल के मैदान में खिलाडि़यों ने जो साधना की है उसका परिणाम है कि ताकतवर बनना। अगर sport है तो sportsman spirit है और अगर sportsman spirit होता है तो अपने पन का भाव  किसी के लिए कुछ छोड़ने का इरादा किसी को साथ ले करके चलने का इरादा, कंधे से कंधा मिलाकर विजय प्राप्‍त करने का हौसला, कदम से कदम मिला करके चलने के इरादे यह sportsman spirit के साथ अपने आप उजागर होते हैं।

मां वैष्‍णो देवी के श्राइन बोर्ड के द्वारा यह जो sport complex बना है वो सिर्फ sport को ही बढ़ावा देगा ऐसा नहीं, वो sportsman spirit को बढावा देगा जो जीवन के अंदर एक lubrication का काम करता है। जीवन को एक ताकत देने का काम करता है।

जब कश्‍मीर का नौजवान हिंदुस्‍तान के क्रिकेट के अंदर चमकता है, तो सीना गर्व से फूल जाता है। 2017 में FIFA Under-17 World Cup फुटबाल का भारत में होने जा रहा है। ये FIFA Under-17 World Cup, भारत के नौजवानों में आने वाले दिनों में एक नया ताकत भरने वाला, नया हौंसला बुलंद करने वाला अवसर बनना चाहिए। दुनिया भर के लोग, खिलाड़ी आएंगे हमारे यहां, फुटबॉल में हम कोई अच्छी स्थिति में नहीं है, हम बहुत पीछे हैं। लेकिन फिर भी हम एक ऐसा माहौल बनाएं कि हम खेल को जिस प्रकार से गले लगाएं। दुनिया अनुभव करें, हिंदुस्तान की विविधता का, हिंदुस्तान की युवा शक्ति का, हिंदुस्तान के समार्थ्य का ऐसा माहौल बनाने में Sports Complex भी कोई न कोई भूमिका अदा करेगा, ऐसी मैं आशा करता हूं।



मैं उन गांववालों को हृदय से अभिनंदन करना चाहता हूं, उन्होंने कुछ दिया। जमीन देना बहुत सरल बात नहीं होती है, लेकिन गांववालों ने जमीन दी, उन्होंने ने तो जमीन दी, लेकिन वो जमीन आज उस रूप को धारण किया है जो लोगों को जीवन देने का काम करेगी और कितना जीवन में संतोष होगा। एक जमाना था जिस जमीन के हम मालिक थे, मां वैष्णो देवी के चरणों में वो जमीन हमने दे दी। आज ऐसा अस्पताल बना है, जो अस्पताल हजारों लोगों की जिंदगी बचाने का कारण बन गया है और मैं मानता हूं इससे बड़ा जीवन का संतोष क्या हो सकता है और इसलिए मैं सबसे पहले उन गांववालों को हृदय से बहुत-बहुत अभिनंदन करता हूं।

मैं आज Mata Vaishno Devi Shrine Board को भी... जब जगमोहन जी यहां गवर्नर हुआ करते थे तब से लेकर के Mata Vaishno Devi Shrine Board का विकास अनेक सामाजिक पृवत्तियां यहां पर आने वाली पाई-पाई का उपयोग जम्मू-कश्मीर के लोगों के लिए कैसे किया जाए इसका एक उत्तम उदाहरण आज इस Shrine Board ने प्रस्तुत किया है। वो Sports Complex चलाएं, वो University चलाएं, वो अस्पताल चलाएं और हिंदुस्तान के गणमान्य अस्पतालों में जिसकी गणना होगी, ऐसी अस्पताल सामान्य नहीं। हमारे देश में भी इस प्रकार की जो धन सम्‍पदा पड़ी है, उसका जितना समाज के लिए उपयोग होगा, उतनी समाज के लिए ताकत बनेगी। और यह Mata Vaishno Devi Shrine Board ने बता दिया है। एक रास्‍ता दिखाया है। और इसलिए वे भी इसके बहुत-बहुत अधिकारी हैं अभिनंदन के लिए।

मुझे विश्‍वास  है कि इस अस्‍पताल के कारण जम्‍मू कश्‍मीर के लोगों को अब गंभीर बीमारियों के लिए दूर तक नहीं जाना पड़ेगा। व्‍यवस्‍थाएं तो अच्‍छी होगी, लेकिन डॉक्‍टर्स भी अच्‍छे होंगे। और यहां का मौसम तो ऐसा है कहीं और ठीक होने में अगर 15 दिन लगता है, तो यहां मौसम ऐसा है पांच दिन में ठीक हो जाएगा। और जिस जगह हिंदुस्‍तान में दुनिया को पता चलेगा कि मां वैष्‍णो देवी के चरणों में एक ऐसा अस्‍पताल है, वहां ऐसा मौसम है कि बीमारी आधे समय में ठीक हो जाती है तो दुनिया भी tourist के नाते यही पर अस्‍पताल में medical care के लिए आ जाएगी। और यह संभव है हमें जम्‍मू-कश्‍मीर के लोगों का सपना देखना चाहिए कि tourism के लिए जैसे दुनिया हमारे यहां आती रही है वैसे health care tourism के लिए भी दुनिया को यहां आने के लिए हम प्रेरित कर सकते हैं। ऐसी ऊंचाईयों पर हम जम्‍मू कश्‍मीर को ले जा सकते हैं।

  
एक बात निश्‍चित है हिंदुस्‍तान तेज गति से तरक्‍की करे सवा सौ करोड़ देश‍वासियों के सपने साकार हो उस दिशा में हम सबको प्रयास करना है। चाहे कश्‍मीर हो या कन्‍याकुमारी, चाहे कच्‍छ हो या कामरूप एक संतुलित विकास चारों तरफ विकास, तेज गति से विकास हमारी सारी समस्‍याओं को समाधान विकास में है। देश को आधुनिक infrastructure चाहिए। स्‍कूल चाहिए, कॉलेज चाहिए, रोड चाहिए बिजली चाहिए, सामान्‍य मानव के विकास के जीवन में सुधार आए यह व्‍यवस्‍था चाहिए। जब मुफ्ती साहब थे 80 हजार करोड़ रुपये का पैकेज जम्‍मू कश्‍मीर की जिंदगी को बदलने के लिए लगाना है। भारत सरकार पूरी ताकत के साथ जम्‍मू कश्‍मीर का भाग्‍य बदलने के लिए सरकार के साथ कंधे से कंधा मिला करके हर कदम पर आगे बढ़ते हुए जम्‍मू-कश्‍मीर की आशाओं-आकांक्षाओं को पूर्ण कर रहा है।

अटल बिहारी वाजपेयी जी, जिनके प्रति जम्‍मू कश्‍मीर के लोगों की आपार श्रद्धा रही। शायद हिंदुस्‍तान में बहुत कम ऐसे लीडर हुए हैं कि जिनके प्रति सामान्‍य मानव के मन में इतनी आस्‍था हो जितनी अटल बिहारी वाजपेयी के लिए जम्‍मू कश्‍मीर में दिखाई देती है और अटल जी कहा  करते थे हमें जम्‍मू-कश्‍मीर को कैसे आगे बढ़ाना है। और वो कहते थे इंसानियत, कश्‍मीयरत और जम्‍मूरियत, इन तीन मजबूती के पिलर पर हमें जम्‍मू-कश्‍मीर को नई ऊंचाईयों पर ले जाना है। और हमने उन्‍हीं सपनों को वाजपेयी जी के जो सपने है इंसानियत, कश्‍मीयरत और जम्‍मूरियत उसके अंदर ‘सबका साथ सबका विकास’ का रंग भर दिया है। हर किसी का भला हो, हर किसी को साथ ले करके चले उन सपनों को पूरा करना है।


और मुझे विश्‍वास है tourism की दिशा में भी जम्‍मू कश्‍मीर देश की बहुत बड़ी सेवा कर सकता है। और जम्‍मू-कश्‍मीर जब tourist दुनिया का कोई आता है तो सिर्फ जम्‍मू-कश्‍मीर का आर्थिक भला होता है ऐसा नहीं, पूरे हिंदुस्‍तान का आर्थिक भला होता है। जम्‍मू कश्‍मीर के tourism को बल देने के लिए अनेक ऐसे क्षेत्र है कि जहां हम नये कदम  रख सकते हैं। और उसको आधुनिक tourism कैसे बनाए, adventure करना लोग चाहते हैं उनके लिए tourism कैसे बनाए। जो लोग spiritual activity में अपना गुजारा करना चाहते हैं उनके लिए tourism कैसे बनाए। अनेक ऐसे क्षेत्र है कि जहां जम्‍मू-कश्‍मीर के tourism को हम बल दे सकते हैं। और जम्‍मू-कश्‍मीर सरकार और भारत सरकार दोनों प्रतिबद्ध है कि जम्‍मू-कश्‍मीर में tourism के लिए आवश्‍क आधुनिक infrastructure तैयार हो। Tourism के लिए आवश्‍यक सुविधाएं, सामान्‍य मानव के लिए तैयार हो। रेल का काम बड़ी तेज गति से चल रहा है। उसका बहुत सुखद परिणाम आने वाले दिनों में मिलने वाला है। Road, जम्‍मू से श्रीनगर जाने का समय आधा कर देने के इरादेसे नये road बनाने की दिशा में काम चल रहा है। जितना infrastructure तेजी से बढ़ेगा लेह-लदाख तक हम जुड़ जाएंगे। तो मैं मानता हूं कि आने वाले यात्रियों को इस तरफ आने का मंच स्‍वाभाविक कर जाएगा। और इसलिए विकास की नई ऊंचाईयों को पार कर जाने के इरादे से infrastructure पर बल देते हुए दोनों सरकारे कंधे से कंधा मिला करके काम कर रही है।

मेरी महबूबा जी को अनेक-अनेक शुभकामनाएं हैं। मैं गवर्नर साहब का भी अभिनंदन करता हूं कि Shrine Board के द्वारा इतने initiative लिए है जो सामान्‍य जम्‍मू-कश्‍मीर के नागरिक भला करने में काम आएंगे। आप सबको भी मेरी बहुत-बहुत शुभकामनाएं, धन्‍यवाद।

Ref: http://www.narendramodi.in/category/speeches

Monday, 11 April 2016

India's economic development is incomplete without development of it's neighbours: PM Modi


राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन जी और मीडिया के मेरे साथियों,

आज भारत और मालदीव्स की सहभागिता के इतिहास में एक अहम दिन है।

आपकी इस भारत यात्रा पर मैं आपका हार्दिक स्वागत करता हूँ। दिल्ली में आपकी मौजूदगी, मेरे लिए व्यक्तिगत रूप से बहुत खुशी की बात है...आपका आना एक दोस्त के आने का ऐहसास कराता है।

लदीव्स भारत के सबसे घनिष्ट सहयोगियों में से एक है। संस्कृति की पुरानी कड़ियाँ,  दोनों देशों के लोगों के बीच आपसी मेल-जोल, और हिंद महासागर की लहरें, हमें जोड़ती हैं।

Excellency यामीन,

मालदीव्स की प्रगति, सुरक्षा और आर्थिक विकास, जितना आपका मकसद है, उतना ही भारत का भी लक्ष्य है। मालदीव्स की स्थिरता और सुरक्षा भारत के सामरिक हितों से सीधे-सीधे जुड़ी हुई है।  
मालदीव्स की समस्याएं,  हमारी भी चिंता हैं।  

मेरा मानना है कि भारत का आर्थिक विकास हमारे पड़ोसी देशों की तरक्की के बिना अधूरा है। 'Neighbours First’, न सिर्फ हमारी नीति है, बल्कि हमारे सिद्धांतों का अहम हिस्सा भी है।
दोस्तों,

मैंने राष्ट्रपति यामीन के साथ दोनों देशों के बीच संबंधों से जुड़े सभी विषयों पर विस्तार से बातचीत की है। ये साफ है कि भारत और मालदीव्स के संबंधों का दायरा हमारे साझे सामरिक, सुरक्षा, आर्थिक, और विकास के मकसद से परिभाषित है।  हम मालदीव्स की सुरक्षा जरूरतों के प्रति जागरुक हैं।  

राष्ट्रपति यामीन भी इस बात से सहमत हैं कि मालदीव्स भारत के सामरिक और सुरक्षा हितों के प्रति पूरी तरह संवेदनशील रहेगा।  

हमारा सांझा मत है कि भारत और मालदीव्स की समंदर की सीमाओं की सुरक्षा का सबसे बेहतर और इकलौता जरिया हमारी मजबूत दोस्ती है।   पूरे हिंद महासागर में शांति, समृद्धि और सुरक्षा के लिए भी ये बहुत ही जरूरी है।

हिंद महासागर में  net security provider  के तौर पर  भारत अपनी जिम्मेदारी को बखूबी समझता है। धरती के इस हिस्से में अपने सामरिक हितों की रक्षा के लिए भारत पूरी तरह तैयार है।  
हमारी आज की बातचीत में कई अहम विषयों पर सहमति बनी है।

रक्षा  के क्षेत्र में एक Concrete एक्शन प्लान को जल्द ही लागू करने से  हमारी सुरक्षा सहभागिता और मजबूत होगी।  

बंदरगाहों का विकास, लगातार ट्रेनिंग  और क्षमता में सुधार, जरूरी उपकरणों की सप्लाई, और समंदर का surveillance, इस के अहम अंग होंगे।  
भारत और  मालदीव्स मिलकर उथुरु थाईला फालु - UTH - में पोर्ट से जुड़ी सुविधाओं  का विकास करेंगे।
I-Haven का विकास मालदीव्स की प्राथमिकता है। भारत इस प्रोजेक्ट में मालदीव्स के साथ पार्टनरशिप   के लिए तैयार है।

हमने  मालदीव्स में पुलिस अकादमी की स्थापना, रक्षा मंत्रालय की इमारत का निर्माण और सुरक्षा से जुड़े Infrastructure प्रोजेक्ट्स में भी तेजी लाने का फैसला किया है।  
दक्षिण एशिया में सीमा पार से आतंकवाद और कट्टरवादी सोच के हावी होने से हो रहे नुकसान और खतरों के प्रति राष्ट्रपति यामीन और मैं पूरी तरह सजग हैं...सचेत हैं।  

इस चुनौती को ध्यान में रखते हुए, दोनों देशो की एजेंसियों के बीच information exchange और   मालदीव्स की पुलिस और सुरक्षा सेनाओं की ट्रेनिंग और उनकी क्षमताओं में विकास, हमारे सुरक्षा सहयोग का अहम हिस्सा है।
राहत और बचाव के काम में, प्राकृतिक आपदाओं के वक्त अपनी दोस्ती को...अपनी पार्टनरशिप को   और मजबूत करने पर भी दोनों देश सहमत हैं।
 
दोस्तों,
हम दोनों ने व्यापार,  आर्थिक और निवेश में साझेदारी के विकास पर भी विस्तार से बात की। भारत में होने वाले तीसरे Maldives Investment Forum का हम स्वागत करते हैं।  ये दोनों देशों के बीच निवेश और कारोबारी रिश्तों को और मजबूत करेगा।

स्वास्थ्य सेवाओं में सहभागिता हमारी प्राथमिकता है। साल 1995 में भारत ने मालदीव्स में जो अस्पताल बनाया था, उसको upgrade करना,  डॉक्टरों की टीम को और मजबूत करना, स्वास्थ्य से जुड़ी संस्थाओं का निर्माण, दवाइयों की उपलब्धता और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी आधुनिक तकनीक, इस के   अहम अंग हैं।  
Tourism के क्षेत्र मे आज हुआ समझोता दोनों देशो के economic और people-to-people ties को बढायेगा |
आज हमारे सहयोग की उड़ान, जल और थल को पार कर अंतरिक्ष को छू रही है।  South Asia Satellite के समझौते पर आज हुए हस्ताक्षर से  मालदीव्स और दूसरे दक्षिण एशियाई देशों को शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यटन के क्षेत्र में  भरपूर लाभ मिलेगा।  

मालदीव्स सांस्कृतिक धरोहर का धनी है। प्राचीन मस्जिदों और ऐतिहासिक स्मारकों के संरक्षण और उनकी मरम्मत के लिए आज हुआ समझौता हमारे सांस्कृतिक रिश्तों को और मजबूत बनाएगा।  

दोस्तों

राष्ट्रपति यामीन जी ने  मालदीव्स में हो रहे राजनीतिक तथा institutional सुधारों  के बारे में भी मुझे जानकारी दी है। भारत हर ऐसी कोशिश का समर्थन करता है जो मालदीव्स को, उस के नागरिकों को और राजनीति को सशक्त बनाए।

Excellency यामीन,

मालदीव्स की सफलता के सफर में भारत एक ऐसा दोस्त है जो हर हालात में मालदीव्स के साथ कदम से कदम मिला कर चलेगा । भारत हमेशा मालदीव्स की जनता का   सुदृढ़ मित्र   और विश्वसनीय पार्टनर रहेगा।
इन शब्दों के साथ मैं एक बार फिर आप का  भारत की धरती पर स्वागत करता हूं।  
धन्यवाद।

Ref: http://www.narendramodi.in/category/speeches

Monday, 29 February 2016

Prime Minister Narendra Modi’s remarks on Union Budget 2016-17

My heartfelt thanks to Finance Minister Sri Arun Jaitley ji for this budget. Our focus is on the villages, poor, farmers, women and the youth. The budget has plans for ambitious schemes to bring in a qualitative change in their lives.

This budget presents a comprehensive , time bound action plan for poverty alleviation. Several measures have been outlined to double the income of the farmers. Pradhan Mantri Krishi Sinchai Yojana is one of them where a substantial allocation has been made to ensure water to every farm.

All of us know the importance of power and road infrastructure . There is a vision in this budget to connect every village to road by 2019. Pradhan Mantri Gram Sadak Yojana has been allocated substantial funds to connect the rural India by roads. Besides there is a clear plan to provide electricity to every village by 2018.

It will give an impetus to rural economy and bring about positive changes .If you ask a poor man, he will clearly share his dream. Owning a house is his biggest dream. Everyone from a middle class or neo middle class wants to own a house. How are we going to help them realize this dream? This is not possible without the help of the government. That’s why provisions have been made this time to give impetus to the housing sector and ensure a house to general household.

People who are living in rented house have also got increased rebate in Income Tax over House Rent. Those who are earning up to 5 lakhs will have to pay lesser tax.

There has been a lot of politics over the poor. You will be amazed to know that if a poor lady who cooks food for her children using a Chulha faces adverse impact on her and her children’s health. Experts say that the smoke of that chulha , is equivalent to the smoke of 400 cigarettes per day. We have to help people below the poverty line and that’s why we have decided to provide free gas connection to such people.

5 crore families who use chulha for cooking will get freedom from smoke. Poor will get health benefits and environment will protected as well.

Our government is also taking important decisions in health sector. At times, an ailment can destroy life of a poor family or a middle class family or a neo middle class family. We have presented schemes for senior citizens who are in dire need of help.

Our country should be safe, our citizens should feel safe and our forces should be equipped with modern defence equipment and our soldiers should get One Rank One Pension post retirement. This budget has made provisions for boosting defence manufacturing and providing the armed forces with modern and potent equipment.

You might have seen that in infrastructure a provision of more than 2 lakh crore Rupees has been made. This will benefit our forces who are guarding our borders.

The youth of the country is moving ahead. In order to provide him employment opportunities we are going to come out with two new initiatives, ‘formalizing the informal’ and ‘employing the unemployed.’

My Mantra is Start Up India, Stand Up India. To provide a favorable ecosystem for startups, the budget has provided plans in the taxes. Our Dalit and Tribal youth now wants to become an entrepreneur. He doesn’t want to be Job Seeker anymore but a Job Creator. In order to make him realize his dream, the government has decided to establish an entrepreneurial hub.

The youth of the country should be able to face global challenges and should get opportunities in education . But due to archaic laws and regulations, education has suffered a lot and in order to improve it 10 public and 10 private institutions will be raised to global standards after selection through a challenge route. These institutes will be provided financial aid as well. This is a great initiative in educations sector. Once there will be an environment of competition among higher education institutes, you can imagine what impact will it bring.

Primary education is equally important. Till now, the governments have been focusing on expansions of primary education which was also important but in order to combat today’s challenges qualitative change is also required with expansion. Children in far flung villages should get education, they should get qualitative education, this is our focus. And this budget presents priorities to such qualitative issues.

Our government has always stood for having faith in our people.We should not doubt our country’s citizens. Income tax department officials should also have a sense of respect towards our public and that’s why a common citizen should be made free from complicated processes that he faces. Traders and professionals who are facing such problems should be made free from it. A common man who earns livelihood will be free from processes involving presumptive tax payment on turn over.

Once again, I congratulate Shri Arun Jaitley ji and I assure my countrymen that this budget is a budget of your dreams. This budget has presented the commitment of government towards realizations of your dreams.

Thanks

Ref: http://www.narendramodi.in/category/speeches

Sunday, 28 February 2016

Set your targets and pursue them with a tension free mind: PM Modi to students during Mann Ki Baat


मेरे प्यारे देशवासियो, नमस्कार! आप रेडियो पर मेरी ‘मन की बात’ सुनते होंगे, लेकिन दिमाग इस बात पर लगा होगा – बच्चों के exam शुरू हो रहे हैं, कुछ लोगों के दसवीं-बारहवीं के exam शायद 1 मार्च को ही शुरू हो रहे हैं। तो आपके दिमाग में भी वही चलता होगा। मैं भी आपकी इस यात्रा में आपके साथ शरीक होना चाहता हूँ। आपको आपके बच्चों के exam की जितनी चिंता है, मुझे भी उतनी ही चिंता है। लेकिन अगर हम exam को, परीक्षा को देखने का अपना तौर-तरीका बदल दें, तो शायद हम चिंतामुक्त भी हो सकते हैं।

मैंने पिछली मेरी ‘मन की बात’ में कहा था कि आप NarendraModiApp पर अपने अनुभव, अपने सुझाव मुझे अवश्य भेजिए। मुझे खुशी इस बात की है – शिक्षकों ने, बहुत ही सफल जिनकी करियर रही है ऐसे विद्यार्थियों ने, माँ-बाप ने, समाज के कुछ चिंतकों ने बहुत सारी बातें मुझे लिख कर के भेजी हैं। दो बातें तो मुझे छू गईं कि सब लिखने वालों ने विषय को बराबर पकड़ के रखा। दूसरी बात इतनी हजारों मात्रा में चीज़ें आई कि मैं मानता हूँ कि शायद ये बहुत महत्वपूर्ण विषय है। लेकिन ज़्यादातर हमने exam के विषय को स्कूल के परिसर तक या परिवार तक या विद्यार्थी तक सीमित कर दिया है। मेरी App पर जो सुझाव आये, उससे तो लगता है कि ये तो बहुत ही बड़ा, पूरे राष्ट्र में लगातार विद्यार्थियों के इन विषयों की चर्चायें होती रहनी चाहिए।

मैं आज मेरी इस ‘मन की बात’ में विशेष रूप से माँ-बाप के साथ, परीक्षार्थियों के साथ और उनके शिक्षकों के साथ बातें करना चाहता हूँ। जो मैंने सुना है, जो मैंने पढ़ा है, जो मुझे बताया गया है, उसमें से भी कुछ बातें बताऊंगा। कुछ मुझे जो लगता है, वो भी जोड़ूंगा। लेकिन मुझे विश्वास है कि जिन विद्यार्थियों को exam देनी है, उनके लिए मेरे ये 25-30 मिनट बहुत उपयोगी होंगे, ऐसा मेरा मत है।

मेरे प्यारे विद्यार्थी मित्रो, मैं कुछ कहूँ, उसके पहले आज की ‘मन की बात’ का opening, हम विश्व के well-known opener के साथ क्यूँ न करें। जीवन में सफलता की ऊँचाइयों को पाने में कौन-सी चीज़ें उनको काम आईं, उनके अनुभव आपको ज़रूर काम आएँगे। भारत के युवाओं को जिनके प्रति नाज़ है, ऐसे भारतरत्न श्रीमान सचिन तेंदुलकर, उन्होंने जो message भेजा है, वह मैं आपको सुनाना चाहता हूँ: -

“नमस्कार, मैं सचिन तेंदुलकर बोल रहा हूँ। मुझे पता है कि exams कुछ ही दिनों में start होने वाली हैं। आप में से कई लोग tense भी रहेंगे। मेरा एक ही message है आपको कि आपसे expectations आपके माता-पिता करेंगे, आपके teachers करेंगे, आपके बाकी के family members करेंगे, दोस्त करेंगे। जहाँ भी जाओगे, सब पूछेंगे कि आपकी तैयारी कैसी चल रही है, कितने percent आपका स्कोर करोगे। यही कहना चाहूँगा मैं कि आप ख़ुद अपने लिए कुछ target set कीजियेगा, किसी और के expectation के pressure में मत आइयेगा। आप मेहनत ज़रूर कीजियेगा, मगर एक realistic achievable target खुद के लिए सेट कीजिये और वो target achieve करने के लिए कोशिश करना। मैं जब Cricket खेलता था, तो मेरे से भी बहुत सारे expectations होते थे। पिछले 24 साल में कई सारे कठिन moments आये और कई-कई बार अच्छे moments आये, मगर लोगों के expectations हमेशा रहते थे और वो बढ़ते ही गये, जैसे समय बीतता गया, expectations भी बढ़ते ही गए। तो इसके लिए मुझे एक solution find करना बहुत ज़रूरी था। तो मैंने यही सोचा कि मैं मेरे खुद के expectations रखूँगा और खुद के targets set करूँगा। अगर वो मेरे खुद के targets मैं set कर रहा हूँ और वो achieve कर पा रहा हूँ, तो मैं ज़रूर कुछ-न-कुछ अच्छी चीज़ देश के लिए कर पा रहा हूँ। और वो ही targets मैं हमेशा achieve करने की कोशिश करता था। मेरा focus रहता था ball पे और targets अपने आप slowly-slowly achieve होते गए। मैं आपको यही कहूँगा कि आप, आपकी सोच positive होनी बहुत ज़रूरी है। positive सोच को positive results follow करेंगे। तो आप positive ज़रूर रहियेगा और ऊपर वाला आपको ज़रूर अच्छे results दे, ये मुझे, इसकी पूरी उम्मीद है और आपको मैं best wishes देना चाहूँगा exams के लिए। एक tens।on free जा के पेपर लिखिये और अच्छे results पाइये। Good Luck!”

दोस्तो, देखा, तेंदुलकर जी क्या कह रहे हैं। ये expectation के बोझ के नीचे मत दबिये। आप ही को तो आपका भविष्य बनाना है। आप खुद से अपने लक्ष्य को तय करें, खुद ही अपने target तय करें - मुक्त मन से, मुक्त सोच से, मुक्त सामर्थ्य से। मुझे विश्वास है कि सचिन जी की ये बात आपको काम आएगी। और ये बात सही है | प्रतिस्पर्द्धा क्यों? अनुस्पर्द्धा क्यों नहीं। हम दूसरों से स्पर्द्धा करने में अपना समय क्यों बर्बाद करें। हम खुद से ही स्पर्द्धा क्यों न करें। हम अपने ही पहले के सारे रिकॉर्ड तोड़ने का तय क्यों न करें। आप देखिये, आपको आगे बढ़ने से कोई रोक नहीं पायेगा और अपने ही पिछले रिकॉर्ड को जब तोड़ोगे, तब आपको खुशी के लिए, संतोष के लिए किसी और से अपेक्षा भी नहीं रहेगी। एक भीतर से संतोष प्रकट होगा।

दोस्तो, परीक्षा को अंकों का खेल मत मानिये। कहाँ पहुँचे, कितना पहुँचे? उस हिसाब-किताब में मत फँसे रहिये। जीवन को तो किसी महान उद्देश्य के साथ जोड़ना चाहिए। एक सपनों को ले कर के चलना चाहिए, संकल्पबद्ध होना चाहिए। ये परीक्षाएँ, वो तो हम सही जा रहे हैं कि नहीं जा रहे, उसका हिसाब-किताब करती हैं; हमारी गति ठीक है कि नहीं है, उसका हिसाब-किताब करती हैं। और इसलिए विशाल, विराट ये अगर सपने रहें, तो परीक्षा अपने आप में एक आनंदोत्सव बन जायेगी। हर परीक्षा उस महान उद्देश्य की पूर्ति का एक कदम होगी। हर सफलता उस महान उद्देश्य को प्राप्त करने की चाभी बन जायेगी। और इसलिए इस वर्ष क्या होगा, इस exam में क्या होगा, वहाँ तक सीमित मत रहिये। एक बहुत बड़े उद्देश्य को ले कर के चलिये और उसमें कभी अपेक्षा से कुछ कम भी रह जाएगा, तो निराशा नहीं आएगी। और ज़ोर लगाने की, और ताक़त लगाने की, और कोशिश करने की हिम्मत आएगी।

जिन हज़ारों लोगों ने मुझे मेरे App पर मोबाइल फ़ोन से छोटी-छोटी बातें लिखी हैं। श्रेय गुप्ता ने इस बात पर बल दिया है कि स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मन रहता है। students अपनी पढ़ाई के साथ-साथ अपनी health का भी ध्यान रखें, जिससे आप exam में स्वस्थतापूर्वक अच्छे से लिख सकें। अब मैं आज आखिरी दिन ये तो नहीं कहूँगा कि आप दंड-बैठक लगाना शुरू कर दीजिये और तीन किलोमीटर, पाँच किलोमीटर दौड़ने के लिए जाइये। लेकिन एक बात सही है कि खास कर के exam के दिनों मे आप का routine कैसा है। वैसे भी 365 दिवस हमारा routine हमारे सपनों और संकल्पों के अनुकूल होना चाहिये। श्रीमान प्रभाकर रेड्डी जी की एक बात से मैं सहमत हूँ। उन्होंने ख़ास आग्रह किया हैं, समय पर सोना चाहिए और सुबह जल्दी उठकर revision करना चाहिए। examination centre पर प्रवेश-पत्र और दूसरी चीजों के साथ समय से पहले पहुँच जाना चाहिए। ये बात प्रभाकर रेड्डी जी ने कही है, मैं शायद कहने की हिम्मत नहीं करता, क्योंकि मैं सोने के संबंध में थोड़ा उदासीन हूँ और मेरे काफ़ी दोस्त भी मुझे शिकायत करते रहते हैं कि आप बहुत कम सोते हैं। ये मेरी एक कमी है, मैं भी ठीक करने की कोशिश करूँगा। लेकिन मैं इससे सहमत ज़रूर हूँ। निर्धारित सोने का समय, गहरी नींद - ये उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी कि आपकी दिन भर की और गतिविधियाँ और ये संभव है। मैं भाग्यवान हूँ, मेरी नींद कम है, लेकिन बहुत गहरी ज़रूर है और इसके लिए मेरा काम चल भी जाता है। लेकिन आपसे तो मैं आग्रह करूँगा। वरना कुछ लोगों की आदत होती है, सोने से पहले लम्बी-लम्बी टेलीफ़ोन पर बात करते रहते हैं। अब उसके बाद वही विचार चलते रहते हैं, तो कहाँ से नींद आएगी? और जब मैं सोने की बात करता हूँ, तो ये मत सोचिए कि मैं exam के लिए सोने के लिए कहा रहा हूँ। गलतफ़हमी मत करना। मैं exam के time पर तो आपको अच्छी परीक्षा देने के लिए तनावमुक्त अवस्था के लिए सोने की बात कर रहा हूँ। सोते रहने की बात नहीं कर रहा हूँ। वरना कहीं ऐसा न हो कि marks कम आ जाये और माँ पूछे कि क्यों बेटे, कम आये, तो कह दो कि मोदी जी ने सोने को कहा था, तो मैं तो सो गया था। ऐसा नहीं करोगे न! मुझे विश्वास है नहीं करोगे।

वैसे जीवन में, discipline सफलताओं की आधारशिला को मजबूत बनाने का बहुत बड़ा कारण होती है। एक मजबूत foundation discipline से आता है। और जो unorganized होते हैं, Indiscipline होते हैं, सुबह करने वाला काम शाम को करते हैं, दोपहर को करने वाला काम रात देर से करते हैं, उनको ये तो लगता है कि काम हो गया, लेकिन इतनी energy waste होती है और हर पल तनाव रहता है। हमारे शरीर में भी एक-आध अंग, हमारे body का एक-आध part थोड़ी-सी तकलीफ़ करे, तो आपने देखा होगा कि पूरा शरीर सहजता नहीं अनुभव करता है। इतना ही नहीं, हमारा routine भी चरमरा जाता है। और इसलिए किसी चीज़ को हम छोटी न मानें। आप देखिये, अपने-आपको कभी जो निर्धारित है, उसमें compromise करने की आदत में मत फंसाइए। तय करें, करके देखें।

दोस्तो, कभी-कभी मैंने देखा है कि जो student exam के लिए जाते हैं, दो प्रकार के student होते हैं, एक, उसने क्या पढ़ा है, क्या सीखा है, किन बातों में उसकी अच्छी ताक़त है - उन चीजों पर ध्यान केंद्रित करते हैं। दूसरे प्रकार के student होते हैं - यार, पता नहीं कौन-सा सवाल आयेगा, पता नहीं कैसा सवाल आयेगा, पता नहीं कर पाऊंगा कि नहीं कर पाऊंगा, पेपर भारी होगा कि हल्का होगा? ये दो प्रकार के लोग देखे होंगे आपने। जो कैसा पेपर आयेगा, उसके tension में रहता है, उसका उसके परिणाम पर भी नकारात्मक प्रभाव होता है। जो मेरे पास क्या है, उसी विश्वास से जाता है, तो कुछ भी आ जाये, वो निपट लेता है। इस बात को मुझसे भी अच्छी तरह अगर कोई कह सकता है, तो checkmate करने में जिनकी मास्टरी है और दुनिया के अच्छों-अच्छों को जिसने checkmate कर दिया है, ऐसे Chess के champ।on विश्वनाथन आनंद, वो अपने अनुभव बतायेंगे। आइये, इस exam में आप checkmate करने का तरीका उन्हीं से सीख लीजिए: -

“Hello, this is Viswanathan Anand. First of all, let me start off by wishing you all the best for your exams. I will next talk a little bit about how I went to my exams and my experiences for that. I found that exams are very much like problems you face later in life. You need to be well rested, get a good night’s sleep, you need to be on a full stomach, you should definitely not be hungry and the most important thing is to stay calm. It is very very similar to a game of Chess. When you play, you don’t know, which pawn will appear, just like in a class you don’t know, which question will appear in an exam. So if you stay calm and you are well nourished and have slept well, then you will find that your brain recalls the right answer at the right moment. So stay calm. It is very important not to put too much pressure on yourself, don’t keep your expectations too high. Just see it as a challenge – do I remember what I was taught during the year, can I solve these problems. At the last minute, just go over the most important things and the things you feel, the topics you feel, you don’t remember very well. You may also recall some incidents with the teacher or the students, while you are writing an exam and this will help you recall a lot of subject matter. If you revise the questions you find difficult, you will find that they are fresh in your head and when you are writing the exam, you will be able to deal with them much better. So stay calm, get a good night’s sleep, don’t be over-confident but don’t be pessimistic either. I have always found that these exams go much better than you fear before. So stay confident and all the very best to you.”

विश्वनाथन आनंद ने सचमुच में बहुत ही महत्वपूर्ण बात बताई है और आपने भी जब उनको अन्तर्राष्ट्रीय Chess के गेम में देखा होगा, कितनी स्वस्थता से वो बैठे होते हैं और कितने ध्यानस्थ होते हैं। आपने देखा होगा, उनकी आँखें भी इधर-उधर नहीं जाती हैं। कभी हम सुनते थे न, अर्जुन के जीवन की घटना कि पक्षी की आँख पर कैसे उनकी नज़र रहती थी। बिलकुल वैसे ही विश्वनाथन को जब खेलते हुए देखते हैं, तो बिलकुल उनकी आँखें एकदम से बड़ी target पर fix रहती हैं और वो भीतर की शांति की अभिव्यक्ति होती है। ये बात सही है कि कोई कह दे, इसलिये फिर भीतर की शांति आ ही जायेगी, ये तो कहना कठिन है। लेकिन कोशिश करनी चाहिये! हँसते-हँसते क्यों न करें! आप देखिये, आप हँसते रहेंगे, खिलखिलाहट हँसते रहेंगे exam के दिन भी, अपने-आप शांति आना शुरू हो जाएगी। आप दोस्तों से बात नहीं कर रहे हैं या अकेले चल रहे हैं, मुरझाए-मुरझाए चल रहे हैं, ढेर सारी किताबों को last moment भी हिला रहे हैं, तो-तो फिर वो शांत मन हो नहीं सकता है। हँसिए, बहुत हँसते चलिए, साथियों के साथ चुटकले share करते चलिए, आप देखिए, अपने-आप शांति का माहौल खड़ा हो जाएगा।

मैं आपको एक बात छोटी सी समझाना चाहता हूँ। आप कल्पना कीजिये कि एक तालाब के किनारे पर आप खड़े हैं और नीचे बहुत बढ़िया चीज़ें दिखती हैं। लेकिन अचानक कोई पत्थर मार दे पानी में और पानी हिलना शुरू हो जाए, तो नीचे जो बढ़िया दिखता था, वो दिखता है क्या? अगर पानी शांत है, तो चीज़ें कितनी ही गहरी क्यों न हों, दिखाई देती हैं। लेकिन पानी अगर अशांत है, तो नीचे कुछ नहीं दिखता है। आपके भीतर बहुत-कुछ पड़ा हुआ है। साल भर की मेहनत का भण्डार भरा पड़ा है। लेकिन अशांत मन होगा, तो वो खज़ाना आप ही नहीं खोज पाओगे। अगर शांत मन रहा, तो वो आपका खज़ाना बिलकुल उभर करके आपके सामने आएगा और आपकी exam एकदम सरल हो जायेगी।

मैं एक बात बताऊं मेरी अपनी – मैं कभी-कभी कोई लेक्चर सुनने जाता हूँ या मुझे सरकार में भी कुछ विषय ऐसे होते हैं, जो मैं नहीं जानता हूँ और मुझे काफी concentrate करना पड़ता है। तो कभी-कभी ज्यादा concentrate करके समझने की कोशिश करता हूँ, तो एक भीतर तनाव महसूस करता हूँ। फिर मुझे लगता है, नहीं-नहीं, थोड़ा relax कर जाऊँगा, तो मुझे अच्छा रहेगा। तो मैंने अपने-आप अपनी technique develop की है। बहुत deep breathing कर लेता हूँ। गहरी साँस लेता हूँ। तीन बार-पांच बार गहरी साँस लेता हूँ, समय तो 30 सेकिंड, 40 सेकिंड, 50 सेकिंड जाता है, लेकिन फिर मेरा मन एकदम से शांत हो करके चीज़ों को समझने के लिए तैयार हो जाता है। हो सकता है, ये मेरा अनुभव हो, आपको भी काम आ सकता है।

रजत अग्रवाल ने एक अच्छी बात बतायी है। वो मेरी App पर लिखते हैं - हम हर दिन कम-से-कम आधा घंटे दोस्तों के साथ, परिवारजनों के साथ relax feel करें। गप्पें मारें। ये बड़ी महत्वपूर्ण बात रजत जी ने बताई है, क्योंकि ज्यादातर हम देखते हैं कि हम जब exam दे करके आते हैं, तो गिनने के लिए बैठ जाते हैं, कितने सही किया, कितना गलत किया। अगर घर में माँ-बाप भी पढ़े लिखे हों और उसमें भी अगर माँ-बाप भी टीचर हों, तो-तो फिर पूरा पेपर फिर से लिखवाते हैं – बताओ, तुमने क्या लिखा, क्या हुआ! सारा जोड़ लगाते हैं, देखो, तुम्हें 40 आएगा कि 80 आएगा, 90 आएगा! आपका दिमाग जो exam हो गयी, उसमें खपा रहता है। आप भी क्या करते हैं, दोस्तों से फ़ोन पर share करते हैं, अरे यार, उसमें तुमने क्या लिखा! अरे यार, उसमें तुम्हारा कैसा गया! अच्छा, तुम्हें क्या लगा। यार, मेरी तो गड़बड़ हो गयी। यार, मैंने तो गलती कर दी। अरे यार, मुझे ये तो मालूम था, लेकिन मुझे याद नहीं आया। हम उसी में फँस जाते हैं। दोस्तो, ये मत कीजिये। exam के समय हो गया, सो हो गया। परिवार के साथ और विषयों पर गप्पें मारिए। पुरानी हँसी-खुशी की यादें ताज़ा कीजिए। कभी माँ-बाप के साथ कहीं गये हों, तो वहाँ के दृश्यों को याद करिए। बिलकुल उनसे निकल करके ही आधा घंटा बिताइए। रजत जी की बात सचमुच में समझने जैसी है।

दोस्तो, मैं क्या आपको शांति की बात बताऊँ। आज आपको exam देने से पहले एक ऐसे व्यक्ति ने आपके लिए सन्देश भेजा है, वे मूलतः शिक्षक हैं और आज एक प्रकार से संस्कार शिक्षक बने हुए हैं। रामचरितमानस, वर्तमान सन्दर्भ में उसकी व्याख्या करते-करते वो देश और दुनिया में इस संस्कार सरिता को पहुँचाने का प्रयास कर रहे हैं। ऐसे पूज्य मुरारी बापू ने भी विद्यार्थियों के लिए बड़ी महत्वपूर्ण tip भेजी है और वे तो शिक्षक भी हैं, चिन्तक भी हैं और इसलिए उनकी बातों में दोनों का मेल है: -

“मैं मुरारी बापू बोल रहा हूँ। मैं विद्यार्थी भाइयों-बहनों को यही कहना चाहता हूँ कि परीक्षा के समय में मन पर कोई भी बोझ रखे बिना और बुद्धि का एक स्पष्ट निर्णय करके और चित को एकाग्र करके आप परीक्षा में बैठिये और जो स्थिति आई है, उसको स्वीकार कर लीजिए। मेरा अनुभव है कि परिस्थिति को स्वीकार करने से बहुत हम प्रसन्न रह सकते हैं और खुश रह सकते हैं। आपकी परीक्षा में आप निर्भार और प्रसन्नचित्त आगे बढ़ें, तो ज़रूर सफलता मिलेगी और यदि सफलता न भी मिली, तो भी fail होने की ग्लानि नहीं होगी और सफल होने का गर्व भी होगा। एक शेर कह कर मैं मेरा सन्देश और शुभकामना देता हूँ – लाज़िम नहीं कि हर कोई हो कामयाब ही, जीना भी सीखिए नाकामियों के साथ। हमारे आदरणीय प्रधानमंत्री का ये जो ‘मन की बात’ का कार्यक्रम है, उसको मैं बहुत आवकार देता हूँ। सबके लिए मेरी बहुत-बहुत शुभकामना। धन्यवाद।”

पूज्य मुरारी बापू का मैं भी आभारी हूँ कि उन्होंने बहुत अच्छा सन्देश हम सबको दिया। दोस्तो, आज एक और बात बताना चाहता हूँ। मैं देख रहा हूँ कि इस बार जो मुझे लोगों ने जो अपने अनुभव बताये हैं, उसमें योग की चर्चा अवश्य की है। और ये मेरे लिए खुशी की बात है कि इन दिनों मैं दुनिया में जिस किसी से मिलता हूँ, थोड़ा-सा भी समय क्यों न मिले, योग की थोड़ी सी बात तो कोई न कोई करता ही करता है। दुनिया के किसी भी देश का व्यक्ति क्यों न हो, भारत का कोई व्यक्ति क्यों न हो, तो मुझे अच्छा लगता है कि योग के संबंध में इतना आकर्षण पैदा हुआ है, इतनी जिज्ञासा पैदा हुई है और देखिये, कितने लोगों ने मुझे मेरे मोबाइल App पर, श्री अतनु मंडल, श्री कुणाल गुप्ता, श्री सुशांत कुमार, श्री के. जी. आनंद, श्री अभिजीत कुलकर्णी, न जाने अनगिनत लोगों ने meditation की बात की है, योग पर बल दिया है। खैर दोस्तो, मैं बिलकुल ही आज ही कह दूँ, कल सुबह से योग करना शुरू करो, वो तो आपके साथ अन्याय होगा। लेकिन जो योग करते हैं, वो कम से कम exam है इसलिए आज न करें, ऐसा न करें। करते हैं तो करिये। लेकिन ये बात सही है कि विद्यार्थी जीवन में हो या जीवन का उत्तरार्द्ध हो, अंतर्मन की विकास यात्रा में योग एक बहुत बड़ी चाभी है। सरल से सरल चाभी है। आप ज़रूर उस पर ध्यान दीजिए। हाँ, अगर आप अपने नजदीक में कोई योग के जानकार होंगे, उनको पूछोगे तो exam के दिनों में पहले योग नहीं किया होगा, तो भी दो-चार चीज़ें तो ऐसे बता देंगे, जो आप दो-चार-पाँच मिनट में कर सकते हैं। देखिये, अगर आप कर सकते हैं तो! हाँ, मेरा उसमें विश्वास बहुत है।

मेरे नौजवान साथियो, आपको परीक्षा हॉल में जाने की बड़ी जल्दी होती है। जल्दी-जल्दी पर अपने bench पर बैठ जाने का मन करता है? क्या ये चीज़ें हड़बड़ी में क्यों करें? अपना पूरे दिन का समय का ऐसा प्रबंधन क्यों न करें कि कहीं ट्रैफिक में रुक जाएँ, तो भी समय पर हम पहुँच ही जाएँ। वर्ना ऐसी चीज़ें एक नया तनाव पैदा करती हैं। और एक बात है, हमें जितना समय मिला है, उसमें जो प्रश्नपत्र है, जो instructions हैं, हमें कभी-कभी लगता है कि ये हमारा समय खा जाएगा। ऐसा नहीं है दोस्तो। आप उन instructions को बारीकी से पढ़िए। दो मिनट-तीन मिनट-पाँच मिनट जाएगी, कोई नुकसान नहीं होगा। लेकिन उससे exam में क्या करना है, उसमें कोई गड़बड़ नहीं होगी और बाद में पछतावा नहीं होगा और मैंने देखा है कि कभी-कभार पेपर आने के बाद भी pattern नयी आयी है, ऐसा पता चलता है, लेकिन पढ़ लेते हैं instructions, तो शायद हम अपने आपको बराबर cope-up कर लेते हैं कि हाँ, ठीक है, चलो, मुझे ऐसे ही जाना है। और मैं आपसे आग्रह करूँगा कि भले आपके पाँच मिनट इसमें जाएँ, लेकिन इसको ज़रूर करें।

श्रीमान यश नागर, उन्होंने हमारे मोबाइल App पर लिखा है कि जब उन्होनें पहली बार पेपर पढ़ा, तो उन्हें ये काफी कठिन लगा। लेकिन उसी पेपर को दोबारा आत्मविश्वास के साथ, अब यही पेपर मेरे पास है, कोई नये प्रश्न आने वाले नहीं हैं, मुझे इतने ही प्रश्नों से निपटना है और जब दोबारा मैं सोचने लगा, तो उन्होंने लिखा है कि मैं इतनी आसानी से इस पेपर को समझ गया, पहली बार पढ़ा तो लगा कि ये तो मुझे नहीं आता है, लेकिन वही चीज़ दोबारा पढ़ा, तो मुझे ध्यान में आया कि नहीं-नहीं सवाल दूसरे तरीक़े से रखा गया है, लेकिन ये तो वही बात है, जो मैं जानता हूँ। प्रश्नों को समझना ये बहुत आवश्यक होता है। प्रश्नों को न समझने से कभी-कभी प्रश्न कठिन लगता है। मैं यश नागर की इस बात पर बल देता हूँ कि आप प्रश्नों को दो बार पढ़ें, तीन बार पढ़ें, चार बार पढ़ें और आप जो जानते हैं, उसके साथ उसको match करने का प्रयास करें। आप देखिये, वो प्रश्न लिखने से पहले ही सरल हो जाएगा।

मेरे लिए आज खुशी की बात है कि भारतरत्न और हमारे बहुत ही सम्मानित वैज्ञानिक सी.एन.आर. राव, उन्होंने धैर्य पर बल दिया है। बहुत ही कम शब्दों में लेकिन बहुत ही अच्छा सन्देश हम सभी विद्यार्थियों को उन्होंने दिया है। आइये, राव साहब का message सुनें:-

“This is C.N.R. Rao from Bangalore. I fully realise that the examinations cause anxiety. That too competitive examinations. Do not worry, do your best. That’s what I tell all my young friends. At the same time remember, that there are many opportunities in this country. Decide what you want to do in life and don’t give it up. You will succeed. Do not forget that you are a child of the universe. You have a right to be here like the trees and the mountains. All you need is doggedness, dedication and tenacity. With these qualities you will succeed in all examinations and all other endeavours. I wish you luck in everything you want to do. God Bless.”

देखा, एक वैज्ञानिक का बात करने का तरीका कैसा होता है। जो बात कहने में मैं आधा घंटा लगाता हूँ, वो बात वो तीन मिनट में कह देते हैं। यही तो विज्ञान की ताकत है और यही तो वैज्ञानिक मन की ताकत है। मैं राव साहब का बहुत आभारी हूँ कि उन्होंने देश के बच्चों को प्रेरित किया। उन्होंने जो बात कही है – दृढ़ता की, निष्ठा की, तप की, यही बात है – dedication, determination, diligence. डटे रहो, दोस्तो, डटे रहो। अगर आप डटे रहोगे, तो डर भी डरता रहेगा। और अच्छा करने के लिए सुनहरा भविष्य आपका इन्तजार कर रहा है।

अब मेरे App पर एक सन्देश रुचिका डाबस ने अपने exam experience को share किया है। उन्होंने कहा कि उनके परिवार में exam के समय एक positive atmosphere बनाने का लगातार प्रयास होता है और ये चर्चा उनके साथी परिवारों में भी होती थी। सब मिला करके positive वातावरण। ये बात सही है, जैसा सचिन जी ने भी कहा, positive approach, positive frame of mind positive energy को उजागर करता है।

कभी-कभी बहुत सी बातें ऐसी होती हैं कि जो हमें प्रेरणा देती हैं, और ये मत सोचिए कि ये सब विद्यार्थियों को ही प्रेरणा देती हैं। जीवन के किसी भी पड़ाव पर आप क्यों न हों, उत्तम उदाहरण, सत्य घटनाएँ बहुत बड़ी प्रेरणा भी देती हैं, बहुत बड़ी ताकत भी देती हैं और संकट के समय नया रास्ता भी बना देती हैं। हम सब electricity bulb के आविष्कारक थॉमस एलवा एडिसन, हमारे syllabus में उसके विषय में पढ़ते हैं। लेकिन दोस्तो, कभी ये सोचा है, कितने सालों तक उन्होंने इस काम को करने के लिए खपा दिए। कितनी बार विफलताएँ मिली, कितना समय गया, कितने पैसे गए। विफलता मिलने पर कितनी निराशा आयी होगी। लेकिन आज उस electricity, वो bulb हम लोगों की ज़िंदगी को भी तो रोशन करता है। इसी को तो कहते हैं, विफलता में भी सफलता की संभावनायें निहित होती हैं।

श्रीनिवास रामानुजन को कौन नहीं जानता है। आधुनिक काल के महानतम गणित विचारकों में से एक नाम –Indian Mathematician. आपको पता होगा, उनका formal कोई education mathematics में नहीं हुआ था, कोई विशेष प्रशिक्षण भी नहीं हुआ था, लेकिन उन्होंने Mathematical analysis, number theory जैसे विभिन्न क्षेत्रों में गहन योगदान किया। अत्यंत कष्ट भरा जीवन, दुःख भरा जीवन, उसके बावज़ूद भी वो दुनिया को बहुत-कुछ दे करके गए।

जे. के. रॉलिंग एक बेहतरीन उदाहरण हैं कि सफलता कभी भी किसी को भी मिल सकती है। हैरी पॉटर series आज दुनिया भर में लोकप्रिय है। लेकिन शुरू से ऐसा नहीं था। कितनी समस्या उनको झेलनी पड़ी थी। कितनी विफलताएँ आई थीं। रॉलिंग ने खुद कहा था कि मुश्किलों में वो सारी ऊर्जा उस काम में लगाती थीं, जो वाकई उनके लिए मायने रखता था।

Exam आजकल सिर्फ़ विद्यार्थी की नहीं, पूरे परिवार की और पूरे स्कूल की, teacher की सबकी हो जाती है। लेकिन parents और teachers के support system के बिना अकेला विद्यार्थी, स्थिति अच्छी नहीं है। teacher हो, parents हों, even senior students हों, ये सब मिला करके हम एक टीम बनके, unit बनके समान सोच के साथ, योजनाबद्ध तरीक़े से आगे बढ़ें, तो परीक्षा सरल हो जाती है।

श्रीमान केशव वैष्णव ने मुझे App पर लिखा है, उन्होंने शिकायत की है कि parents ने अपने बच्चों पर अधिक marks मांगने के लिए कभी भी दबाव नहीं बनाना चाहिये। सिर्फ़ तैयारी करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिये। वो relax रहे, इसकी चिंता करनी चाहिये।

विजय जिंदल लिखते हैं, बच्चों पर उनसे अपनी उम्मीदों का बोझ न डालें। जितना हो सके, उनका हौसला बढ़ायें। विश्वास बनाये रखने में सहायता करें। ये बात सही है। मैं आज parents को अधिक कहना नहीं चाहता हूँ। कृपा करके दबाव मत बनाइये। अगर वो अपने किसी दोस्त से बात कर रहा है, तो रोकिये मत। एक हल्का-फुल्का वातावरण बनाइए, सकारात्मक वातावरण बनाइए। देखिये, आपका बेटा हो या बेटी कितना confidence आ जायेगा। आपको भी वो confidence नज़र आयेगा।

दोस्तो, एक बात निश्चित है, ख़ास करके मैं युवा मित्रों से कहना चाहता हूँ | हम लोगों का जीवन, हमारी पुरानी पीढ़ियों से बहुत बदल चुका है। हर पल नया innovation, नई टेक्नोलॉजी, विज्ञान के नित नए रंग-रूप देखने को मिल रहे हैं और हम सिर्फ अभिभूत हो रहे हैं, ऐसा नहीं है। हम उससे जुड़ने का पसंद करते हैं। हम भी विज्ञान की रफ़्तार से आगे बढ़ना चाहते हैं।

मैं ये बात इसलिए कर रहा हूँ, दोस्तो कि आज National Science Day है। National Science Day, देश का विज्ञान महोत्सव हर वर्ष 28 फरवरी हम इस रूप में मनाते हैं। 28 फरवरी, 1928 सर सी.वी. रमन ने अपनी खोज ‘रमन इफ़ेक्ट’ की घोषणा की थी। यही तो खोज थी, जिसमें उनको नोबेल पुरस्कार प्राप्त हुआ और इसलिए देश 28 फरवरी को National Science Day के रूप में मनाता है। जिज्ञासा विज्ञान की जननी है। हर मन में वैज्ञानिक सोच हो, विज्ञान के प्रति आकर्षण हो और हर पीढ़ी को innovation पर बल देना होता है और विज्ञान और टेक्नोलॉजी के बिना innovation संभव नहीं होते हैं। आज National Science Day पर देश में innovation पर बल मिले। ज्ञान, विज्ञान, टेक्नोलॉजी ये सारी बातें हमारी विकास यात्रा के सहज हिस्से बनने चाहिए और इस बार National Science Day का theme है ‘Make in India Science and Technology Driven innovations'. सर सी.वी. रमन को मैं नमन करता हूँ और आप सबको विज्ञान के प्रति रुचि बढ़ाने के लिए आग्रह कर रहा हूँ।

दोस्तो, कभी-कभी सफलताएँ बहुत देर से मिलती हैं और सफलता जब मिलती है, तब दुनिया को देखने का नज़रिया भी बदल जाता है। आप exam में शायद बहुत busy रहे होंगे, तो शायद हो सकता है, बहुत सी ख़बरे आपके मन में register न हुई हों। लेकिन मैं देशवासियो को भी इस बात को दोहराना चाहता हूँ। आपने पिछले दिनों में सुना होगा कि विज्ञान के विश्व में एक बहुत बड़ी और महत्वपूर्ण ख़ोज हुई है। विश्व के वैज्ञानिकों ने परिश्रम किया, पीढ़ियाँ आती गईं, कुछ-न-कुछ करती गईं और क़रीब-क़रीब 100 साल के बाद एक सफलता हाथ लगी। ‘Gravitational Waves’ हमारे वैज्ञानिको के पुरुषार्थ से, उसे उजागर किया गया, detect किया गया। ये विज्ञान की बहुत दूरगामी सफलता है। ये खोज न केवल पिछली सदी के हमारे महान वैज्ञानिक आइन्स्टाइन की theory को प्रमाणित करती है, बल्कि Physics के लिए महान discovery मानी जाती है। ये पूरी मानव-जाति को पूरे विश्व के काम आने वाली बात है, लेकिन एक भारतीय के नाते हम सब को इस बात की खुशी है कि सारी खोज की प्रक्रिया में हमारे देश के सपूत, हमारे देश के होनहार वैज्ञानिक भी उससे जुड़े हुये थे। उनका भी योगदान है। मैं उन सभी वैज्ञानिकों को आज ह्रदय से बधाई देना चाहता हूँ, अभिनन्दन करना चाहता हूँ। भविष्य में भी इस ख़ोज को आगे बढ़ाने में हमारे वैज्ञानिक प्रयासरत रहेंगे। अन्तर्राष्ट्रीय प्रयासों में भारत भी हिस्सेदार बनेगा और मेरे देशवासियो, पिछले दिनों में एक महत्वपूर्ण निर्णय किया है। इसी खोज में और अधिक सफ़लता पाने के लिए Laser Interferometer Gravitational-Wave Observatory, short में उसको कहते हैं ‘LIGO’, भारत में खोलने का सरकार ने निर्णय लिया है। दुनिया में दो स्थान पर इस प्रकार की व्यवस्था है, भारत तीसरा है। भारत के जुड़ने से इस प्रक्रिया को और नई ताक़त मिलेगी, और नई गति मिलेगी। भारत ज़रूर अपने मर्यादित संसाधनों के बीच भी मानव कल्याण की इस महत्तम वैज्ञानिक ख़ोज की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदार बनेगा। मैं फिर एक बार सभी वैज्ञानिकों को बधाई देता हूँ, शुभकामनायें देता हूँ।

मेरे प्यारे देशवासियो, मैं एक नंबर लिखवाता हूँ आपको, कल से आप missed call करके इस नंबर से मेरी ‘मन की बात’ सुन सकते हैं, आपकी अपनी मातृभाषा में भी सुन सकते हैं। missed call करने के लिए नंबर है – 81908-81908. मैं दोबारा कहता हूँ 81908-81908.

दोस्तो, आपकी exam शुरू हो रही है। मुझे भी कल exam देनी है। सवा-सौ करोड़ देशवासी मेरी examination लेने वाले हैं। पता है न, अरे भई, कल बजट है! 29 फरवरी, ये Leap Year होता है। लेकिन हाँ, आपने देखा होगा, मुझे सुनते ही लगा होगा, मैं कितना स्वस्थ हूँ, कितना आत्मविश्वास से भरा हुआ हूँ। बस, कल मेरी exam हो जाये, परसों आपकी शुरू हो जाये। और हम सब सफल हों, तो देश भी सफल होगा।

तो दोस्तो, आपको भी बहुत-बहुत शुभकामनायें, ढेर सारी शुभकामनायें। सफलता-विफलता के तनाव से मुक्त हो करके, मुक्त मन से आगे बढ़िये, डटे रहिये। धन्यवाद!

Sunday, 21 February 2016

Through National Rurban Mission, we want to combine the spirit of a village & facilities associated with cities: PM Modi

मेरे प्‍यारे भाइयो बहनों, आज मैं सुबह नया रायपुर में था। नया रायपुर में जब भी आता हूं कई नई चीजें देखने को मिलती हैं। लगता है दिन में जितना नया रायपुर बढ़ता है उससे ज्‍यादा रात में बढ़ता है। आज मैंने नया रायपुर में शहरों में जो गरीब होते हैं, उन गरीबों के आवास की योजना का शिलान्‍यास किया। और अभी मैं आपके बीच आया हूं। कार्यक्रम तो इन मेरे आदिवासी भाई-बहनों के बीच में है, जो दिल्‍ली से बहुत दूर है। राजनंद गांव के एक इलाके की छोटी सी जगह पर है। लेकिन कार्यक्रम बहुत बड़ा है और पूरे हिंदुस्‍तान के लिए है।

 पहले सरकार को आदत थी, कि जो कुछ भी करना है वो दिल्‍ली में से ही करना है। विज्ञान भवन में दो सौ-चार सौ लोग आ जाएं, दीप जलाएं, मीडिया वालों की मित्रता काम आ जाए, टीवी पर 24 घंटे पता चल जाए कि इतना बड़ा काम हो गया है। मैंने सरकार को दिल्‍ली से बाहर निकाल करके जन-जन के बीच में लाकर खड़ा कर दिया है। आदिवासियों के बीच में लाया हूं, किसानों के बीच में लाया हूं, गांव के बीच में लाया हूं। सरकार के अधिकारियों की फौज गांव के बीच में जाने लग गई है और विकास की एक नई दिशा चल पड़ी है। और इसलिए आज इस छोटे से स्‍थान पर इतने लाखों लोगों का जनसागर, मैं हैरान हूं इतनी बड़ी संख्या में लोग, जहां भी मेरी नजर पहुंची है, लोग ही लोग नजर आते हैं। मैं उधर पहाड़ी पर नजर कर रहा हूं पहाड़ी में भी जैसे जान आ गई है, पत्‍थर नहीं लोग नजर आ रहे हैं। क्‍या अद्भुत दृश्‍य देख रहा हूं मैं। मेरे प्‍यारे भाइयो-बहनों ये जनता-जनार्दन के आर्शीवाद इस देश को नई ऊंचाई पर पहुंचाएंगे। ये मेरा विश्‍वास हर दिन पक्‍का होता जाता है। हर दिन नया विश्‍वास पैदा होता है। ऐसा प्‍यार जो आप लोग दे रहे हैं, उससे मुझे आपके लिए ज्‍यादा दौड़ने की ताकत मिलती है, ज्‍यादा मेहनत करने की ताकत मिलती है, पसीना बहाने की प्रेरणा मिलती है।

आज मुझे यहां 104 साल की उम्र की मां कुंवरबाई का आर्शीवाद प्राप्‍त करने का सौभाग्‍य मिला। जो लोग अपने-आप को नौजवान मानते हैं, वो जरा तय करें क्‍या उनकी सोच भी जवान है क्‍या? मैं ये इसलिए कह रहा हूं कि 104 साल की मां कुंवरबाई न टीवी देखती है न अखबार पढ़ती है न वो पढ़ी-लिखी मां है, दूर-सुदूर गांव में रहती है, और उसको पता चला कि देश के प्रधानमंत्री कहते हैं कि शौचालय बनाओ। बस इस मां के कान में पड़ गया, उसने अपनी बकरियां बेच दीं और शौचालय बना दिया। 104 साल की मां के मन में विचार, ये ही हिंदुस्‍तान के बदलाव का संकेत दे रहा है। देश बदल रहा है, इसका सबूत दूर-सुदूर गांव में बैठी हुई मेरी एक आदिवासी 104 साल की मां जब शौचालय बनाने का संकल्‍प करे, और संकल्‍प करे इतना ही नहीं, पूरे गांव वालों को शौचालय बनाने के लिए मजबूर करे, इतना ही नहीं, गांव में अब कोई भी व्‍यक्ति खुले में शौचालय नहीं जाएगा ये पक्‍का करवा ले, इससे बड़ी प्ररेणा क्‍या हो सकती है। मैं आज देशवासियों को कहता हूं, मैं मीडिया वालों से भी प्रार्थना करता हूं, कि मेरा ये भाषण नहीं दिखाओगे तो चलेगा, लेकिन मेरी ये मां कुवरबाई की बात जरूर देश को बताना। ये ही तो बातें हैं जो समाज की ताकत बनती हैं। और आज मुझे मां कुंवरबाई का स्‍वागत करने का सम्‍मान करने का अवसर मिला।

मुझे आज यहां के आदिवासी क्षेत्र के दो विकास खंडों के सेवाभावी नौजवान माताएं, बहनों और भाइयों का सम्‍मान करने का अवसर मिला। अम्‍बागढ़ चौकी और छुरिया इस दो ब्लॉक, सामाजिक जागरुकता से, ये जागरुक नागरिकों के अथक प्रयास से ये दो ब्लॉक open Defection free हो गए हैं। ये दो ब्लॉक खुले में शौचलाय जाना वहां बंद हो गया और हर किसी ने शौचालय बना लिया। स्वचछ्ता, ये छोटी बात नहीं है। हिंदुस्तान के कोने-कोने में जन-जन के मन-मन में शौचालय स्वभाव बनाना है, शौचालय, स्वच्छता, बीमारी से मुक्ति, स्वस्थ भारत, सशक्त भारत इस सपनों को पूरा करने के लिए अगर कोई पहली कोई महत्वपूर्ण पंक्ति, कदम है तो वो स्वच्छता है। आज मुझे उनका सम्मान करने का अवसर मिला है। अम्बागढ़ चौकी ब्लॉक के ग्रामीण लोगों को मैं विशेषकर बधाई देता हूं। कभी-कभी देश का प्रधानमंत्री भी टैक्स लगाने से डरता है, उसको चिंता रहती है कि अरे ये करुंगा तो क्या होगा। लेकिन अम्बागढ़ चौकी के नागरिकों को मैं सलाम करता हूं कि उन्होंने खुले में कोई शौच जाए दंड करने का प्रावधान किया है और दंड करते हैं। ये बहुत बड़ी हिम्मत की बात है। समाज के लिए निर्णय़ कडवा हो तो भी करने की ताकत इन अम्बागढ़ चौकी के मेरे आदिवासी भाइयों ने आज हमें सिखाया है। उन्होंने open Defection free, खुले में शौच जाने की सदियों पुरानी आदत से लोगों को मुक्ति दिलाई है और ये जब आप खुले में शौच जाने वाला बंद कराते हैं तो वो सबसे पहले माताओं-बहनों के सम्मान का काम होता है। आज मजबूरन उनको खुले में, जंगलों में शौच के लिए जाना पड़ता है। अगर हम हमारी माताओं-बहनों को इस मुसीबत से मुक्त करा दें तो देश की कोटि-कोटि माताओं-बहनों का आशीर्वाद ये भारत को एक महान शक्तिशाली देश बना देगा और उस काम को यहां के हमारे आदिवासी भाईयों-बहनों ने करके दिखाया है, 104 वर्ष की मां ने करके दिखाया है। इससे बड़ा सफलता का मार्ग क्या हो सकता है। मैं इन सभी को सार्वजनिक रूप से सर झुका करके नमन करता हूं, मैं उनका बहुत-बहुत वंदन करता हूं, उनका हृदय से अभिंनंदन करता हूं।

आज यहां एक योजना का और भी आरंभ हुआ, जन औषधि भंडार। गरीब व्यक्ति को, परिवार मेहनत करके गुजारा करता हो, सोचता हो 5 साल के बाद ये करेंगे, 10 साल के बाद ये करेंगे। कभी सोचता हो साईकिल लाएंगे, कभी सोचता हो बच्चों के लिए कोई अच्छे से कपड़े ले आएंगे लेकिन परिवार में अगर एक व्यक्ति को बीमारी आ जाए तो गरीब के लिए तो 10 साल का पूरा planning गड्ढे में चला जाता है, आर्थिक बोझ बन जाता है, कर्जदार बन जाता है। गरीब को सस्ती दवाई मिले, गरीब को दवाई के बिना मरने की नौबत न आए इसलिए पूरे देश में जन औषधि भंडारों को अभियान चलाया है। आज मैं छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री और उनकी पूरी टीम को बधाई देता हूं कि आज जन औषधि भंडार खोलने का आज मेरे हाथों से, मुझे करने का उन्होंने अवसर दिया, मैं इसके लिए उनका बहुत आभारी हूं।
आज Rurban Mission इसको हम प्रारंभ कर रहे हैं। कुछ लोग कहते हैं Smart City तो Smart Village क्यों नहीं, ये जो Rurban Mission है ना, वही Smart Village है। हमारे चौधरी साहब, हमारे मंत्री हैं उस विभाग के, वे अभी विस्तार से बता रहे थे। ये बात सही है कि हमारे शहरों की ओर जाना बहुत तेजी से बढ़ रहा है। लोग अपने बेटों को शहरों में भेज रहे हैं, बूढ़े मां-बाप गांव में रहते हैं, नौजवान शहरों में चले जा रहे हैं, उनको एक अच्छी जिंदगी जीनी है, एक quality of life, जहां अच्छी शिक्षा हो, अच्छी अस्पताल हो, बिजली आती हो, Internet चलता हो, कहीं शाम को परिवार से साथ पलभर घूमने-फिरने जाना हो तो अच्छी जगह हो, ये उसके मन में रहता है और इसलिए वो शहर की ओर चल पड़ता है लेकिन शहरों के हाल हम देख रहे हैं कि वहां पर झुग्गी-झोंपड़ियां बढ़ती चली जाती हैं। शहरों का विकास, पिछले कई वर्षों से लोग आते गए और शहर को बढ़ाते गए। शहर में बैठे हुए लोगों ने या राज्य सरकार चलाने वाले लोगों ने, ये लोग आएंगे तो कहां रहेंगे, उनको पानी कहां से पहुंचेगा, बिजली कहां से मिलेगी, उनका drainage का क्या होगा, उनको दैनिक जीवन क्रियाएं करनी हैं तो कहां करेंगे, कोई सोचता नहीं, लोग आते हैं। कभी एक लाख जनसंख्या होगी, थोड़े समय में डेढ़ लाख हो जाएगी, फिर दो लाख हो जाएगी, फिर तीन लाख हो जाएगी और व्यवस्था वैसी की वैसी रहेगी। पानी का टंका वही रहेगा जो पहले एक लाख लोगों के लिए था। अब पांच लाख लोगों को पानी कहां से पहुंचेगा और इसलिए पिछले कई वर्षों से पूर्वानुमान लगाकर के, विकास का नक्शा तैयार करके कि अगर शहर बढ़ेगा तो इस तरफ बढ़ाएंगे, मकान नए बनाने हैं तो इस तरफ बनाएंगे, Planning ऐसा करेंगे, ये सोचा नहीं गया। और सोचा गया है तो बहुत कम जगह पर सोचा गया और उसके कारण शहरों में जाना भी लोगों के लिए दुष्कर हो गया है। इसका उपाय क्या है, क्या लोगों को उनके नसीब पर छोड़ दिया जाए, झुग्गी-झोंपड़ी में जीने के लिए मजबूर किया जाए जी नहीं, इसका उपाय सोचना चाहिए और इस सरकार ने सोचा है और उसी में से ये Rurban Mission बना है। Rurban का सीधा-सीधा अर्थ है Rural-Urban दोनों को मिला दिया Rurban, ग्रामीण और शहरी दोनों को एक साथ मिला दिया वो है Rurban, जिसका मतलब है कि विकास ऐसा हो, जिसकी आत्मा गांव की हो और सुविधा शहर की हो, ऐसा गांव। अगर हम देखते हैं कुछ 5-7 गांवों के बीच में एकाध गांव होता है। जहां पर लोग कुछ खरीदी करने आते हैं, कुछ छोटी-मोटी चीज खरीदने आते हैं लेकिन वो गांव ही होता है। इस सरकार ने सोचा क्या देश में ऐसे जो गांव हैं, जिसके अगल-बगल में 5-7 गांव होते हैं और ये गांव धीरे-धीरे बढ़ रहा है क्या वो शहर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, अपने आप बढ़ रहा है, लोग धीरे-धीरे वहां आने लगे। पढ़ने के लिए आ गए, व्यापार करने के लिए आए, नौकरी करने के लिए आए हैं। पहले 10 हजार संख्या थी, देखते ही देखते 20 हजार संख्या हो गई, देखते ही देखते 25 हजार हो गई। क्या अभी से ऐसे जो अभी से तेज गति से बढ़ रहे हैं, ऐसे गांवों को केंद्रित करके, अगल-बगले के 5-7 गावों को जोड़कर के, 25,30,40 हजार की जनसंख्या की सुविधा के लिए एक Cluster Approach से ये Rurban Mission को लागू किया जा सकता है। पूरे देश में ऐसे 300 Rurban Center ख़ड़े करने की कामना से अभी काम प्रारंभ किया है। इस वर्ष 100 ऐसे Rurban Cluster खड़े करने की कल्पना है। जिसका विकास शहर बनने वाला है, वो ध्यान में रखा जाएगा लेकिन उसके अंदर का जो गांव है, दिल में जो गांव का भाव है, उसको जिंदा रखने के लिए पूरा प्रयास होगा। एक ऐसी रचना जो भारत के स्वभाव के साथ जुड़ती है, भारत की प्रकृति के साथ जुड़ती है।

दूसरी बात भारत के आर्थिक विकास को भी 5-50 बड़े शहरों के आधार पर नहीं चलाया जा सकता है। सवा सौ करोड़ का देश, कश्मीर से कन्याकुमारी, कच्छ से कामरोप, इतना विशाल देश, अगर लोगों को रोजगार देना है, आर्थिक प्रगति करनी है तो हमें विस्तार नीचे तक ले जाना पड़ेगा। ये Rurban जो कल्पना है, उसमें उसको Growth Center बनाने की कल्पना है। आर्थिक विकास की गतिविधि का केंद्र बिंदु बनाने की कल्पना है। छोटे-छोटे बाजार होंगे, कारोबार अगल-बगल के 5-10 गावों के लिए चलता होगा तो धीरे-धीरे वो Rurban बन जाएंगे। हमारे यहां जो Tribal belt है, उन Tribal belt में आदिवासी विस्तारों में अगर हम सोचकर के Growth Centre develop किए होते, एक-एक ब्लॉक में अगर Growth Centre develop किया होता तो हमारे आदिवासी क्षेत्रों के आर्थिक विकास के लिए इतने साल जो बीत गए, नहीं बीतते और इसलिए सुविधाएं मिलें, शिक्षा मिले, आधुनिकता मिले, साथ-साथ आर्थिक गतिविधि भी मिले। इन सारी बातों को जोड़कर के ये Rurban की योजना बनाई है। आज छोटे गांव में डॉक्टर जाते नहीं हैं, छोटे गांव में शिक्षक नहीं जाता लेकिन अगर Rurban बना दिया तो लोग वहां जाएंगे और नजदीक में 5,10,15 किलोमीटर दूरी पर दवाई सेवाओं के लिए जाना है या शिक्षा के लिए जाना है तो आराम से जाएगा, आएगा और इसलिए अगल-बगल के भी अनेक गांवों की quality of life में बहुत बड़ा बदलाव आएगा।

इस vision के साथ आज छत्‍तीसगढ़ में चार ऐसे संकूल के लिए प्रारंभ हो रहा है। मैं छत्‍तीगढ़ सरकार को बधाई देता हूं कि एक महत्‍वपूर्ण काम की योजना वो भी आदिवासि‍यों के बीच बैठ करके देश के लिए प्रारंभ हो रही है, इसका लाभ हिंदुस्‍तान के हर कोने को मिलने वाला है। और देखते ही देखते शहरों पर दबाव कम होगा। गांवों से बाहर जाने वालों के लिए एक अच्‍छी जगह उपलब्‍ध हो जाएगी, नए शहरों का निर्माण हो जाएगा। ये नए शहर व्‍यवस्थित होगे, आयोजित होंगे, आर्थिक गतिविधि के साथ जुड़े हुए होंगे। इस कल्‍पना को ले करके ये Rurban का कार्यक्रम आज प्रारंभ कर रहे हैं। मुझे विश्‍वास है कि एक साथ देश में जब योजना चलेगी, करोड़ों-करोड़ों लोगों को इसका लाभ होने वाला है।

भाइयों, बहनों यहां बहुत बड़ी मात्रा में मेरे किसान भाई-बहन हैं। मैं दो दिन पहले एक किसी पत्रकार ने लिखा था, फीचर को मैं पढ़ रहा था, उसने लिखा कि कई वर्षों के बाद किसानों के लिए भरोसे पात्र विश्‍वास पैदा करने वाली योजना पहली बार आई हैं, जो किसानों में एक नया विश्‍वास पैदा करेंगी। ये योजना है प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना। हमारे देश में ज्‍यादातर खेती ईश्‍वर पर आधीन है। अगर वर्षा हो गई तो ठीक, वर्षा नहीं हुई तो सूखा, ज्‍यादा हो गई तो पानी में डूब गया। प्रकृति अगर रूठ जाए तो सबसे पहला नुकसान किसान को होता है। ऐसी स्थिति में किसान को सुरक्षा मिलना जरूरी है। एक नया विश्‍वास मिलना जरूरी है। और इस बात को ध्‍यान में रखते हुए पहली बार देश में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना ला रहे हैं, जो पहले की योजनाओं से बिल्‍कुल अलग है। पहले तो किसान premium लेने के लिए तैयार ही नहीं होता था। उसको लगता था इतने रुपये अगर में premium दूंगा तो फिर बीज कहां से लाऊंगा, खाद कहां से लाऊंगा, पानी खेती में कहां से पिलाऊंगा, पशु को चारा कहां से खिलाऊंगा, वो देता ही नहीं था और एक बार अगर दे दिया तो पता चलता था दो-दो साल तक बीमा का पैसा ही नहीं आता है, कभी पता चलता था आया तो बीमा तो 30 हजार का लिया था लेकिन 6 हजार रुपया ही मिला। और बीमा तो उसको मिला जिसको बैंक का लोन मिला था, तो सीधे बैंक वाले को चला गया, किसान के पास तो कुछ आता ही नहीं था। ये जितनी बीमारियां थीं, सारी बीमारियों को हमने खत्‍म कर दिया। एक नई ताकत वाली प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना लाए जिसमें अब उसको प्रीमियम भी ज्‍यादा नहीं देना पड़ेगा। डेढ़ पर्सेंट, दो पर्सेंट पड़ा वो। वरना पहले तो कुछ इलाकों में 52-52 प्रतिशत प्रीमियम गया है। 8, 10, 14, 15 प्रतिशत तो Routine चलता था। हमने पक्‍का कर दिया कि दो पर्सेंट से ज्‍यादा नहीं, डेढ़ पर्सेंट से ज्‍यादा नहीं। ये पक्‍का कर दिया और इसलिए अब किसान को ज्‍यादा देना नहीं पड़ेगा।

दूसरा फसल खेत में से तैयार हो गई। अच्‍छी बारिश हुई, अच्‍छी फसल हो गई, और फसल काट करके खेत में ढेर पड़ा हुआ है। ट्रैक्‍टर मिल जाए ले जाने के लिए इंतजार हो रहा है। इतने में अचानक बारिश आ गई, तो उस बेचारे को एक पैसा नहीं मिलता था। बारिश आने तो उसका तो बरबाद हो गया, ढेर किसी काम का नहीं ऐसा ही ढेर देखने का। इस सरकार ने निर्णय किया कि फसल काटने के बाद खेत में अगर ढेर करके पड़ा है, और 14 दिन के भीतर-भीतर अगर कोई आपत्ति आ गई और नुकसान हो गया, तो उसको भी फसल बीमा मिलेगा।
ये बहुत बड़ा निर्णय किया है। पहले बहुत बड़े इलाके में तय होता था कि यहां वर्षा हुई तो इसका हिसाब लगाया जाता था। इसके कारण क्‍या होता था, पांच गांव में अच्‍छी बारिश हुई हो, दस गांव बेचारे सूखे में पड़े हों, उनको मिलता नहीं था। हमने कह दिया, कि छोटी इकाई को भी अगर उसका नुकसान हुआ है, तो उसको भी भरपाई हो जाएगा, उसको फसल का बीमा मिल जाएगा। इतना ही नहीं, दो-दो साल तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा। उसको technology के माध्‍यम से तत्‍काल पैसे मिल जाएं इसका प्रबंध किया जा रहा है। कभी-कभार किसान तय करता है कि जून महीने में बारिश आने वाली है, सब ready रखता है, लेकिन जब तक बारिश नहीं आती, वो बोवनी नहीं कर पाता है, जून महीना चला जाए वो बेचारा बारिश की इंतजार कर रहा है, जुलाई महीना चला जाए वो इंतजार कर रहा है, अगस्‍त महीना चला जाए वो इंतजार कर रहा है, बारिश आई नहीं। तो ऐसा किसान क्‍या करेगा? जिसको बेचारे को बारिश आई ही नहीं, बोवनी का ही मौका नहीं मिला। तो सरकार ने कहा है, इस फसल बीमा योजना के तहत अगर वो फसल बो भी नहीं पाया और उसका नुकसान हो गया, तो भी उसको 25 प्रतिशत उसका साल भर पेट भरने के लिए तुरंत पैसा दे दिया जाएगा।

भाइयो, बहनों हिंदुस्‍तान के इतिहास में किसानों के लिए इतना बड़ा सुरक्षा कवच अगर किसी ने दिया है तो पहली बार दिल्‍ली में आपने हमें बिठाया और हमने आपकी सेवा में रखा है। भाइयो, बहनों ये सरकार गरीबों के लिए है। ये सरकार दलितों के लिए है। ये सरकार आदिवासियों के लिए है। ये सरकार पीडि़तों के लिए है। ये सरकार वंचितों के लिए है। समाज में आखिरी छोर पर जो बैठे हैं, उनके कल्‍याण के लिए एक संकल्‍प करके ये सरकार आई है, और इसलिए चाहे घर बनाने की योजना हो, चाहे जन औषधि भंडार करना हो, चाहे Rurban mission हो, चाहे फसल बीमा योजना हो, चाहे स्‍वच्‍छता का अभियान हो, चाहे खुले में शौच बंद कराने का प्रयास हो, ये सारी बातें सिर्फ और सिर्फ गरीब के लिए हैं। गरीब की जिंदगी में बदलाव लाने के लिए हैं।

भाइयों, बहनों ये ही बातें हैं जो आने वाले दिनों में परिणाम लाने वाली हैं। और मेरा तो विश्‍वास जब 104 साल की मां कुंवरबाई आर्शीवाद दें तो मेरा विश्‍वास लाखों गुना बढ़ जाता है, लाखों गुना बढ़ जाता है। ये ही रास्‍ता है, इसी रास्‍ते से देश का कल्‍याण होने वाला है, और उस रास्‍ते पर हम चल पड़े हैं। फिर एक बार मैं आपका बहुत-बहुत आभार व्‍यक्‍त करता हूं, आप सबको नमन करता हूं, आप सबको धन्‍यवाद करता हूं। भारत माता की जय।
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