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Tuesday, 19 April 2016

We all have to work together for development of India that must be fast-paced & all inclusive: PM Modi

मंच पर विराजमान सभी महानुभाव और विशाल संख्या में पधारे मेरे भाईयों और बहनों,

मौसम बहुत अच्‍छा है। मैं जब महबूबा जी को सुन रहा था, उन्‍होंने जिस उमंग और उत्‍साह के साथ जम्‍मू कश्‍मीर के भविष्‍य को बनाने के लिए सपने देखें हैं संकल्‍प किया है। ऊर्जावान नेतृत्‍व दिया है और उनकी नई सरकार बनने के बाद मुझे आज पहली बार यहां आने का मौका मिला है। मैं उन्‍हें और पूरे जम्‍मू-कश्‍मीर को हृदय से बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं। वैसे आज का यह अवसर जम्‍मू-कश्‍मीर के जीवन में एक नया उमंग भरने वाला अवसर है, लेकिन ऐसे उमंग भरे  अवसर पर मुफ़्ती साहब की गैरहाजिरी हम महसूस करते हैं। बहुत लम्‍बा उनका कार्यकाल रहा सार्वजनिक जीवन में और जब भी मेरा उनसे मिलने हुआ एक बात उनके दिमाग में रहती थी देश को आगे बढ़ाने के लिए जम्‍मू-कश्‍मीर  को आगे  बढ़ाना। एक बात उनके दिल में रहा करती थी जम्‍मू और श्रीनगर के बीच में भी कभी कभी जो दूरी महसूस होती है, उस दूरी को भी मिटा देना और हिंदुस्‍तान में हर हिंदुस्‍तानी भारत में इस मुकुटमणि के लिए गर्व करता बने, ऐसी सरकार चलाना ऐसे विकास के काम करना यह सपने मुफ्ती साहब देखा करते थे।
इन दिनों जब भी मेरा महबूबा जी से मिलना हुआ है। मैं देख रहा हूं कि जिस मनोयोग के साथ लगन के साथ वो जम्‍मू-कश्‍मीर के विकास की चर्चा करती रहतीं थी। यहां भी बैठी मौसम की बात नहीं कर रही हैं – tourism का क्‍या होगा, वो road का क्‍या होगा, वहां bridge बनाना है उसका क्‍या होगा। जब यह भाव बनता है, विकास के प्रति जब यह समर्पण का भाव बन जाता है, तो विकास होना सुनिश्चित हो जाता है और इसलिए मैं महबूबा जी को बहुत बधाई देता हूं।

आज मुझे, मां वैष्‍णो देवी के चरणों में आ करके, तीन अवसर प्राप्‍त हुए तीन कार्यक्रम करने का मौका मिला। आज प्रात: सुबह university में convocation के लिए मुझे नौजवानों के साथ मिलने का अवसर मिला। हिंदुस्‍तान में बहुत कम लोगों को पता होगा कि जम्‍मू-कश्‍मीर करीब-करीब देश के सभी राज्‍यों के विद्यार्थियों को यहां अपने साथ  रख करके उनकी शिक्षा-दिक्षा का काम कर रहा है। यह अपने आप में जम्‍मू कश्‍मीर की एक वो पहचान है, जो देश को ताकत देती है देश का गौरव बढ़ाती है।
आज मुझे एक sports comlex का भी उद्घाटन करने को मिला। अगर खेल नहीं है, तो जीवन में खिलना भी बड़ा असंभव हो जाता है। जो खेलता है, वही खिलता है। कभी कभी हम जीवन में एक शब्‍द बड़े गर्व के साथ सुनते हैं और वो सिर्फ खेल के मैदान में नहीं सुनते जीवन के हर दौर पर हम सुनते हैं। कोई भी व्‍यक्ति कुछ अच्‍छा करें कुछ अलग तरीके से करे तो हम तुरंत कहते हैं नहीं-नहीं भाई  उसमें तो बड़ा sportsman spirit है। दो भाई  के बीच में भी कोई बात हो जाए और एक भाई कोई उदारता से व्‍यवहार करे तो नहीं-नहीं वो छोटा भाई है न वो तो बड़ा  sportsman spirit है। यह sportsman spirit शब्‍द खेल के मैदान में खिलाडि़यों ने जो साधना की है उसका परिणाम है कि ताकतवर बनना। अगर sport है तो sportsman spirit है और अगर sportsman spirit होता है तो अपने पन का भाव  किसी के लिए कुछ छोड़ने का इरादा किसी को साथ ले करके चलने का इरादा, कंधे से कंधा मिलाकर विजय प्राप्‍त करने का हौसला, कदम से कदम मिला करके चलने के इरादे यह sportsman spirit के साथ अपने आप उजागर होते हैं।

मां वैष्‍णो देवी के श्राइन बोर्ड के द्वारा यह जो sport complex बना है वो सिर्फ sport को ही बढ़ावा देगा ऐसा नहीं, वो sportsman spirit को बढावा देगा जो जीवन के अंदर एक lubrication का काम करता है। जीवन को एक ताकत देने का काम करता है।

जब कश्‍मीर का नौजवान हिंदुस्‍तान के क्रिकेट के अंदर चमकता है, तो सीना गर्व से फूल जाता है। 2017 में FIFA Under-17 World Cup फुटबाल का भारत में होने जा रहा है। ये FIFA Under-17 World Cup, भारत के नौजवानों में आने वाले दिनों में एक नया ताकत भरने वाला, नया हौंसला बुलंद करने वाला अवसर बनना चाहिए। दुनिया भर के लोग, खिलाड़ी आएंगे हमारे यहां, फुटबॉल में हम कोई अच्छी स्थिति में नहीं है, हम बहुत पीछे हैं। लेकिन फिर भी हम एक ऐसा माहौल बनाएं कि हम खेल को जिस प्रकार से गले लगाएं। दुनिया अनुभव करें, हिंदुस्तान की विविधता का, हिंदुस्तान की युवा शक्ति का, हिंदुस्तान के समार्थ्य का ऐसा माहौल बनाने में Sports Complex भी कोई न कोई भूमिका अदा करेगा, ऐसी मैं आशा करता हूं।

आज मुझे एक sports comlex का भी उद्घाटन करने को मिला। अगर खेल नहीं है, तो जीवन में खिलना भी बड़ा असंभव हो जाता है। जो खेलता है, वही खिलता है। कभी कभी हम जीवन में एक शब्‍द बड़े गर्व के साथ सुनते हैं और वो सिर्फ खेल के मैदान में नहीं सुनते जीवन के हर दौर पर हम सुनते हैं। कोई भी व्‍यक्ति कुछ अच्‍छा करें कुछ अलग तरीके से करे तो हम तुरंत कहते हैं नहीं-नहीं भाई  उसमें तो बड़ा sportsman spirit है। दो भाई  के बीच में भी कोई बात हो जाए और एक भाई कोई उदारता से व्‍यवहार करे तो नहीं-नहीं वो छोटा भाई है न वो तो बड़ा  sportsman spirit है। यह sportsman spirit शब्‍द खेल के मैदान में खिलाडि़यों ने जो साधना की है उसका परिणाम है कि ताकतवर बनना। अगर sport है तो sportsman spirit है और अगर sportsman spirit होता है तो अपने पन का भाव  किसी के लिए कुछ छोड़ने का इरादा किसी को साथ ले करके चलने का इरादा, कंधे से कंधा मिलाकर विजय प्राप्‍त करने का हौसला, कदम से कदम मिला करके चलने के इरादे यह sportsman spirit के साथ अपने आप उजागर होते हैं।

मां वैष्‍णो देवी के श्राइन बोर्ड के द्वारा यह जो sport complex बना है वो सिर्फ sport को ही बढ़ावा देगा ऐसा नहीं, वो sportsman spirit को बढावा देगा जो जीवन के अंदर एक lubrication का काम करता है। जीवन को एक ताकत देने का काम करता है।

जब कश्‍मीर का नौजवान हिंदुस्‍तान के क्रिकेट के अंदर चमकता है, तो सीना गर्व से फूल जाता है। 2017 में FIFA Under-17 World Cup फुटबाल का भारत में होने जा रहा है। ये FIFA Under-17 World Cup, भारत के नौजवानों में आने वाले दिनों में एक नया ताकत भरने वाला, नया हौंसला बुलंद करने वाला अवसर बनना चाहिए। दुनिया भर के लोग, खिलाड़ी आएंगे हमारे यहां, फुटबॉल में हम कोई अच्छी स्थिति में नहीं है, हम बहुत पीछे हैं। लेकिन फिर भी हम एक ऐसा माहौल बनाएं कि हम खेल को जिस प्रकार से गले लगाएं। दुनिया अनुभव करें, हिंदुस्तान की विविधता का, हिंदुस्तान की युवा शक्ति का, हिंदुस्तान के समार्थ्य का ऐसा माहौल बनाने में Sports Complex भी कोई न कोई भूमिका अदा करेगा, ऐसी मैं आशा करता हूं।



मैं उन गांववालों को हृदय से अभिनंदन करना चाहता हूं, उन्होंने कुछ दिया। जमीन देना बहुत सरल बात नहीं होती है, लेकिन गांववालों ने जमीन दी, उन्होंने ने तो जमीन दी, लेकिन वो जमीन आज उस रूप को धारण किया है जो लोगों को जीवन देने का काम करेगी और कितना जीवन में संतोष होगा। एक जमाना था जिस जमीन के हम मालिक थे, मां वैष्णो देवी के चरणों में वो जमीन हमने दे दी। आज ऐसा अस्पताल बना है, जो अस्पताल हजारों लोगों की जिंदगी बचाने का कारण बन गया है और मैं मानता हूं इससे बड़ा जीवन का संतोष क्या हो सकता है और इसलिए मैं सबसे पहले उन गांववालों को हृदय से बहुत-बहुत अभिनंदन करता हूं।

मैं आज Mata Vaishno Devi Shrine Board को भी... जब जगमोहन जी यहां गवर्नर हुआ करते थे तब से लेकर के Mata Vaishno Devi Shrine Board का विकास अनेक सामाजिक पृवत्तियां यहां पर आने वाली पाई-पाई का उपयोग जम्मू-कश्मीर के लोगों के लिए कैसे किया जाए इसका एक उत्तम उदाहरण आज इस Shrine Board ने प्रस्तुत किया है। वो Sports Complex चलाएं, वो University चलाएं, वो अस्पताल चलाएं और हिंदुस्तान के गणमान्य अस्पतालों में जिसकी गणना होगी, ऐसी अस्पताल सामान्य नहीं। हमारे देश में भी इस प्रकार की जो धन सम्‍पदा पड़ी है, उसका जितना समाज के लिए उपयोग होगा, उतनी समाज के लिए ताकत बनेगी। और यह Mata Vaishno Devi Shrine Board ने बता दिया है। एक रास्‍ता दिखाया है। और इसलिए वे भी इसके बहुत-बहुत अधिकारी हैं अभिनंदन के लिए।

मुझे विश्‍वास  है कि इस अस्‍पताल के कारण जम्‍मू कश्‍मीर के लोगों को अब गंभीर बीमारियों के लिए दूर तक नहीं जाना पड़ेगा। व्‍यवस्‍थाएं तो अच्‍छी होगी, लेकिन डॉक्‍टर्स भी अच्‍छे होंगे। और यहां का मौसम तो ऐसा है कहीं और ठीक होने में अगर 15 दिन लगता है, तो यहां मौसम ऐसा है पांच दिन में ठीक हो जाएगा। और जिस जगह हिंदुस्‍तान में दुनिया को पता चलेगा कि मां वैष्‍णो देवी के चरणों में एक ऐसा अस्‍पताल है, वहां ऐसा मौसम है कि बीमारी आधे समय में ठीक हो जाती है तो दुनिया भी tourist के नाते यही पर अस्‍पताल में medical care के लिए आ जाएगी। और यह संभव है हमें जम्‍मू-कश्‍मीर के लोगों का सपना देखना चाहिए कि tourism के लिए जैसे दुनिया हमारे यहां आती रही है वैसे health care tourism के लिए भी दुनिया को यहां आने के लिए हम प्रेरित कर सकते हैं। ऐसी ऊंचाईयों पर हम जम्‍मू कश्‍मीर को ले जा सकते हैं।

  
एक बात निश्‍चित है हिंदुस्‍तान तेज गति से तरक्‍की करे सवा सौ करोड़ देश‍वासियों के सपने साकार हो उस दिशा में हम सबको प्रयास करना है। चाहे कश्‍मीर हो या कन्‍याकुमारी, चाहे कच्‍छ हो या कामरूप एक संतुलित विकास चारों तरफ विकास, तेज गति से विकास हमारी सारी समस्‍याओं को समाधान विकास में है। देश को आधुनिक infrastructure चाहिए। स्‍कूल चाहिए, कॉलेज चाहिए, रोड चाहिए बिजली चाहिए, सामान्‍य मानव के विकास के जीवन में सुधार आए यह व्‍यवस्‍था चाहिए। जब मुफ्ती साहब थे 80 हजार करोड़ रुपये का पैकेज जम्‍मू कश्‍मीर की जिंदगी को बदलने के लिए लगाना है। भारत सरकार पूरी ताकत के साथ जम्‍मू कश्‍मीर का भाग्‍य बदलने के लिए सरकार के साथ कंधे से कंधा मिला करके हर कदम पर आगे बढ़ते हुए जम्‍मू-कश्‍मीर की आशाओं-आकांक्षाओं को पूर्ण कर रहा है।

अटल बिहारी वाजपेयी जी, जिनके प्रति जम्‍मू कश्‍मीर के लोगों की आपार श्रद्धा रही। शायद हिंदुस्‍तान में बहुत कम ऐसे लीडर हुए हैं कि जिनके प्रति सामान्‍य मानव के मन में इतनी आस्‍था हो जितनी अटल बिहारी वाजपेयी के लिए जम्‍मू कश्‍मीर में दिखाई देती है और अटल जी कहा  करते थे हमें जम्‍मू-कश्‍मीर को कैसे आगे बढ़ाना है। और वो कहते थे इंसानियत, कश्‍मीयरत और जम्‍मूरियत, इन तीन मजबूती के पिलर पर हमें जम्‍मू-कश्‍मीर को नई ऊंचाईयों पर ले जाना है। और हमने उन्‍हीं सपनों को वाजपेयी जी के जो सपने है इंसानियत, कश्‍मीयरत और जम्‍मूरियत उसके अंदर ‘सबका साथ सबका विकास’ का रंग भर दिया है। हर किसी का भला हो, हर किसी को साथ ले करके चले उन सपनों को पूरा करना है।


और मुझे विश्‍वास है tourism की दिशा में भी जम्‍मू कश्‍मीर देश की बहुत बड़ी सेवा कर सकता है। और जम्‍मू-कश्‍मीर जब tourist दुनिया का कोई आता है तो सिर्फ जम्‍मू-कश्‍मीर का आर्थिक भला होता है ऐसा नहीं, पूरे हिंदुस्‍तान का आर्थिक भला होता है। जम्‍मू कश्‍मीर के tourism को बल देने के लिए अनेक ऐसे क्षेत्र है कि जहां हम नये कदम  रख सकते हैं। और उसको आधुनिक tourism कैसे बनाए, adventure करना लोग चाहते हैं उनके लिए tourism कैसे बनाए। जो लोग spiritual activity में अपना गुजारा करना चाहते हैं उनके लिए tourism कैसे बनाए। अनेक ऐसे क्षेत्र है कि जहां जम्‍मू-कश्‍मीर के tourism को हम बल दे सकते हैं। और जम्‍मू-कश्‍मीर सरकार और भारत सरकार दोनों प्रतिबद्ध है कि जम्‍मू-कश्‍मीर में tourism के लिए आवश्‍क आधुनिक infrastructure तैयार हो। Tourism के लिए आवश्‍यक सुविधाएं, सामान्‍य मानव के लिए तैयार हो। रेल का काम बड़ी तेज गति से चल रहा है। उसका बहुत सुखद परिणाम आने वाले दिनों में मिलने वाला है। Road, जम्‍मू से श्रीनगर जाने का समय आधा कर देने के इरादेसे नये road बनाने की दिशा में काम चल रहा है। जितना infrastructure तेजी से बढ़ेगा लेह-लदाख तक हम जुड़ जाएंगे। तो मैं मानता हूं कि आने वाले यात्रियों को इस तरफ आने का मंच स्‍वाभाविक कर जाएगा। और इसलिए विकास की नई ऊंचाईयों को पार कर जाने के इरादे से infrastructure पर बल देते हुए दोनों सरकारे कंधे से कंधा मिला करके काम कर रही है।

मेरी महबूबा जी को अनेक-अनेक शुभकामनाएं हैं। मैं गवर्नर साहब का भी अभिनंदन करता हूं कि Shrine Board के द्वारा इतने initiative लिए है जो सामान्‍य जम्‍मू-कश्‍मीर के नागरिक भला करने में काम आएंगे। आप सबको भी मेरी बहुत-बहुत शुभकामनाएं, धन्‍यवाद।

Ref: http://www.narendramodi.in/category/speeches

Dream to do something & not to become someone: PM Modi at 5th Convocation of SMVDU

उपस्‍थि‍त महानुभाव और आज के केन्‍द्र बि‍न्‍दु, सभी युवा साथि‍यों,

आपके जीवन का यह बड़ा महत्‍वपूर्ण अवसर है। एक प्रकार से KG से प्रारंभ करे तो 20 साल-22 साल-25 साल, एक लगातार तपस्‍या का एक महत्‍वपूर्ण पड़ाव है और मैं नहीं मानता हूं की आप भी यह मानते होंगे कि‍ यह मंजि‍ल पूरी हो गई है। अब तक आपको कि‍सी ने यहां पहुंचाया है। अब आपको अपने आपको कहीं पहुंचाना है। अब तक कोई ऊंगली पकड़कर के यहां लाया है, अब आप अपने मकसद को लेकर के खुद को कसौटी पर कसते हुए, मंजि‍ल को पाने के लि‍ए, अनेक चुनौति‍यों को झेलते हुए आगे बढ़ना है। लेकि‍न वो तब संभव होता है कि‍ आप यहां से क्‍या लेकर जाते हैं। आपके पास वो कौन-सा खजाना है जो आपकी जि‍न्‍दगी बनाने के लि‍ए काम आने वाला है। जि‍सने यह खजाना भरपूर भर लि‍या है, उसको जीवन भर, हर पल, हर मोड़ पर, कहीं न कहीं यह काम आने वाला है। लेकि‍न जि‍सने यहां तक आने के लि‍ए सोचा था।

ज्‍यादातर अगर युवकों को पूछते हैं कि‍ क्‍या सोचा है आगे? तो कहता है, पहले एक बार पढ़ाई कर लूं। जो इतनी ही सोच रखता है, उसके लि‍ए कल के बाद एक बहुत बड़ा question mark जि‍न्‍दगी में शुरू हो जाता है कि‍ यह तो हो गया, अब क्‍या? लेकि‍न जि‍से पता है कि‍ इसके बाद क्‍या। उसे कि‍सी के सहारे की जरूरत नहीं लगती है। मॉ-बाप जब संतान को जन्‍म देते हैं तो उनकी खुशी का पार नहीं होता है। लेकि‍न जब संतान जीवन में सि‍द्धि‍ प्राप्‍त करता है तो मॉ-बाप अनंत आनंद में समाहि‍त हो जाते हैं। संतान को जन्‍म देने से जो खुशी है, उससे संतान की सि‍द्धि‍ हजारों गुना ज्‍यादा खुशी उन मॉ-बाप को देती है।

आप कल्‍पना कर सकते हैं कि‍ आपके जन्‍म से ज्‍यादा आपके जीवन की खुशी आपके मॉ-बाप को देती है, तब आपकी जि‍म्‍मेवारी कि‍तनी बढ़ जाती हैं। आपके मॉ-बाप ने कि‍न-कि‍न सपनों को लेकर के आपके जीवन को बनाने के लि‍ए क्‍या कुछ नहीं झेला होगा? कभी आपको कुछ खरीदना होगा, मनीऑर्डर की जरूरत होगी, बैंक में money transfer करने की इच्‍छा हो, अगर दो दि‍न late भी हो गए होंगे तो आप परेशान हो गए होंगे कि‍ पता नहीं मम्‍मी-पापा क्‍या कर रहे हैं? और मॉ-बाप ने भी सोचा होगा, अरे! बच्‍चे को दो दि‍न पहले जो पहुंचना था.. देर हो गई। अगली बार कुछ सोचेंगे, कुछ खर्च में कमी करेंगे, पैसे बचाकर रखेंगे ताकि‍ बच्‍चे को पहुंच जाए। जीवन के हर पल को अगर हम देखते जाएंगे तो पता चलेगा कि‍ क्‍या कुछ योगदान होगा, तब हम जि‍न्‍दगी में कुछ पा सकते हैं, कुछ बन सकते हैं। लेकि‍न ज्‍यादातर हम इन चीजों को भूल जाते हैं। जो भूलना चाहि‍ए वो नहीं भूल पाते हैं, जो नहीं भूलना चाहिए उसे याद रखना मुश्‍कि‍ल हो जाता है।

आप में से बहुत होंगे जि‍न्‍होंने बचपन में अपने मॉ-बाप से सुना होगा कि‍ इसको तो इंजीनि‍यर बनाना है, इसको तो डॉक्‍टर बनाना है, इसको तो क्रि‍केटर बनाना है। कुछ न कुछ मॉ-बाप ने सपने देखे होंगे और धीरे-धीरे वो आपके अंदर inject हो गए होंगे। दसवीं कक्षा में बड़ी मुश्‍कि‍ल से नि‍कले होंगे लेकि‍न वो सपने सोने नहीं देते होंगे क्‍योंकि‍ मॉ-बाप ने कहा था, inject कि‍या हुआ था और कुछ नहीं हुआ तो घूमते-फि‍रते यहां पहुंच गए और जब यहां पहुंच गए तो इस बात का आनंद नहीं है कि‍ इतनी बढ़ि‍या university में आए हैं, बढ़ि‍या शि‍क्षा का माहौल मि‍ला है। लेकि‍न परेशानी एक बात की रहती है कि‍ जाना तो वहां था, पहुंचा यहां। जि‍सके दि‍ल-दि‍माग में, जाना तो वहां था लेकि‍न पहुंच नहीं पाया, इसका बोझ रहता है, वो जि‍न्‍दगी कभी जी नहीं सकता है और इसलि‍ए मेरा आपसे आग्रह है, मेरा आपसे अुनरोध है। ठीक है, बचपन में, नासमझी में बहुत कुछ सोचा होगा, नहीं बन पाए, उसको भूल जाइए। जो बन गए है, उस वि‍रासत को लेकर के जीने का हौसला बुलंद कीजि‍ए, अपने आप जि‍न्‍दगी बन जाएगी।
कुंठा, असफलता, सपनों में आईं रूकावटें, ये बोझ नहीं बननी चाहि‍ए, वो शि‍क्षा का कारण बनना चाहि‍ए। उससे कुछ सीखना होता है और अगर उसको सीख लेते हैं तो जि‍न्‍दगी में और बड़ी चुनौति‍यों को स्‍वीकार करने का सामर्थ्‍य आ जाता है। पहले के जमाने में कहा जाता था कि‍ भई इस tunnel में चल पडा मैं, तो आखि‍री मंजि‍ल उस छोर पर जहां से tunnel पूरी होगी, वहीं नि‍कलेगी। अब वक्‍त बदल चुका है। इसके बाद भी जरूरी नहीं है कि‍ जि‍स रास्‍ते पर आप चल पड़े हैं वहीं पर आखि‍री छोर होगा, वहीं गुजारा करना पड़ेगा। अगर आप में हौसला है तो jump लगाकर के कहीं और भी चले जा सकते हैं, कोई और नए क्षि‍ति‍ज को पार कर सकते हैं। ये बुलन्‍दी होनी चाहि‍ए, ये सपने होने चाहि‍ए।

बहुत सारे वि‍द्यार्थी इस देश में, university में पढ़ते होंगे। क्‍या आप भी उन करोड़ों वि‍द्यार्थि‍यों में से एक है, क्‍या आप भी उन सैंकड़ों university में से एक university के student है? मैं समझता हूं सोचने का तरीका बदलि‍ए। आप उन सैंकड़ों university में से एक university के student नहीं है। आप उन करोड़ों वि‍द्यार्थि‍यों की तरह एक वि‍द्यार्थी नहीं है, आप कुछ और है। और मैं जब और है कहता हूं तो उसका तात्‍पर्य मेरा यह है कि‍ हि‍न्‍दुस्‍तान में कई university चलती होंगी जो taxpayer के पैसों से, सरकारी पैसों से, आपके मॉ-बाप की फीस से चलती होगी। यही एक university अपवाद है, जि‍समें बाकी सब होने के उपरांत माता वैष्‍णो देवी के चरणों में हैं। जि‍न गरीब लोगों ने पैसे चढ़ाए हैं, उसके पास पैसे नहीं थे घोड़े से पहुंचने के लि‍ए, उसकी उम्र 60-65-70 हुई होगी, वो अपने गांव से बड़ी मुश्‍कि‍ल से without reservation चला होगा, केरल से-कन्‍याकुमारी से, वो वैष्‍णो देवी तक आया होगा। मॉं को चढ़ावा चढ़ाना है इसलि‍ए रास्‍ते में एक वक्‍त का खाना छोड़ दि‍या होगा कि‍ मॉं को चढ़ावा चढ़ाना है। ऐसे गरीब लोगों ने और हि‍न्‍दुस्‍तान के हर कोने के गरीब लोगों ने, कि‍सी एक कोने के नहीं हर कोने के गरीब लोगों ने इस माता वैष्‍णो देवी के चरणों में कुछ न कुछ दि‍या होगा। दि‍या होगा तब तो उसको लगा होगा कि‍ शायद कुछ पुण्‍य कमा लूं लेकि‍न जो दि‍या है उसका परि‍णाम है कि‍ इतना बड़ा पुण्‍य कमाने का सौभाग्‍य प्राप्‍त हुआ है। इसलि‍ए आपकी शि‍क्षा-दीक्षा में इस दीवारों में, इस इमारत में, यहां के माहौल में उन गरीबों के सपनों का वास है। और इसलि‍ए औरों से हम कुछ अलग है और universities से हम कुछ अलग है और शायद ही दुनि‍या में करोड़ों-करोड़ों गरीबों के दो रुपए-पाँच रुपए से कोई university चलती हो, यह अपने आप में एक अजूबा है और इसलि‍ए इसके प्रति‍ हमारा भाव उन कोटि‍-कोटि‍ गरीबों के प्रति‍ अपनेपन के भाव में परि‍वर्ति‍त होना चाहि‍ए। मुझे कोई गरीब दि‍खाई दे, मैं जीवन की कि‍सी भी ऊँचाई पर पहुंचा क्‍यों न हो, मुझे उस पल दि‍खना चाहि‍ए कि‍ इस गरीब के लि‍ए कुछ करूंगा क्‍योंकि‍ कोई गरीब था जि‍सने एक बार खाना छोड़कर के मॉं के चरणों में एक रुपया दि‍या था, जो मेरी पढ़ाई में काम आया था। और इसलि‍ए यहां से हम जा रहे हैं तब आपको इस बात की भी खुशी होगी कि‍ बस ! बहुत हो गया, चलो यार कुछ पल ऐसे ही गुजारते हैं। ऐसा बहुत कुछ होता है। लेकि‍न जि‍न्‍दगी की कसौटी तब शुरू होती है जब अपने आप के बलबूते पर दि‍शा तय करनी होती है, फैसले लेने होते हैं।
अभी तो इस campus में कुछ भी करते होंगे, कोई तो होगा जो आपको ऊंगली पकड़कर के चलाता होगा। आपका जो senior होता होगा वो भी कहता है नहीं, नहीं ऐसा मत करो यार, तुम इस पर ख्‍याल रखो। अच्‍छा हो जाएगा। अरे campus के बाहर कोई चाय बेचने वाला होगा, वो भी कहता है भाई अब रात देर हो गई, बहुत ज्‍यादा मत पढ़ो, जरा सो जाओ, सुबह तुम्‍हारा exam है। कि‍सी peon ने भी आपको कहा होगा कि‍ नहीं-नहीं भाई ऐसा नहीं करते, अपनी university है, ऐसा क्‍यों करते हो? कि‍तने-कि‍तने लोगों ने आपको चलाया होगा।

और उसमें पहली बार दीक्षांत समारोह की कल्पना को साकार किया गया है। भारत में ये परंपरा हजारों वर्ष से संस्थागत बनी हुई है और एक प्रकार से दीक्षांत समारोह ये शिक्षा समारोह नहीं होता है और इसलिए मुझे आपको शिक्षा देने का हक नहीं बनता है। ये दीक्षांत समारोह है जो शिक्षा हमने पाई है, जो अर्जित किया है उसको समाज, जीवन को दीक्षा के लिए समर्पित करने के लिए लिए हमें कदम उठाने हैं, समाज के चरणों में रखने के लिए कदम उठाने हैं। ये देश विकास की नई ऊंचाइयों को छू रहा है। 800 Million Youth का देश जो 35 से कम Age Group का है, वो दुनिया में क्या-कुछ नहीं कर सकता है। हर नौजवान का सपना हिंदुस्तान की तरक्की का कारण बन सकता है। हम वो लोग हैं जिन्होंने उपनिषद् से लेकर के उपग्रह तक की यात्रा की है। उपनिषद् से उपग्रह तक की यात्रा करने वाले हम लोग हैं। हम वो लोग हैं जिन्होंने गुरुकुल से विश्वकुल तक अपने आप का विस्तार किया है, हम वो लोग हैं और भारत का नौजवान, जब Mars मिशन पर दुनिया कितने ही सालों से प्रयास कर रही थी।

हर किसी को कई बार Failure मिला, कई बार Failure मिला लेकिन ये हिंदुस्तान का नौजवान था, हिंदुस्तान की Talent थी कि पहले ही प्रयास में वो दुनिया में पहला देश बना, पहले ही प्रयास में Mars मिशन में सफल हुआ और हम लोग, हम गरीब देश के लोग हैं तो हम हमारी, सपने कितने ऊंचे नहीं होते, गरीबी में से रास्ता निकालना भी हम लोगों को आता है। Mars मिशन का खर्चा कितना हुआ, यहां से कटरा जाना है तो ऑटो रिक्शा में शायद 1 किलोमीटर का 10 रुपया लगता होगा लेकिन ये देश के वैज्ञानिकों की ताकत है, इस देश के Talent की ताकत देखिए कि Mars मिशन की यात्रा का खर्च 1 किलोमीटर का 7 रुपए से भी कम आया। इतना ही नहीं हॉलीवुड की जो फिल्में बनती हैं उससे कम खर्चे में मेरे हिंदुस्तान का नौजवान Mars मिशन पर सफलतापूर्वक अपने कदम रखा सकता है। जिस देश के पास ये Talent हो, सामर्थ्य हो उस देश को सपने देखने का हक भी होता है, उस देश को विश्व को कुछ देने का मकसद भी होता है और उसी की पूर्ति के लिए अपने आप को सामर्थ्य बनाने का कर्तव्य भी होता है, उस कर्तव्य के पालन के लिए, हम आज जीवन को देश के लिए क्या करेंगे। उसे पाने का अगर प्रयास करते हैं तो आप देखिए जीवन का संतोष कई गुना बढ़ जाएगा। आप यहां से कई सपने लेकर के जा रहे हैं और खुद को कुछ बनाने के सपने गलते हैं, ऐसा मैं नहीं मानता हूं लेकिन कभी-कभार बनने के सपने निराशा के कारण भी बन जाते हैं। जो बनना चाहो और नहीं बन पाए तो जैसा मैंने प्रारंभ में कहा, वो बोझ बन जाता है लेकिन अगर कुछ करने का सपना होता है तो हर पल करने के बाद एक समाधान होता है, एक नई ऊर्जा प्राप्त होती है, एक नई गति मिलती है, एक नया लक्ष्य मिलता है, नया सिद्धांत, आदर्श मिल जाता है और जीवन को कसौटी पर कसने का एक इरादा बन जाता है और वही तो जिंदगी को आगे बढ़ाता है और इसलिए आज जब माता वैष्णो देवी के चरणों से शिक्षा-दीक्षा प्राप्त करके आप जा रहे हैं और माँ भी खुश होती होगी कि लड़कियों ने कमाल कर दिया है, हो सकता है कुछ दिनों के बाद आंदोलन चले पुरुषों के आरक्षण का, वो भी कोई मांग लेकर के निकल पड़े कि इतने Gold Medal तो हमारे लिए रिजर्व होने चाहिए।

कल ही भारत की एक बेटी दीपिका ने हिंदुस्तान का नाम रोशन कर दिया। रियो के लिए उसका Selection हुआ और पहली बार एक बेटी जिमनास्टिक के लिए जा रही है। यही चीजें हैं जो देश में ताकत देती हैं। घटना एक इस कोने में और कहां त्रिपुरा, छोटा सा प्रदेश, कहां संसाधन होंगे, क्या संसाधन होने से वो रियो पहुंच रही है.... नहीं, संकल्प के कारण पहुंच रही है। भारत का झंडा ऊंचा करने का इरादा है इसलिए पहुंच रही है और इसलिए व्यवस्थाएं, सुविधाएं यही सब कुछ होती है जिंदगी में, ऐसा नहीं है। जीवन में जो लोग सफल हुए हैं, उनका इतिहास कहता है जिस अब्दुल कलाम जी ने एस University का प्रारंभ किया था, कभी अखबार बेचते थे और मिसाइल मैन के नाम से जाने गए। जरूरी नहीं है जिंदगी बनाने के लिए सुख, सुविधा, अवसर, व्यवस्था हों तभी होता है। हौंसला बुलंद होना चाहिए अपने आप चीजें बन जाने लग जाती हैं और रास्ते भी निकल आते हैं। वो दशरथ मांझी की घटना कौन नहीं जानता है। बिहार का एक गरीब किसान, वो पढ़ा-लिखा नहीं था लेकिन उसका मन कर गया एक रास्ता बनाने का और उसने रास्ता बना दिया और उसने इतिहास बना दिया। वो सिर्फ रास्ता नहीं था मानवीय पुरुषार्थ का एक इतिहास उसने लिख दिया है और इसलिए जीवन में उसी चीजों का जो हिसाब लगाता रहता था, यार ऐसा होता तो अच्छा होता, ऐसा होता तो अच्छा होता तो शायद जिनके पास सब सुविधाएं हैं, उनको कुछ भी बनने में दिक्कत नहीं आती लेकिन देखा होगा आपने, जिनके पास सब कुछ है उनको विरासत में मिल गया, मिल गया बाकी ऐसे बहुत लोग होते हैं जिनके पास कुछ नहीं होता है वो अपना नई दुनिया खड़े कर देते हैं इसलिए अगर सबसे बड़ी संपत्ति है और 21वीं सदी जिसकी मोहताज है और वो है ज्ञानशक्ति और पूरे विश्व को 21वीं सदी में वो ही नेतृत्व करने वाला है जिसके पास ज्ञानशक्ति है और 21वीं सदी वो ज्ञान का युग है और भारत का इतिहास कहता है जब-जब मानव जात ज्ञान युग में प्रवेश किया है, भारत ने विश्व का नेतृत्व किया है। 21वीं सदी ज्ञान युग की सदी है।

भारत के पास विश्व का नेतृत्व करने के लिए ज्ञान का संकुल है और आप लोग हैं, जो उस ज्ञान के वाहक हैं, आप वो हैं जो ज्ञान को ऊर्जा के रूप में लेकर के राष्ट्र के लिए कुछ करने का सामर्थ्य रखते हैं और इसलिए इस दीक्षांत समारोह से अपने जीवन के लिए सोचते-सोचते, जिनके कारण में ये जीवन में कुछ पाया है, उनके लिए भी मैं कुछ सोचूंगा, कुछ करूंगा और जीवन का एक संतोष उसी से मिलेगा और जीवन में संतोष से बड़ी ताकत नहीं होती है। संतोष अपने आप में एक अंतर ऊर्जा है, उस अंतर ऊर्जा को हमें अपने आप में हमेशा संजोए रखना होता है। मुझे महबूबा जी की एक बात बहुत अच्छी लगी कि यहां के लोगों के लिए, हम वो लोग हैं जिनकी बातें हम दुनिया भर में पहुंचाने वाले हैं कि कितने प्यारे लोग हैं, कितनी महान परंपरा के लोग हैं, कितने उदार तरीके के लोग हैं, कैसे प्रकृति के साथ उन्होंने जीना सीखा दिया और एक एबंसेडर के रूप में मैं जम्मू-कश्मीर की इस महान धरती की बात, भारत के मुकुट मणि की बात मैं जहां जाऊं, कैसे पहुंचाऊं, इस University के माध्यम से मैं कर सकता हूं, उसके एक विद्यार्थी के नाम कर सकता हूं और यही ताकत लेकर के हम जाएं, हिंदुस्तान के अनेक राज्य यहां हैं। एक प्रकार ये University, इस सभागृह में मिनी हिंदुस्तान नजर आ रहा है। भारत के कई कोने होंगे जिसको पता नहीं होगा कि जम्मू-कश्मीर की धरती पर भी एक मिनी हिंदस्तान अपने सपनों को संजो रहा है तब हर भारतीय के दिलों में कितना आनंद होगा कि जम्मू-कश्मीर की धरती पर भारत के भविष्य के लिए सपने संजोने वाले नौजवान मेरे सामने बैठे हैं, उनके लिए कितना आनंद होगा।
इस आनंद धारा को लेकर के हम चलें और सबका साथ, सबका विकास। साथ सबका चाहिए, विकास सबका होना चाहिए। ये संकल्प ही राष्ट्र को नई ऊंचाइयों पर ले जाता है और हम राष्ट्र को एक ऊंचाई पर ले जाने वाले एक व्यक्ति के रूप में, एक ऊर्जा के रूप में हम अपने जीवन में कुछ काम आएं, उस सपनों को लेकर के चलें। मेरी इन सभी नौजवानों को हृदय से बहुत-बहुत शुभकामनाएं हैं, विशेषकर के जिन बेटियों ने आज पराक्रम दिखाया है उनको मैं लाख-लाख बधाईयां देता हूं, उनके मां-बाप को बधाई देता हूं। उन्होंने अपने बेटियों को पढ़ने के लिए यहां तक भेजा है। बेटी जब पढ़ती है तो बेटी का तो योगदान है ही है लेकिन उस माँ का ज्यादा योगदान है, जो बेटी को पढ़ने के लिए खुद कष्ट उठाती है। वरना मां को तो करता होगा अच्छा होगा कि वो घर में है ताकि छोटे भाई के साथ थोड़ा उसको संभाल ले, अच्छा है घर में रहे ताकि मेहमान आए तो बर्तन साफ के काम आ जाए लेकिन वो मां होती है, जिसको अपने सुख के लिए नहीं बच्चों के सुख के लिए जीने का मन करता है तब मां बेटी को पढ़ने के लिए बाहर भेजती है। मैं उन माता को भी प्रणाम करता हूं, जिन माता ने  इन बेटियों को पढाने के लिए आगे आई है, उन सबको मैं प्रणाम करते हुए आप सबको बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं। धन्यवाद।

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